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क्या पूंछ पायेंगे मैडम की नियुक्ति कब, कहां ,कैसे हुई?

क्या पूंछ पायेंगे मैडम की नियुक्ति कब, कहां ,कैसे हुई?
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संजय कुमार सिंह

केंद्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद से यह दावा किया जा रहा है कि देश में भ्रष्टाचार खत्म हो गया है। राज्यों में भाजपा की सरकार को डबल इंजन वाली सरकार कहा जाता है। यानी यहां भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है। भ्रष्टाचार खत्म कर दिया जाए पर भुगतान ही नहीं हों या खरीद ही नहीं हो तो बात नहीं बनेगी। सामान्य काम होते हुए पता लग जाता है कि भ्रष्टाचारकी क्या स्थिति है। मेरा मानना है कि बताने की जरूरत तब पड़ती है जब चीजें खुद स्पष्ट नहीं होती हैं। आजकल ईमानदारी का दावा तो किया ही जाता है अखबारों और खबरों पर जो नियंत्रण है उससे सरकार के खिलाफ खबरें ढूंढ़नी पड़ती है। जबरदस्त हेडलाइन मैनेजमेंट चल रहा है।

क्या है मामला

उत्तर प्रदेश में 25 स्कूलों में फर्जी तरीके से नौकरी करने के मामले में सुर्खियों में आई शिक्षिका अनामिका शुक्ला को कासगंज पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया है। अनामिका शुक्ला जिले के कस्तूरबा विद्यालय फरीदपुर में विज्ञान की शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे रही थी। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर जिले में अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिका की तलाश की गई तो कस्तूरबा विद्यालय में यह शिक्षिका पाई गई। एक दिन पूर्व शुक्रवार को बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) ने शिक्षिका के वेतन आहरण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था।

यह नोटिस व्हाट्सएप पर भेजा गया था। शुक्रवार की शाम शिक्षिका ने इस नोटिस को देखा तो शनिवार सुबह को वो अपना इस्तीफा देने बीएसए दफ्तर के बाहर पहुंची। अपने साथ आए एक युवक के माध्यम से उसने इस्तीफे की प्रति बीएसए को भेजी।

बीएसए ने शिक्षिका के खिलाफ दी तहरीर

जब युवक से शिक्षिका के बारे में पूछताछ की तो उसने बताया कि अनामिका शुक्ला बाहर सड़क पर खड़ी हैं। इस पर बीएसए अंजली अग्रवाल ने सोरों पुलिस को मामले की जानकारी दी और कार्यालय के स्टाफ के माध्यम से घेराबंदी कर ली। पुलिस ने तुरंत आकर शिक्षिका को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस शिक्षिका को सोरों कोतवाली ले आई। कोतवाली प्रभारी रिपुदमन सिंह ने बताया कि शिक्षिका अनामिका शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है। बीएसए ने शिक्षिका के खिलाफ तहरीर दी है।

आपको बता दें कि अनामिका को बीते 13 महीने में 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में करीब कुल एक करोड़ रुपये के मानदेय का भुगतान किया गया है। सभी 25 केजीबीवी से मानदेय एक ही बैंक खाते में गया या अलग-अलग खातों में भुगतान किया गया, इसकी जांच की जा रही है।

मिली खबर के मुताबिक एक महिला दो जगह नहीं 25 जगह नौकरी कर सकती है। और इसका पता एक दो नहीं तेरह महीने बाद लगता है। कहने की जरूरत नहीं है कि इसे दो तरह से लिखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में 13 महीने तक भ्रष्टाचार चलता रहा और यह भी कि 13 महीने ही चल पाया भ्रष्टाचार। ईमानदारी का ऐसा राज कि भ्रष्टाचारी 13 महीने से ज्यादा दाल नहीं गला पाए आदि। हिन्दी अखबारों के रिपोर्टर ज्यादातर अंशकालिक होते हैं और पूर्णकालिक रिपोर्टर अब संपादक की तरह विलुप्त होते जा रहे हैं। ऐसे जोखिम भरे माहौल में अंशकालिक पत्रकार वही बताता है जो उससे कहा जाता है। इतने में अगर न्यूनतम वेतन से कम का अपना वेतन सुरक्षित हो तो हाथ पैर कोई क्यों मारे? वैसे भी, जब एन राम , प्रणय राय और विनोद दुआ को पत्रकारिता सिखाई जा रही हो तो आम रिपोर्टर की क्या औकात। लेकिन उसे कोई देख भी नहीं रहा है।

इसलिए, आजकल की आदर्श पत्रकारिता यही है।

कायदे से इस खबर में बताया जाना चाहिए था कि मैडम की नियुक्ति कब, कहां ,कैसे हुई। एक साथ सब जगह हुई या धीरे-धीरे स्कूल जुड़ते गए। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें अधिकारी-मंत्री सब शामिल हो सकते हैं। इसीलिए 13 महीने पता नहीं चला। पर पूरी खबर एक महिला पर केंद्रित करके छोड़ दी गई है। 25 स्कूलों में नौकरी और 13 महीने की तनख्वाह एक करोड़ रुपए - क्या सब उसके होंगे। क्या सारा खेल 13 महीने में पकड़ लिया गया? बहुत सारी बातें हैं जो आपको मालूम ही नहीं होंगी। हमलोग खबर लिखते थे तो पहले पैरे से पता चल जाता था कि आगे इसमें क्या जानकारी होगी। आजकल आप खबर पढ़िए और ढूंढ़िए कि आप जो जानना चाहते हैं वह कैसे पता चलेगा? क्या आपको उम्मीद है कि इस खबर का विस्तार पता चलेगा? देखते रहिए।

Shiv Kumar Mishra
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