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गजब के है एएसपी मोदीनगर, सच छापने पर भी देते है मुकदमा दर्ज करने की धमकी!

गजब के है एएसपी मोदीनगर, सच छापने पर भी देते है मुकदमा दर्ज करने की धमकी!
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लेकिन जनता की आवाज दबाने का प्रयास मत करों याद रखों यह प्रजा तन्त्र है और किसी की तरफ कहनेसे पूर्व देखों आपके पुलिस डिपार्टमेंट से जनता कितनी परेशान है।

हाल ही में तैनात हुए अंदर ट्रेनिंग एसएसपी का नया फॉर्म्युला क्राइम मापने का सामने आया है।कल उनसे थाने में मुलाकात हुई। बढ़ते अपराधों से शायद वह बोखलाहट में है। बीते दिनों शहर में एक व्यापारी के बेटे से 3 बदमाशों ने लूट की थी व उन पर बदमाशों ने फायरिंग भी की थी उन लुटेरों के विषय में गोविंदपुरी के निवासियों ने सुराग लगाकर पकड़वा भी दिया था लेकिन चौकी प्रभारी ने लुटरों को क्लीन चिट दे दी थी।

इस विषय में जानकारी हुई तो हमने प्रमुखता से उस न्यूज़ को प्रकाशित किया और इस प्रकरण की जानकारी एएसपी को दी व पीड़ितों को उनसे मिलवाया भी। उसके बाद दोबारा चौकी प्रभारी ने उन लुटेरों को पकड़ा व मामुली धाराओं में एसडीएम कोर्ट में पेश कर दिया।लुटेरों को मामूली धाराओं मे कार्रवाई करने के प्रकरण में जब एएसपी से जानकारी चाही तो उनका क्या जवाब मिला।

पुलिस को मौके से कोई सबूत गोली चलने के नही मिले न ही मोके से कारतूस मिले। उस बयान को भी हमने प्रकाशित कर दिया। सोमवार को जब एएसपी कोतवाली में मिले तो उनके मिजाज ही कुछ और थे। उनका कहना था कि रात हम से क्या पूछ रहे थे हम और पुलिस पर बदमाशों पर तमंचा लगाने के लिए दबाव बना रहे हो में पुलिस पर दबाव बनाने की कार्रवाई कर दूंगा और। न जाने उन्होंने क्या क्या कहा।
एएसपी महोदय अगर हम दलाल है हम पर कार्रवाई करों, हम पुलिस पर दबाव बना रहे है तो कार्रवाई करो, लेकिन उन बेचारों की एफआईआर भी दर्ज करवा दो जिनके साथ आपके कार्यकाल में घटनाए हो रही है।अगर गोविंदपुरी में पीड़ित के साथ लूट नहीं हुई तो उन को फायर न करने वालों को शांति भंग करने के आरोप में चालान क्यों किया।
आप बताए क्या संतपुरा की महिला से बदमाशों ने पुलिस बनकर आभूषण लेने की घटना नही हुई क्या उस महिला की न्यूज़ समाचार पत्रों में प्रकाशित नही हुई या लेकिन मुझे लगता है कि जिस तरिके से उक्त लूट में मौके से खोखा कारतूस नहीं मिला इस लिए बदमाशों के द्वारा फायर करने के सबूत नही मिले शायद इसी तरह सोने आभूषण के ले जाने के मौके पर सबूत नहीं थे इस कारण बेचारी उस व्रद्ध महिला की आपके प्रिय चौकी प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज नही की ऐसे ही कि उदाहरण है समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहें और आपको नजर नही आ रहें है।

शहर में हाइवे पर मोबाइल लूट रहें है तहरीर थाने में गुमशुदगी में ली जा रही है समाचार पत्रों में उन शुदगी दर्ज प्रकरणों की सच्ची घटना लूट छापी जा रही है वह भी भ्रामक न्यूज़ है आप उन खबरों का अवलोकन करों और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करवाएं। मैं तो सच लिखता हूँ और लिखता ही रहूंगा आप जेल भजवाए जहां चाहों वहां आकर सच्ची खबर छापने के आरोप में अरेस्टिंग दें दूंगा।

लेकिन जनता की आवाज दबाने का प्रयास मत करों याद रखों यह प्रजा तन्त्र है और किसी की तरफ कहनेसे पूर्व देखों आपके पुलिस डिपार्टमेंट से जनता कितनी परेशान है। अगर मीडिया न हो तो पुलिस हर रोज लूट को चोरी और चोरी को मारपीट में दर्ज करके सांप का रस्सी बना रहीं है।जीवन बीत गया पुलिस की इन कहानियों को देखते हुए।
दोस्तों समझ लो कि अग असपके साथ घटना होतो रिपोर्ट दर्ज करवाने से पूर्व मोके पर सबूत जुटा लेना। उसके बाद पुलिस को सूचना देना अन्यथा घटना फर्जी करार हो सकती है।
सर्वेश शर्मा मोदीनगर

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