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हाथरस कांड की जांच सीबीआई करे, एसआईटी करे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते, निम्नलिखित सवालों का जवाब मिल जाए!

हाथरस कांड की जांच सीबीआई करे, एसआईटी करे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते, निम्नलिखित सवालों का जवाब मिल जाए!
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राजेंद्र चतुर्वेदी

हाथरस कांड की जांच सीबीआई करे, एसआईटी करे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बशर्ते, निम्नलिखित सवालों का जवाब मिल जाए।

जिन सवालों का जवाब सबको जानना चाहिए, वे ये रहे।

1- सी आर पी सी में साफ प्रावधान है कि रेप का आरोप लगाने वाली महिला का मेडिकल 9 घंटे के अंदर हो ही जाना चाहिए। निर्भया कांड के बाद बनी वर्मा समिति ने मेडिकल के इस समय को घटाकर तीन घंटे कर दिया। जांच करने वाली एजेंसी इस सवाल का जवाब दे कि हाथरस की पीड़िता का मेडिकल 11 दिन बाद क्यों हुआ?

2-जब उस लड़की की हालत सीरियस थी, तो उसे प्राथमिक उपचार देकर हाथरस से लखनऊ या दिल्ली क्यों रेफर नहीं किया गया? उसे 13-14 दिन तक हाथरस में ही क्यों रहने दिया गया? ये डॉक्टर्स का खुद का निर्णय था या उन्हें किसी ने पीड़िता को रेफर न करने का आदेश दिया था? अगर डॉक्टर का खुद का फैसला था, तो उसका नाम बताया जाए। अगर डॉक्टर को किसी ने आदेश दिया था, रेफर न करने का, तो आदेश देने वाले का नाम बताया जाए?

3- पीड़िता को सड़क के रास्ते रेफर क्यों कराया गया था, एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? उसे एम्स या गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में क्यों भर्ती नहीं कराया गया।?

4- उत्तर प्रदेश महिला आयोग की टीम न पीड़िता के बयान लेने हाथरस पहुंची, न दिल्ली,क्यों नहीं पहुंची? उसे किसने रोका था?

5- पीड़िता के दुखद निधन के बाद उसका शव रात में क्यों जलाया गया? उसके मां बाप भाई और अन्य रिश्तेदारों को अंतिम संस्कार से वंचित क्यों रखा गया? निर्भया के अंतिम संस्कार जैसा उदाहरण क्यों पेश नहीं किया गया? क्या यूपी सरकार कुछ छिपाना चाहती थी?

6- पीड़िता के गांव में दो दिन तक मीडिया और विपक्ष के नेताओं को क्यों नहीं घुसने दिया गया? दो दिन तक गांव का कोई व्यक्ति बाहर नहीं जा पाया, बाहर से कोई गांव के भीतर नहीं जा पाया, ये क्यों हुआ? दो दिन तक गांव के सभी लोगों को घरों में क्यों बंद रखा गया?

7- जब गांव के लोग घरों में बंद थे, बाहर के लोगों का गांव में प्रवेश बंद था, उस समय पुलिस की टुकड़ियां कई बार गांव के भीतर जाकर सर्च ऑपरेशन चलाती देखी गईं। ये सर्च ऑपरेशन किसके आदेश पर चला, किस पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में चला, उसमें क्या खोजा गया?

8-जब पीड़िता हाथरस में भर्ती थी, नियम के अनुसार उसका कलमबंद बयान लिया गया। ये बयान सीधा अदालत में पेश किया जाता है, उसे लीक किसने कर दिया? लीक करने वाले के खिलाफ केस दर्ज क्यों नहीं हुआ, उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? मान लो कि वह बयान लीक नहीं हुआ, मीडिया अफवाहें फैला रहा है, तो यूपी सरकार ने सफाई क्यों जारी नहीं की?

9- जब पीड़िता अस्पताल में भर्ती थी, उसी दौरान का पीड़िता की मां का बताकर एक वीडियो समाचार चैनलों पर चल रहा है, जिसमें मां कह रही है कि बेटी के साथ रेप नहीं हुआ, रेप की कोशिश हुई थी। क्या ये वीडियो सही है? अगर सही है तो किसने बनाया, या किससे बनवाया गया, क्यों बनवाया गया? क्या इसलिए कि इसके आधार पर यह साबित किया जा सके कि पीड़िता के रेप नहीं हुआ था?

(इस पॉइन्ट के साथ यहां यह साफ कर देना जरूरी है कि रेप के केस में अदालत और पुलिस के सामने ही पीड़िता और उसके परिवार वाले सच बोलते हैं। समाज में किसी भी पीड़िता के मां बाप परिजन, रेप होने के बाद भी यह स्वीकार नहीं करते कि उनकी बेटी के साथ रेप हुआ। रेप की बात तभी स्वीकार की जाती है, जब पीड़िता की मौत हो जाती है। वरना अदालत में परिवार अलग बात करता है, समाज में अलग। समाज से परिवार रेप इसलिए छिपाता है कि उसके सामने उसकी बहन बेटी के भविष्य का सवाल होता है। हाथरस की पीड़िता की मां के सामने भी अपनी बेटी के भविष्य का सवाल होगा, क्योंकि वह मानकर चल रही होगी कि उसकी बेटी ठीक हो जाएगी। इसीलिए उसने बिल्कुल बोला होगा कि उसकी बेटी के साथ रेप नहीं हुआ, ताकि ठीक होने के बाद बेटी को जीवन में कोई दिक्कत न आए। उसका वीडियो बनाना और उस वीडियो के आधार पर अब यह साबित करना कि पीड़िता के साथ रेप नहीं हुआ था, हरामीपन की पराकाष्ठा है)

लौटते हैं सवालों पर

10- पीड़िता के परिजनों के फोन क्यों टेप हो रहे हैं, किसके आदेश पर हो रहे हैं?

11- जो सवर्ण एकता परिषद बलात्कारियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, उसके पीछे कौन है? उसे फंडिंग कौन कर रहा है? क्या ये आरएसएस का प्रॉक्सी संगठन है?

12-इलाके में धारा 144 लागू होने के बावजूद ठाकुरों की पंचायतें क्यों हो रही हैं? इन पंचायतों में शामिल होने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई है?

13- पीड़िता के घर के ठीक सामने बैठकर उसके परिजनों को कई बार धमकाया जा चुका है। इन गुंडों पर दलित अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ये गुंडे किसके संरक्षण में हैं।

जिस जांच में इन सवालों के जवाब न मिलें, वह जांच, जांच के नाम पर धूर्तता होगी।

Shiv Kumar Mishra
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