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जिले में गुमशुदा हुई बसपा, राजनीतिक गलियारों में है चर्चा

ऐसे में बहुजन समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष कुलदीप कुमार ओके की जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ गई है लेकिन वास्तविकता यह भी है कि कुलदीप कुमार ओके और उनकी टीम फिलहाल राजनीतिक मंच पर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं।

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सैयद अली मेंहंदी

गाजियाबाद। आगामी विधानसभा चुनाव में जहां एक और भाजपा और समाजवादी पार्टी जोर शोर से तैयारी में लग गई है वहीं बहुजन समाज पार्टी के संबंध में कहा जा सकता है कि बसपा अपनी चुनावी तैयारियों को शायद चोरी-छिपे कर रही है क्योंकि धरातल पर तो ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है जिसके चलते कहा जा सके कि बहुजन समाज पार्टी अपने पूरे तेवर और रणनीति के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। बड़ी बात यह है कि पार्टी की बैठक में हो या फिर किसी पद के लिए मनोनयन सब कुछ बंद कमरों में हो रहा है जिसका सरकार ना तो जनता से है ना जनहित से जुड़े मुद्दों से बसपा का कोई वास्ता दिखाई दे रहा है।

दरअसल समाजवादी पार्टी ने जब से बहुजन समाज पार्टी में प्रदेश स्तर पर सेंध लगाई है तब से गाजियाबाद में भी काफी हलचल है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी के कुछ बेहद सक्रिय युवा नेता बहुजन समाज पार्टी में स्थानीय स्तर पर एक बड़ी सेंध लगाने की जुगत में लग गए हैं। उनका मानना है कि बहुजन समाज पार्टी प्रदेश स्तर पर निष्क्रिय हो रही है, जिसके चलते बहुजन समाज पार्टी के युवा और ऊर्जावान नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में शामिल कराया जा सकता है। जिसका लाभ पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में भरपूर मिलने की संभावना है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष कुलदीप कुमार ओके की जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ गई है लेकिन वास्तविकता यह भी है कि कुलदीप कुमार ओके और उनकी टीम फिलहाल राजनीतिक मंच पर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं।

इसकी वजह चाहे कुछ भी हो लेकिन इतना तय है कि बसपा पार्टी कार्यालय पर ना तो रौनक है और ना ही चहल-पहल। वही विवादों से भी बसपा का नाता गहरा होता जा रहा है। पार्टी पदाधिकारियों के पोस्टर पर कालिख मलने की बात हो या अंदरूनी गुटबाजी। दोनों ही चीजें पार्टी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में बेहद घातक साबित हो सकती हैं। बड़ी बात यह है कि इस सारे मामले में बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारी शमसुद्दीन राईन को निर्णायक भूमिका निभानी पड़ सकती है क्योंकि स्थानीय स्तर पर अगर गुटबाजी पर विराम नहीं लगाया गया तो इस गुटबाजी का रंग पश्चिम उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी नजर आ सकता है।

दरअसल जिस तरह से बसपा में कुछ निष्कासित नेताओं ने जोरदार वापसी की और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ एक नई गुटबाजी शुरू की है उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि फिलहाल गाजियाबाद जनपद में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति बहुत अधिक अच्छी नहीं है। पार्टी के पदाधिकारियों को सत्तारूढ़ भाजपा और चिर प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के अलावा भीतर घात करने वाले अपने ही साथियों से भी जूझना पड़ रहा है।

Shiv Kumar Mishra
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