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फ़तेहपुर में यमुना की जलधारा बांधने का मामला एनजीटी पहुंचा

फ़तेहपुर में यमुना की जलधारा बांधने का मामला एनजीटी पहुंचा
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- शिकायतकर्ता ने एनजीटी में दर्ज करवाया केस

फ़तेहपुर । जनपद में मोरंग का व्यापार हमेशा से माफियाओ के लिए सोना साबित हुआ है यही वजह है कि पिछली सरकारों से लेकर तक सैकड़ों करोड़पति मोरंग ने पैदा किये हैं। मोरंग के इस व्यापार में प्रशासन और माफियाओं का जुड़ाव भी किसी से छिपा नहीं है यही वजह है कि पिछली सरकार में हुए पट्टों की जांच कोर्ट के आदेश के बाद से सीबीआई कर रही है। सीबीआई की टीम दो तीन वर्षों में दर्जनों बार फ़तेहपुर आई और दस्तावेज खंगाले।...

फ़तेहपुर । जनपद में मोरंग का व्यापार हमेशा से माफियाओ के लिए सोना साबित हुआ है यही वजह है कि पिछली सरकारों से लेकर तक सैकड़ों करोड़पति मोरंग ने पैदा किये हैं। मोरंग के इस व्यापार में प्रशासन और माफियाओं का जुड़ाव भी किसी से छिपा नहीं है यही वजह है कि पिछली सरकार में हुए पट्टों की जांच कोर्ट के आदेश के बाद से सीबीआई कर रही है। सीबीआई की टीम दो तीन वर्षों में दर्जनों बार फ़तेहपुर आई और दस्तावेज खंगाले। उन्होंने माफियाओं के द्वारा अर्जित की गई बेनामी

संपत्ति की भी जानकारी जुटाई है। अभी कुछ वर्षों पूर्व हुए अवैध खनन का मामला ठंडा भी नहीं पडा है कि जनपद की एक खदान में जलधारा बांधकर दूसरे छोर से खनन करने का मामला गर्माया हुआ है। इस पूरे मामले को एनजीटी ने संज्ञान में लिया है। एनजीटी में इस प्रकरण का केस दर्ज हुआ है।

बता दें कि जनपद की अढ़ावल खण्ड 11 खदान में नवम्बर माह के अंतिम सप्ताह में मोरंग के अवैध खनन के लिए जलधारा में पुल बांध दिया गया था। जिसकी शिकायत शहर निवासी विकास पांडे ने 24 नवम्बर को जरिये स्पीड पोस्ट सभी अधिकारियों को भेजी। शिकायतकर्ता विकास पांडे ने बताया कि जिले के अधिकारियों ने हफ़्तों हीलाहवाली की। जब उसने खनिज डायरेक्टर को पत्र भेजा तब पांच दिसम्बर को प्रशासन की संयुक्त टीम खण्ड में पहुंची और पुल को ध्वस्त कराया फिर दो मशीने सीजकर मामूली कार्रवाई करके टीम वापस लौट आयी। शिकायतकर्ता ने कहा कि जब टीम ने मौके पर पुल निर्माण या उसे बनाने का प्रयास पाया तो तब पट्टेधारक पर एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई।

जिले के कुछ अधिकारियों पर संलिप्तता का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने एनजीटी में केस फाइल किया है। शिकायतकर्ता ने कहा कि लगभग 15 दिन पट्टेधारक ने यमुना की एक धारा को बांध रखा था मगर जिले स्तर से कोई खास कार्रवाई नहीं की गई इसी का नतीजा यह रहा कि खण्ड संचालक ने जमकर अवैध खनन किया। इसकी खबरें भी दैनिक भास्कर अखबार में लगातार प्रकाशित हुईं। मगर स्थानीय प्रशासन मामले को दबाए बैठा रहा।

फिर शिकायतकर्ता ने बताया कि कार्यवाही न होने पर दोबारा उसने इसकी शिकायत जीपीएस वीडियो बनाकर उत्तरप्रदेश खनिकर्म की डायरेक्टर रोशन जैकब से की जिसको दैनिक भास्कर अखबार ने प्रमुखता से छापा जिस पर खनिज डायरेक्टर ने जिले के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। तब खनिज अधिकारी, राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम ने अढ़ावल 11 नम्बर खदान में छापा मारा और मौके पर कैंची बनाकर जलधारा बंधा हुआ पाया। जिसके बाद पट्टेधारक के खिलाफ पर्यावरण क्षति व सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धाराओं में 20 दिसम्बर को एफआईआर दर्ज की गई।

- एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अभी तक जुर्माना तय नहीं कर पाया विभाग

पट्टेधारक पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जिले का खनिज विभाग अभी तक पट्टेधारक पर जुर्माना तय नहीं कर पाया है और न ही पट्टेधारक की पर्यावरण एनओसी कैंसिल कराने की विभाग की ओर से कोई रिपोर्ट भेजी गई है। जबकि पर्यावरण संबंधी एफआईआर दर्ज होने के बाद विभाग को तत्काल इसका पत्राचार एनजीटी को करना चाहिए।

पट्टेधारक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जुर्माने की प्रक्रिया चल रही है। पूछने पर कि कितना जुर्माना लगाया गया है तो इस पर खान अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

अजीत पांडे खान अधिकारी

Vivek Mishra
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