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फिरोजाबाद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की 12 साल बाद फांसी की सजा

जेल के अधिवक्ता लियाकत अली ने देश के शीर्ष अदालत में मौत की सजा के फैसले के खिलाफ केस लड़ा और सुप्रीम कोर्ट ने हरिओम की तत्काल रिहाई के आदेश जारी किए.

फिरोजाबाद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की 12 साल बाद फांसी की सजा
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आगरा डिविजन का फिरोजाबाद जिला जो रंगीन कांच की चूड़ियों के लिए दुनियाभार में जाना जाता है, लेकिन यह 12 साल पहले 4 लोगों की हत्या की वजह से सुर्खियों में आया और अब सुप्रीम कोर्ट ने हत्याकांड के मुख्य आरोपी की मौत की सजा को रद्द कर दिया है.

फिरोजाबाद में 12 साल पहले 4 लोगों की हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. पुलिस ने तब इस मामले में हरिओम उर्फ ​​हीरो को गिरफ्तार किया था, जिसे जिला अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी और इस फैसले को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल तक जेल में रहने के बाद अब हरिओम और उनके रिश्तेदारों को बड़ी राहत देते हुए मौत की सजा को रद्द कर दिया है.

जानकारी के अनुसार, फिरोजाबाद के रामगढ़ थाना क्षेत्र के बड़ा मिर्जा का नगला निवासी निर्दोष देवी (40), पूनम (18), आशीष (12) और अंशुल (10) की 27 अक्टूबर 2008 को हत्या कर दी गई थी. उज्जवल (5) किसी तरह इस हमले में बच गया था. हत्या का पता तब चला जब दूधवाले ने सुबह दरवाजा खटखटाया.

5 को आजीवन कारावास

इस हत्याकांड में 6 लोगों को आरोपी बनाया गया और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश उमाशंकर शर्मा ने हरिओम को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य 5 आरोपियों को आजीवन कारावास दिया गया. सजा पाए लोगों ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालत की मौत की सजा के फैसले को बरकरार रखा.

मौत की सजा पाए हरिओम ने मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने के लिए में जेल प्रशासन से एक वकील की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था. जेल के अधिवक्ता लियाकत अली ने देश के शीर्ष अदालत में मौत की सजा के फैसले के खिलाफ केस लड़ा और सुप्रीम कोर्ट ने कल बुधवार को हरिओम की तत्काल रिहाई के आदेश जारी किए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि हरिओम का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, इसलिए उसे रिहा किया जा रहा है. हरिओम वर्तमान में आगरा सेंट्रल जेल में कैद है. जेल अधिकारियों ने पुष्टि की कि रिहाई आदेश आने पर हरिओम को रिहा कर दिया जाएगा.

हिंदुस्तानी बिरादरी के सचिव जियाउद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट के हरिओम के प्रति मानवीय दृष्टिकोण की प्रशंसा की और कहा कि कोर्ट ने न केवल कानून को ध्यान में रखा बल्कि मानवीय मूल्यों को भी अहमियत दी. इसी तरह देश के अन्य अदालतों में इसी तरह का न्याय होना चाहिए.

Shiv Kumar Mishra
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