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बिजनौर में वर्षों से रह रहे लोंगों को जबरन निकाल कर मकान की जमींदोज

बिजनौर में वर्षों से रह रहे लोंगों को जबरन निकाल कर मकान की जमींदोज
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नितिन द्विवेदी , बिजनौर

एक ऐसा मकान जिसमे आप कई सालो से रह रहे हो यू कहे की आपकी तीन पीढ़ी इसी मकान मे गुजर गयी हो और अचानक इसी आसियाने को कोई आकर जबरन तोड़ने की बात करें और कहे की दस मिनट मे मकान खाली कर दो तो आप के पैरो तले ज़मीन खिसक जाएगी जी हा ऐसा ही कुछ हुआ बिजनौर के नगीना शहर मे जहाँ पर जिनके नाम का अपना मकान का बैनामा हैं इन्ही का मकान दूसरी महिला ने जबरन तुड़वा दिया और इनका सारा सामान और पैसे भी नहीं दिए l

पूरा मामला जबरन मकान तुड़वाने का और कब्ज़ा करने का हैं डॉक्टर फरदाना नाम की महिला जोकि नगीना शहर मे ही रहती हैं और इनका परिवार इसी जगह सन 1956 से यही रह रहा था और इसी मकान मे इन्होने अपना क्लीनिक खोल रखा है जोकि काफ़ी पुराना हैं लेकिन परसो अचानक कविता नाम की महिला जो अपना मकान होने का दावा कर रही हैं इन्होने अचानक आकर पुलिस बल के साथ दस मिनट का टाइम देकर मकान खाली करने को कहाँ जिसे सुनकर डॉक्टर फरदाना के पैरो तले जमीन खिसक गयी लेकिन जब ये नहीं मानी तो कविता ने इन्हे घर से बाहर निकालकर मकान तोड़ने बात करने लगी और पूरे मकान को बंद करवा दिया l इसके बाद डॉक्टर फरदाना सीधे थाने गयी और पुलिस को अवगत कराया पुलिस ने सारे पेपर लाने को कहाँ और रात 12 बजे तक का टाइम दिया l दूसरे दिन यानि की 11 जून को जब डॉक्टर फरदाना पेपर लेकर पुलिस थाने नगीना गयी तो दरोगा ने इनसे बात ही नहीं की और घर जाने के लिए कहाँ अब बड़ा सवाल ये है की आखिर पुलिस के मना करने ऐसी क्या वजह क्या थी? इसके बाद 11जून के दिन ही कविता ने पुलिस की मौजूदगी मे मकान तोड़ना शुरू कर दिया l

दरससल पूरा मामला आपको बताते चले की 1957 मे हरस्वरूप सिँह वर्मा कविता के पती के दादा और फजूल रहमान डॉक्टर फरदाना के ससुर दोनों आपस मे घनिष्ठ मित्र थे और हरस्वरूप वर्मा ने सन सत्तावन मे ही फजूल रहमान को ये पूरा घर बैनामा कर दिया था और तब से अब तक ये दोनों परिवार आपस मे मित्रता पूर्वक रह रहे थे लेकिन अब कविता के मन मे अचानक खोट पैदा हुआ इस पूरे घर की मालकिन बनने का जिसके कोई प्रूफ इनके पास नहीं हैं और अब ये जबरन इस सम्पत्ति की मालकिन बनना चाहती हैं जोकि इल्लीगल हैं l अब कल से जब मकान के ऊपर की दीवार तोड़ी जा रही थी पीड़ित परिवार प्रशासन और थाने का चक्कर काट रहा हैं लेकिन किसी ने एक भी ना सुनी यहाँ तक जब एसडीएम महोदय नगीना और कोतवाल नगीना से ये कहाँ गया की आप इस मकान का बैनामा देख लीजिय जो हमारे पास मौजूद हैं तो देखने के बजाय उल्टा इन्हे फटकार लगा दी और इस दफ़्तर से दूसरे दफ़्तर तक दौड़ते रहे इसी बीच मे कविता ने पुलिस और एसडीएम की मदत से पूरे मकान को कल शाम तक तोड़कर जमीदोश कर दिया और इन पीड़ित लोगो की एक ना सुनी गयी l


आपको बताते चले की जितनी बार डॉक्टर फरदाना का परिवार पुलिस के पास गया हैं उतनी तेजी से मकान और ज्यादा मजदूर लगा कर तोड़ा गया हैं अब सवाल ये उठता हैं की क्या प्रशासन और पुलिस ऐसे ही काम करेगा और योगी सरकार मे पीड़ितों की मदत नहीं होंगी और क्या खुद का बैनामा होते हुए इस परिवार को अपने ही मकान से बेघर होना पड़ेगा तस्वीरों मे आप खुद देख सकते हैं की बाजार के एकदम बीचो बीच मकान पर कितने लोग हथोड़ा चला रहे हैं और पूरा बाजार इस अत्याचार को तमाशबीन बनकर देख रहा हैं अब सवाल ये उठता हैं की पीड़ित परिवार का सारा सामान और क्लीनिक की पूरी लाखो रुपये की दवाइयां और 50 हजार कैश का कौन देगा क्योकि कविता ने डॉक्टर फरदाना को घर मे घुसने से मना कर दिया की तुम्हारा यहाँ कुछ नहीं हैं अब देखना ये हैं की इस पूरे मामले आला अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं क्योंकि मकान और क्लीनिक की एक- एक ईट निकाल कर मकान जमीदोश कर दिया गया l बिजनौर से स्पेशल कवरेज न्यूज़ के लिए नितिन द्विवेदी की रिपोर्ट l

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