गाजियाबाद

गाजियाबाद में रालोद और सपा गठबंधन हुआ फेल, बसपा ने बीजेपी को निर्विरोध चुनवाया

Shiv Kumar Mishra
27 Jun 2021 12:10 PM IST
गाजियाबाद में रालोद और सपा गठबंधन हुआ फेल, बसपा ने बीजेपी को निर्विरोध चुनवाया
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गाज़ियाबाद में बीजेपी के केवलः दो सदस्य निर्वाचित थे। उनके पास प्रस्तावक के लाले पड़े थे। सपा और आर एल डी ने नसीम बेगम चौधरी को संयुक्त उम्मीदवार बनाया था। आठ वोट थे इनके। जीतना तय था। अचानक बीएसपी के मेम्बर बीजेपी के प्रस्तावक बन गए। आरएलडी की प्रस्तावक पर्चा दाखिल करने के लिए ही नहीं पहुंच पाई। सपाई धरना देते रहे, आरएलडी के नेता गायब रहे और दो मेम्बर के साथ सुनीता त्यागी जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध हो गयी।

भले ही इसमें प्रशासन या गुंडई के आरोप लगे लेकिन इटावा नें कैसे सपा ने निर्विरोध जितवाया? अखिलेश जयंत असफल रहे, दोनो के बीच विश्वसनीयता का अभाव है। जान लें सपा का वोट या तो यादव को जाएगा या मुसलमान के खिलाफ हिन्दू राष्ट्र वालों को। बानगी सामने है गाज़ियाबाद जो आधी दिल्ली है।

यूपी में ऐसी तस्वीरें फिर दिख सकती है। राज्य के रण केन बीजेपी की जीत के लिए चौसर बिछाई जा चुकी है। दो चालों में बोजेपी जीत चुकी है एक मायावती ने घोषणा कर दी है कि वह अकेले चुनाव लड़ेंगी दूसरा पंचायत चुनाव में सपा के 12 उम्मीदवार पर्चे नही दाखिल कर पाए हैं जिसका लाभ निस्संदेह बीजेपी को मिलेगा।

दलित मतों का विभाजन अब बसपा, भाजपा और अन्य दलों के बीच होना तय है।प्रदेश में दलित वर्ग कुल आबादी का 21.5 फीसदी है अगर यह वोट साझा विपक्ष को जाता तो इसका भारी नुकसान भाजपा को सहना पड़ता लेकिन अब यह मुश्किल होगा। कुछ लोग कह सकते हैं कि चंद्रशेखर रावण खेल करेगा, कुछ नही कर पायेगा उनका कोई वोट बैंक नही है।

यूपी में मायावती दलित हितों का हवाला देकर चुनाव बाद भाजपा से गठबंधन कर सकती है। वह जानती हैं कि केंद्र में बीजेपी की सरकार होने से अगर वह राज्य में बीजेपी के साथ होंगी तो ज्यादा ताकतवर होंगी। दुखद यह है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने दलितों का विश्वास जीतने के लिए जमीन पर कुछ नही किया है। पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के ज्यादातर उम्मीदवार एक ही बिरादरी से खड़ा करके अखिलेश ने वैसे ही सबको खफा कर दिया है ,कांग्रेस संगठन में भी दलितों का वर्चस्व नही के बराबर है।

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