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फैसल खान बिजनौर
बिजनौर कोर्ट परिसर में हुई हत्या के बाद सुरक्षा के लिए जजी परिसर के एक गेट को बंद करने के लिए बनाई गई दीवार आज सवेरे गिरा दी गई. इस दीवार होने का वकील शुरू से ही विरोध कर रहे थे उनका कहना है की जैजी का यह गेट जैजी का सबसे प्राचीन गेट है. इस रास्ते से अदालतों को जाने वाले सभी रास्ते सुगम हैं और आपात स्थिति में यह सुरक्षा के लिए भी खुला रहना जरूरी है.
हालांकि वकीलों का कहना यह भी है कि यह दीवार उन्होंने नहीं गिराई कोर्ट खुलने से पहले यह दीवार गिरी हुई थी और दीवार पुलिस ने ही बनाई है और पुलिस नहीं गिराई है. जबकि पुलिस इस मामले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.
बिजनौर की जजी परिसर में सीजेएम कोर्ट में दिनदहाड़े गोली चलाकर पेशी पर आए बदमाशों को गोलियों से भून दिया गया था .उसके बाद जजी परिसर की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे थे प्रयागराज उच्च न्यायालय ने भी प्रदेशभर की अदालतों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था. इसके बाद बिजनौर में जजी परिसर कि सुरक्षा को कड़ा करते हुए जजी परिसर का एक गेट पुलिस ने दीवार कराते हुए बंद कर दिया था और एक ही गेट से सभी लोगों का आवागमन रखा गया था और इस गेट पर आने वाले की जांच के बाद ही अंदर जाने की इजाजत दी जाती थी.
इस दीवार का वकील शुरू से ही विरोध कर रहे थे उनका कहना था यह प्राचीन गेट है. जजी का इस गेट से ही जजी के ज्यादा पहचान है और यह मुख्य सड़क पर इसको बंद नहीं किया जाना चाहिए था. वकीलों का तर्क है कि जिस दिन जजी परिसर में गोली चली थी तो गोली लगने से घायल सिपाही को सभी वकील इसी रास्ते से अस्पताल ले गए थे और अगर वह दूसरे रास्ते चले जाते तो उसके साथ कोई बड़ा हादसा हो सकता था.
क्योंकि डॉक्टर का कहना था कि यदि वह 2 मिनट भी घायल को लाने में लेट हो जाते तो कुछ भी हो सकता फिलहाल वकील अब इस दीवार को गिराने से मना कर रहे हैं उनका कहना है कि यह दीवार अपने आप गिरी है या पुलिस ने गिराई है यह पुलिस ही बता सकती है.




