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UP के जूनियर विद्यालयों में पढ़ाने वाले अनुदेशक मनरेगा में मजदूरी करने को मजबूर, विश्व गुरु बनने वाले भारत देखिए ये वीडियो

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ताजा मामला देखने को प्रतापगढ़ से मिल रहा है, जहां एक अनुदेशक मजदूरी कर रहा है।

उत्तर प्रदेश के जूनियर विद्यालयों में पढ़ाने वाले अनुदेशक सात हजार के अल्प मानदेय पर काम करने पर मजबूर हैं। दुश्वारी इतनी ज्यादा है कि उनको घर खर्च चलाने के लिए मनरेगा तक में काम करना पड़ रहा है। बता दें इन्ही अनुदेशकों को अभी विधानसभा सदन में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने पूर्णकालिक शिक्षक में शामिल किया लेकिन वेतन देते समय इन्हे अंशकालिक दर्जा दिया जाता है। आखिर नाइंसाफी क्यों? एक और बड़ी बात ...

उत्तर प्रदेश के जूनियर विद्यालयों में पढ़ाने वाले अनुदेशक सात हजार के अल्प मानदेय पर काम करने पर मजबूर हैं। दुश्वारी इतनी ज्यादा है कि उनको घर खर्च चलाने के लिए मनरेगा तक में काम करना पड़ रहा है।

बता दें इन्ही अनुदेशकों को अभी विधानसभा सदन में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने पूर्णकालिक शिक्षक में शामिल किया लेकिन वेतन देते समय इन्हे अंशकालिक दर्जा दिया जाता है। आखिर नाइंसाफी क्यों?

एक और बड़ी बात बता दें कि इन्हे जून के माह में वेतन नहीं मिलता है जबकि इन्हीं के समकक्ष अनुदेशक जो कस्तूरबा गांधी विधालय में पढ़ाते है उन्हे 11 माह 29 दिन का वेतन दिया जाता है।

सरकार इनका वेतन 2000 हजार रुपये दिसंबर के महीने में बढ़ा चुकी है वो वेतन अब तक रिलीज नहीं हुआ है ये भी समझ से परे है आखिर क्यों?

अब इनके परिवार का भरण पोषण कैसे होगा नहीं कहा जा सकता है लेकिन सरकार इन गरीब अनुदेशकों पर अत्याचार करने से बाज नहीं आती है।

कोर्ट में होगी 11 जुलाई को सुनवाई

पिछले मई महीने में कोर्ट मे सुनवाई के दौरान यूनियन ऑफ इंडिया के पक्षकार बिना पेपर लिए हुए कोर्ट मे हाजिर हुय जिस पर बेंच सख्त आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि यहाँ क्या संगम नहाने आए हो जबकि राज्य सरकार की और से एल पी मिश्रा पेश हुए थे। कोर्ट को बताया गया की कुछ देर में सचिव प्रस्तुत होंगे लेकिन वो आज प्रस्तुत नहीं हो पाए। इसके बाद बेंच ने 11 जुलाई को इसकी अगली डेट दे दी है।

बता दें कि पहले केंद्र और राज्य सरकार आपस में ही लड़ रही थी और तारीख लेने का कार्य कर रही थी। अब ये सरकारें फँसती देख अपास में मिल गई है ताकि अनुदेशक को उसका 17000 हजार देना न पड़े लेकिन उन्ही के द्वारा प्रस्तुत पेपर से सरकार को हर हाल मे लगता है कि अनुदेशक को भुगतान करना पड़ेगा। फिलहाल ग्रीष्मअवकाश के चलते जुलाई में तारीख लगी है। लेकिन मामला सरकार की गले की हड्डी बन चुका है।

देखिए अनुदेशक का दर्द

'दो जून' की रोटी के लिए मजबूर शिक्षक कर रहे हैं मजदूरी? | 2 June ki Roti

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Satyapal Singh Kaushik
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