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राम मंदिर निर्माण आस्था का विषय है या सत्ता की सीढ़ी?

राम मंदिर निर्माण आस्था का विषय है या सत्ता की सीढ़ी?
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संजय कुमार सिंह

राम मंदिर के नाम पर जमीन खरीदने से संबंधित घोटालों के बाद ऊपर से भले हर तरफ शांति है लेकिन कुछ सवाल तो उठ ही रहे हैं। ऐसा ही एक फॉर्वार्ड मेरे पास आया है। यह अजीब बात है कि मंदिर निर्माण में घोटाले पर कोई जवाब नहीं है और सवाल पूछने पर ही रोक लग गई है।

राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट, उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर केंद्र सरकार ने बनाया है। ट्रस्ट को कुछ बातें साफ-साफ और स्पष्ट रूप से देश के सामने रखना चाहिए।

1. राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण न्यास, मंदिर निर्माण के विशिष्ट उद्देश्य के लिए गठित है। न्यायालय ने 70 एकड़ भूमि भी इस कार्य हेतु दी है। अगर ट्रस्ट के उद्देश्य में इसके अतिरिक्त अन्य कोई काम करना भी शामिल हो तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिये।

2. ट्रस्ट ने दान मंदिर निर्माण के नाम से लिया है। अतः इस धन को अन्य किसी मद में खर्च नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा करना है तो दानदाताओं से अनुमति लें।

3. ट्रस्ट ने अब तक कितना धन एकत्र किया है, सार्वजनिक करें। संभवतः यह राशि चार हजार करोड़ रुपये है।

4. ट्रस्ट का अनुमान है कि मंदिर निर्माण में करीब 1600 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सवाल यह है कि जरूरत से ज्यादा धन क्यों इकट्ठा किया। बचे धन का क्या करेंगे? यह देश को बताया जाए।

5. क्या भूमि खरीदना ट्रस्ट के उद्देश्य में है? यदि है तो क्या इस हेतु कोई प्रस्ताव किया गया है उसे सार्वजनिक करें।

6. राम हमारी आस्था और आदर्श हैं। एक धोबी ने आरोप लगाया तो राम ने सीता की अग्नि परीक्षा ले ली। चंपत राय कम से कम खुद से जाँच की पहल तो करें। वो ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?

उपरोक्त तथ्यों पर उचित कदम नहीं उठाए जाते तो क्या यह नहीं माना जाए कि संघ के नेता आस्थावान राम भक्तों से विश्वासघात कर रहे हैं। क्या राम भाजपा को देश की सत्ता में बैठाने की सीढ़ी मात्र हैं?

Shiv Kumar Mishra
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