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अपने आध्यात्मिक विचारों से समाज में वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का प्रसार कर रही है मानस मुक्तामणि पत्रिका

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मानस सेवा समिति नामक इस संस्था के अध्यक्ष डॉ. रमानाथ त्रिपाठी को उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत-भारती सम्मान देने का निर्णय किया है।

पत्रिकाओं का व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। पत्रिकाएं मानव के विकास में उनके चरित्र-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। पत्रिकाओं को मनुष्य का अच्छा दोस्त भी बताया गया है। इन पत्रिकाओं को लिखने वाले लेखक व कवि के बारे में बताया गया है कि 'जहां न पहुंचे रवि,वहां पहुंचे कवि'अर्थात सूर्य की किरणें जहाँ नहीं पहुँच पातीं वहाँ कवि की कल्पना पहुँच जाती है।कुछ इसी तरह के उद्देश्यों को...

पत्रिकाओं का व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। पत्रिकाएं मानव के विकास में उनके चरित्र-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। पत्रिकाओं को मनुष्य का अच्छा दोस्त भी बताया गया है। इन पत्रिकाओं को लिखने वाले लेखक व कवि के बारे में बताया गया है कि "जहां न पहुंचे रवि,वहां पहुंचे कवि"अर्थात सूर्य की किरणें जहाँ नहीं पहुँच पातीं वहाँ कवि की कल्पना पहुँच जाती है।

कुछ इसी तरह के उद्देश्यों को लेकर आगे बढ़ रही है अयोध्या से प्रकाशित होने वाली "मानस मुक्तामणि पत्रिका"

अपने आध्यात्मिक विचारों से ओत-प्रोत मानस मुक्तामणि जन मानस में संस्कारों का बीज बो रही है और समाज में वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को आगे बढ़ा रही है।

पहली बार 1974 में प्रकाशित हुई मानस मुक्तामणि

आध्यात्मिक संस्था मानस सेवा समिति मोहन मंदिर की स्थापना डॉ. मनमोहन सरकार ने 11 अगस्त 1973 को की थी। इसके प्रथम संरक्षक राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास और मोतीलाल विश्वकर्मा थे। नवंबर 1974 में हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर 'तुलसी संदेश' नामक पत्रिका का संपादन किया गया जिसके संपादक स्वर्गीय कौशल किशोर मिश्र रहे। यही पत्रिका आगे चलकर "मानस मुक्तामणि" के नाम से विख्यात हुई।

मानस मुक्तामणि पत्रिका का उद्देश्य

पूरी तरह से विज्ञापन रहित इस आध्यात्मिक पत्रिका का मूल उद्देश्य समाज में वसुधैव कुटुंबकम् की भावना का विकास करना और मानव जीवन को संस्कारित बनाने का है। अपने इन्हीं उद्देश्यों के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रही है मानस मुक्तामणि

2023 में अपना स्वर्ण-जयंती कार्यक्रम को आयोजित करेगी मानस सेवा समिति

49 वर्ष की हो चुकी यह संस्था 2023 में अपना स्वर्ण-जयंती कार्यक्रम आयोजित करेगी जिसके अंतर्गत आयोजन स्थल अयोध्या में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा और मानस मुक्तामणि का स्वर्ण-जयंती महाअंक का भी विमोचन होगा

संपादक डॉ.मनमोहन सरकार ने बताया कि

इस विशुद्ध आध्यात्मिक पत्रिका के संपादक डॉ. मनमोहन सरकार (राष्ट्रपति पदक विजेता,पूर्व प्राचार्य वैदिकादर्श संस्कृत महाविद्यालय सरयूबाग,अयोध्या) ने बताया कि - "हमने मानस मुक्तामणि का संपादन जिन उद्देश्यों को लेकर किया था उन उद्देश्यों पर हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और इसी अनुक्रम में हमारे मानस सेवा समिति द्वारा 2023 में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिसकी शुरुआत हो चुकी है। हमने अपने समिति के अध्यक्ष अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा वक्ता, उत्तर प्रदेश सरकार जिन्हें भारत-भारती सम्मान देने जा रही है ऐसे विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉ. रमानाथ त्रिपाठी जी काआ सारस्वत सम्मान उनके दिल्ली स्थित निवास स्थान पर जाकर किया है। हमारे स्वर्ण-जयंती कार्यक्रम में मानस मुक्तामणि का स्वर्ण-जयंती महाअंक का भी विमोचन होगा और इसके साथ ही साथ आध्यत्म, साहित्य और समाज के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभूतियों का भी सम्मान किया जाएगा।

डॉ.सरकार ने बताया कि हमारे समिति के अध्यक्ष डॉ. रमानाथ त्रिपाठी जी को भारत-भारती सम्मान से नवाजे जाने पर सह- संपादक डॉ.संजय पाण्डेय, डॉ. स्वदेश मल्होत्रा 'रश्मि' , डॉ.रामानंद शुक्ल, वेद प्रकाश श्रीवास्तव,साधु शरण पाठक, केसीएम सिंह, शत्रुजीत सिंह,संजय धर द्विवेदी समेत हमारा समस्त मानस मुक्तामणि परिवार बहुत ही प्रसन्न है।

Satyapal Singh Kaushik
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