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सरकारी हठ की भेंट चढ़ा एक और शिक्षामित्र

सरकारी हठ की भेंट चढ़ा एक और शिक्षामित्र
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मुरादनगर। सरकारी और न्याय व्यवस्था की हठ ने एक और शिक्षामित्र की जान ले ली। मृतक शिक्षामित्र क्षेत्र के गांव सरना का रहने वाला महेन्द्र पुत्र ब्रजेश्वर था।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए मानदेय पर शिक्षामित्रों की भर्ती की थी। भर्ती के लिये योग्यता इंटरमीडिएट थी लेकिन डेढ लाख से अधिक शिक्षामित्रों मे से अस्सी फीसदी शिक्षामित्र स्नातक या परास्नातक हैं। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने एन सी ई आर टी के सहयोग से स्नातक शिक्षामित्रों को आनलाइन बी टीसी कराने के बाद एक लाख से अधिक शिक्षामित्रों को नियमित अध्यापक बना दिया। सरना निवासी महेन्द्र भी नियमित होने वाले अध्यापकों में थे।

बाद मे न्यायालय मे दाखिल याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण रद्द कर इन्हें फिर शिक्षामित्र बना दिया जिन्हें महंगाई के इस दौर मे केवल दस हजार रुपये मिलते हैं। सरकारी नौकरी के लिये उम्र सीमा निकल जाने से तनाव मे घिरे कई हजार शिक्षमित्र अब तक अपनी जान दे चुके हैं। पारिवारिक जिम्मेदारी बढने के कारण और कर्ज मे घिरने के कारण महेन्द्र भी गहरे तनाव में था। बेरहम सरकारी व्यवस्था ने आखिर एक और युवा शिक्षामित्र की जान ले ली। शिक्षामित्रों मे इस दुखद हादसे से गहरा आक्रोश है।

Shiv Kumar Mishra
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