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कोबिड से तबाही की खामियां शोर कैसे दब जाय ,इसी प्रयास का नाम है सिस्टम !

कोबिड से तबाही की खामियां शोर कैसे दब जाय ,इसी प्रयास का नाम है सिस्टम !
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गोरखपुर | तश्वीरें बहुत हैं दिखाने को - शिकवे बहुत हैं सुनाने को भावनायें बहुत है बताने को - कुछ अधिकार है तुम पे जताने को ! ये सब तब हो जब तुम देवता हो जाओ पत्थर के , मै दासभक्त बन तुमको अपनी दास्तां सुनाऊं | पर अफसोस तुम इंसान हो !

आज ये लाईन लिखकर अपनी बात शुरू करना चाहता हूँ क्योंकि आज कागजी - दम्भी आश्वासन , विश्वास की झूठी बयार बहाने की कोशिश ऊपर से वा- वाह कहो ! आह तो बिलकुल ही नहीं ऐसा शपथ दिलवाने की कोशिश हो रही है | शासन फेल - प्रशासन किंकर्तव्यविमूढ | अवसरवादी चाटुकार, भरी बाजार मे धू- धू कर जलती आग को वाह क्या रोशनी है समझाने की कोशिश कर रहे हैं | एक छोटी सी पड़ताल और कुछ विचलित कर देने वाली आन द स्पाट स्वीरें आपको सारा सच बयां कर देंगी , कभी हिम्मत दिखाईये, जाइये उन जगहों पर ! गोरखपुर शहर मुख्यमंत्री की खास निगरानी वाला शहर है | यहाँ चिकित्सा सुविधा का हब है | यहाँ का सबसे बड़ा व्यापार है चिकित्सा ! आज कोबिड ने चहुओर तबाही मचा दी है | सरकार कमर कस कर समर मे है | पूरी व्यवस्था एक सिस्टम चलाता है | सिस्टम तय करती है सरकार |आज सिस्टम फेल है | पर क्यों ? हमारी मिलीट्री फेल हो जाय तो !

सिस्टम मे इतना लोच है कि जाच पड़ताल, दवाई , मौत , संस्कार सब ठेके पर दे दिया गया है | कोई मजिस्ट्रेटियल निगरानी नहीं | कोबिड जांच चिकित्सा- मौत मनमानी पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रही | ऊपर से बच जानेवालों की लिस्ट जारी, कि इतने को बचा लिया गया | इस शोर में खामियां कैसे दबा दी जांय, यह प्रयास लगातार सिस्टम और सरकार द्वारा किया जा रहा है | ऐसा नहीं है कि सरकार या सिस्टम के लोग इसमे बच जायेंगे फिर भी अहं की कोई दवा नहीं ! अस्पतालों मे आक्सीजन खत्म पर शोर नहीं, मरीज आक्सीजन के अभाव में , अस्पताल से बाहर कोई आवाज नहीं | बस सकारात्मक बोलिये फरमान हुआ है | मेरे आक्रोश के शब्दकोश में बीआरडी मेडिकल कालेज को अनाथ-असहाय कबिलाई भवन कहें तो अतिशयोक्ति नही होगा | हर रोज श्मशान जाईये कुछ देर गुजारिये किसी से कुछ पूछना नहीं पड़ेगा |

अंतिम संस्कार के लिये पर्ची बनवाना फिर पीछे- पीछे सिफारिश करते घूमना कि किसी तरह संस्कार हो जाय | विवशता ये कि निश्चित टीम ही करेगी | अब ये उसकी मर्जी कि वह कब करेगा | इलेक्ट्रिक शवदाह का आपरेटर ये बोल सकता है कि मै सोने जा रहा हूँ और मशीन खराब है | गैस सिलेंडर फट सकता है | ये मैने प्रेक्टिकल देखा- भुगता है | जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारी अपने चेम्बर से मीठी बातें जरूर कर लेगे अगर आप शिकायत करते है | लाशों की बात करें तो हर 20 मिनट में एक एम्बुलेंस श्मशान पहुँच रही है | मुख्यमंत्री के शहर में एक अद्भुत सन्नाटा और खौफ है | बीआरडी मेडिकल कालेज से डेडबाडी लेने में पूरा दिन लग जाना आम बात है | मृतक के जेवर गहने मोबाईल चोरी हो जाने की शिकायत भी आम है | सिस्टम को अपना सिस्टम ही नहीं पता है इसलिये शव दे देने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र लेने के लिये चक्कर काटना तिमारदार की विवशता है | किसान नेता प्रबल शाही मुख्यमंत्री से कहते है कि एम्स व गोरखनाथ मंदिर के तमाम संस्थान कोबिड मरीजों के लिये खोल दिये जांय क्योंकि यह भी जनता की ही सम्पति है और विपदा में जनता की मदद मे प्रयोग की जानी चाहिए |

जिम्मेदार अधिकारी नगर आयुक्त से लेकर जिलाधिकारी तककोबिड मामले में रेडिमेड जवाब दे रहे है | आक्सीजन की कमी पर या फिर जो मरीज आईसोलेट है उन्हें तत्काल आक्सीजन कैसे उपलब्ध होगा इन सवालों को बगले डाल अधिकारी पल्ला झाड़ ले रहे हैं | फिलहाल संयम रखना होगा | पूर्व

पार्षद हीरालाल शहर में अव्यवस्था पर कहते हैं कि सिस्टम जहाँ गलत कर रहा है उस परआवाज खुलकर उठानी होगी | जिम्मेदारों के बहरे कान जोरदार प्रतिकार से खोलने होंगे घरों में दुबक जाने से तानाशाही - नौकरशाही इस बुरे वक्त में सर चढ़ के बोले सावधान करना होगा | जो भी हो इस बुरे हालात में अपने कर्तव्य के प्रति इमानदारी व सावधानी से सुरक्षा का ध्यान सभी रखें ! फिलहाल सिस्टम फेल है !

धनज्जय शुक्ला

Shiv Kumar Mishra
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