अयोध्या

दीपों से दिव्य,भावनाओं से भव्य है अयोध्या : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Satyapal Singh Kaushik
24 Oct 2022 7:30 AM IST
अयोध्या पहुंचते ही मोदी ने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए, फिर राम मंदिर निर्माण की प्रगति देखी। उन्होंने रामकथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम में वन से लौटे भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक किया और फिर सरयू की आरती कर राम की पैड़ी पर भव्य दीपोत्सव व डिजिटल आतिशबाजी का शो भी देखा।

पीएम ने अपने उद्बोधन की शुरुआत जय सियाराम के साथ की और समापन भी सियावर रामचंद्र की जय से किया।उन्होंने कहा, राम के दर्शन और राजा राम का राज्याभिषेक भगवान राम की कृपा से ही मिलता है। जब राम का अभिषेक होता है तो हमारे भीतर भगवान राम के आदर्श और मूल्य और भी दृढ़ हो जाते हैं। राम के अभिषेक के साथ ही उनका दिखाया पथ और प्रदीप्त हो उठता है। अयोध्या के तो रज-रज में कण-कण में उनका दर्शन समाहित है। आज अयोध्या की रामलीलाओं के माध्यम से, सरयू आरती के माध्यम से, दीपोत्सव के माध्यम से और रामायण पर शोध और अनुसंधान के माध्यम से ये दर्शन पूरे संसार में प्रसारित हो रहा है।

श्रीराम के आदर्श हमें कठिन से कठिन लक्ष्यों को हासिल करने का हौसला देंगे।

इस बार दीपावली ऐसे समय पर आई है जब हमने कुछ समय पहले ही आजादी के 75 वर्ष पूरे किए हैं। आजादी के इस अमृतकाल में भगवान राम जैसे संकल्प शक्ति देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। भगवान राम ने अपने वचन में, अपने विचारों में, अपने शासन में, अपने प्रशासन में जिन मूल्यों को गढ़ा वो सबका साथ और सबका विकास की प्रेरणा है। सबका विश्वास और सबका प्रयास का आधार भी है। अगले 25 वर्षों में विकसित भारत की आकांक्षा लिए आगे बढ़ रहे हिंदुस्तानियों के लिए श्रीराम के आदर्श उस प्रकाश स्तंभ की तरह हैं जो हमें कठिन से कठिन लक्ष्यों को हासिल करने का हौसला देंगे।

श्रीराम से जितना सीख सकें उतना सीखना है।

इस बार लालकिले से मैंने सभी देशवासियों को पंच प्राणओं को आत्मसात करने का आह्वान किया है। इन पंच प्राणों की ऊर्जा जिस एक तत्व से जुड़ी हुई है वो भारत के नागरिकों का कर्तव्य है। आज दीपोत्सव के इस पावन अवसर पर हमें अपने इस संकल्प को दोहराना है। श्रीराम से जितना सीख सकें उतना सीखना है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। मर्यादा मान रखना भी सिखाती है और मान देना भी सिखाती है। हमारे धर्मग्रंथों में कहा गया है, 'रामों विग्रहवान धर्मः' अर्थात राम साक्षात धर्म के ज्ञानी कर्तव्य के सजीव स्वरूप हैं। भगवान राम जब जिस भूमिका में रहे, उन्होंने कर्तव्यों पर सबसे ज्यादा बल दिया। जब वो राजकुमार थे तब ऋषियों की, उनके आश्रमों की रक्षा की। राज्याभिषेक के समय श्रीराम ने आज्ञाकारी बेटे का कर्तव्य निभाया।

राम भारत की भावना के प्रतीक हैं

उन्होने पिता और परिवार के वचनों को प्राथमिकता देते हुए राज्य के त्याग को अपना कर्तव्य समझकर स्वीकार किया। वो वन में होते हैं तो वनवासियों को गले लगाते हैं। आश्रम में जाते हैं तो मां सबरी का आशीर्वाद लेते हैं। वो सबको साथ लेकर लंका पर विजय प्राप्त करते हैं। जब सिंहासन पर बैठते हैं तो वन से वही सब साथी राम के साथ खड़े होते हैं,क्योंकि राम किसी को पीछे नहीं छोड़ते। राम कर्तव्य भावना से मुख नहीं मोड़ते। राम भारत की उस भावना के प्रतीक हैं जो मानती है कि हमारे अधिकार हमारे कर्तव्यों से सिद्ध हो जाते हैं। इसलिए हमें कर्तव्यों के प्रति समर्पित होने की जरूरत है। संयोग देखिए हमारे संविधान की जिस मूल प्रति पर भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण का चित्र अंकित है, संविधान का वो पृष्ठ भी मौलिक अधिकारों की बात करता है। इसलिए हम जितना कर्तव्यों के संकल्प को मजबूत करेंगे राम जैसे राज्य की संकल्पना साकार होती जाएगी।

जैसे श्रीराम ने सबको अपनापन दिया वैसे ही अयोध्यावासियों को भी देना होगा

अयोध्या भारत के महान सांस्कृतिक विरासत का प्रतिबिंब है। राम अयोध्या के राजकुमार थे, लेकिन अराध्य वो पूरे देश के हैं। उनकी प्रेरणा, उनकी तपस्या, उनका दिखाया मार्ग हर देशवासी के लिए है। भगवान राम के आदर्शों पर चलना, हम सभी भारतीयों का कर्तव्य है। इस आदर्श पथ पर चलते हुए अयोध्यावासियों पर दोहरा दायित्व है। वो दिन दूर नहीं, जब विश्व भर से यहां आने वालों की संख्या अनेक गुना बढ़ जाएगी। जहां कण-कण में राम व्याप्त हो, वहां का जन-जन कैसा हो, वहां के लोगों का मन कैसा हो, ये भी उतना ही अहम है। जैसे श्रीराम ने सबको अपनापन दिया, वैसे ही अयोध्यावासियों को यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत अपनत्व से करना है। अयोध्या की पहचान कर्तव्यनगरी के तौर पर भी बननी चाहिए।

Satyapal Singh Kaushik

Satyapal Singh Kaushik

न्यूज लेखन, कंटेंट लेखन, स्क्रिप्ट और आर्टिकल लेखन में लंबा अनुभव है। दैनिक जागरण, अवधनामा, तरुणमित्र जैसे देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लेख प्रकाशित होते रहते हैं। वर्तमान में Special Coverage News में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

Next Story