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श्री वैष्णो धाम मंदिर में मिलता है ईश्वरीय आनंद- संजीव गुप्ता

श्री वैष्णो धाम मंदिर में मिलता है ईश्वरीय आनंद- संजीव गुप्ता
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गाजियाबाद। सपनावत स्थित श्री वैष्णो धाम मंदिर में दूसरे दिन श्रीमद्भागवत गीता के सुंदर व्याख्यान अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्वामी श्री कृष्ण जी के मुखारविंद से किया गया। जिसमें व्याख्यानमाला के तहत कर्म योग पर व्याख्यान देते हुए आज के प्रवचन श्रीमद् भागवत गीता के माध्यम से यह बताया कि जो भी व्यक्ति गीता का नित्य पाठ करता है, नित्य श्रवण करता है, गीता सुनने मात्र से ही उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति के भीतर दृष्टि तो जन्म लेती है। गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को सारे संसार को देखते हैं। दृष्टि का ज्ञान भी है हम भी अपने घर में किसी विद्यार्थी को चाहते हैं की वह बड़ी यूनिवर्सिटी से ज्ञान प्राप्त करें। लेकिन गीता दृष्टि यानी ज्ञान तो देती है दृष्टि यानी एक लक्ष्य तो देती है। लेकिन व्यक्ति के जीवन में ज्ञान हो लक्ष्य हो ज्ञान और लक्ष्य तो बहुतों के पास है लेकिन बहुत से लोग जीवन में सफल तो नहीं हो पाते इसका सूत्र क्या है और जब आप ध्यान देंगे तब आपको पता चलेगा।

इस का सूत्र तो बस तू तो यही है कि हममें से बहुतों के पास दृष्टि तो है ज्ञान तो है और हम कहां जाना चाहते हैं कदाचित हमारे आपके जीवन में है फिर समस्या यह है कि हम पहुंच क्यों नहीं पा रहे हम पहुंच इसलिए नहीं पा रहे कि हमारे पास दृष्टि तो है लेकिन हमारे पास दर्पण नहीं है भगवान ने अर्जुन से कहा की जैसे आप संसार को देख सकते हो लेकिन उसी दृष्टि से आप स्वयं अपने आप को नहीं देख सकते अपने को देखने के लिए तो आपको दर्पण की भी जरूरत पड़ती है यदि दर्पण ना हो तो व्यक्ति अपने आप को नहीं देख पाएगा तो दृष्टि मानो यह बताती है कि आपको जाना कहां है और दर्पण यह बताता है कि आप हो कहां दृष्टि यह बताती है कि आपके भीतर क्षमता क्या है तो दर्पण यह बताता है कि आपने कमजोरी क्या है दृष्टि यह बताती है कि आप हो कौन सी चीजें हैं जिनको कर पाने में अक्षम हो तो दर्पण यह बता देता है कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो आप नहीं कर सकते जिसमें आप अक्षम हो और जब व्यक्ति के जीवन में या दृष्टि और दर्पण दोनों आ जाता है तो व्यक्ति के जीवन में जीने का आनंद प्राप्त होता है और एक्स सूत्र यह दिया कि भगवान श्रीकृष्ण ने यह भी हम को समझाने की कोशिश की कि हमारा संबंध और संपर्क कैसा किसी पात्र में जल भर कर के उसके ऊपर तेल की कुछ बूंदे डाल दें तो तेल की बूंदे जल पर रहेंगे महीनों पड़ी रहेंगे फिर भी वह तेल की बूंद और जल का हमेशा ही संपर्क होगा संबंध नहीं होगा लेकिन यदि आप दूध में जल डाल दे तब क्या होगा फिर वह जल्द दूध के संपर्क में आ जाता संबंध में आ जाता है और जैसे ही वह जल दूध के संबंध में आ जाता है तो जो कुछ भी घटना दूध के साथ घटती है वह जल के साथ लगती है संकेत क्या है जब आपका संबंध किसी से बन जाता है ना तो जो आपका और यदि संबंध गहरा हो तो जिससे आपका संबंध है जो कुछ भी उसके पास है वह सब आपके पास भी आ जाता है भगवान कृष्ण और अर्जुन का ऐसा ही अद्भुत संबंध है हमारी स्थिति उल्टी है हम क्या है हम संसार के संबंध में हैं और भगवान के संपर्क में हैं और गीता आपको यह कहती है कि इसी क्रम को आप उल्टा कर दो संसार के संपर्क में रहो और भगवान के संबंध में रहो और जिस दिन आप भगवान के संबंध बन गए ना तो फिर जो कुछ भी भगवान के पास है वह सब कुछ आपके पास आ जाता है इतना सुंदर व्याख्यान सुनने के पश्चात श्रोता गण भी भाव विभोर हो गए इस अवसर पर राज्यसभा से सांसद अनिल अग्रवाल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे जिनका व्यास गद्दी से स्वामी जी के द्वारा पटका माला देकर आशीर्वाद दिया गया मंदिर के संस्थापक संजीव गुप्ता एवं राजीव गुप्ता के द्वारा सांसद अनिल अग्रवाल को स्मृति चिन्ह एवं बुके भेंट करके स्वागत किया गया कार्यक्रम में देवेंद्र हितकारी सौरभ जायसवाल राकेश गोयल प्रदीप गुप्ता बसंत अग्रवाल जेवेंद्र गुप्ता आदि प्रमुख भक्तगण मौजूद रहे।

Shiv Kumar Mishra
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