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फिल्मी कहानी की स्क्रिप्ट की तरह है ये प्रेम कहानी, 81 दिन बाद मिली जमानत, फिर 17 जुलाई को रात....

फिल्मी कहानी की स्क्रिप्ट की तरह है ये प्रेम कहानी, 81 दिन बाद मिली जमानत, फिर 17 जुलाई को रात....
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कहा जाता है कि प्यार अंधा होता है जब कोई लड़का और लड़की किसी से प्यार करने लगते है तो वो अपने प्यार में इतने अंधे हो जाते है कि उनको अपने प्यार के सिवाय कुछ नही दिखता है यहां तक की समाज, नाते-रिश्तेदारी क्या होता है उनको किसी भी तरह का इसका परवाह नही होता है ऐसे में एक मामला सामने आया जहांबचपन की दोस्त से प्यार हुआ और प्यार इतना परवान चढ़ा की दोनों ने घर वालों के मर्जी के खिलाफ मंदिर में जाकर शादी कर ली।

शादी तो हो गई लेकिन इसी बीच ये मामला लड़की के बालिग न होने पर घर वालों की शिकायत पर 20 साल को जेल जान पड़ा, बावजूद इसके दोनों का प्रेम फीका नहीं पड़ा। युवक को 81 दिनों बाद जब उसको जमानत मिली। जेल से छूटने के बाद युवक ने लड़की के बालिग होने का इंतजार किया और उसके बालिग होते ही उसके घर पहुंच गया।

विरोध और हंगामे के बीच वहां पहुंची माल थाने की पुलिस और आशा ज्योति केंद्र की टीम दोनों को लेकर थाने पहुंची। प्रेमी युगल की इच्छा के अनुसार, आखिरकार दोनों की शादी का निर्णय लिया गया। किसी फिल्म की कहानी की स्क्रिप्ट की तरह इस प्रेम कहानी का सुखद अंत सोमवार को हो जाएगा जहां दोनों की कोर्ट में शादी कराई जाएगी।

बतादें कि माल थानाक्षेत्र के भगवंतखेड़ा गांव निवासी सुमित यादव की अपनी पड़ोसी रितिका से बचपन से ही दोस्ती थी। सुमित आठवीं पास है तो रितिका 9वीं। दोनों के बीच प्यार कब हो गया, इसके बारे में कोई नहीं बता पा रहा। कई साल बाद इसकी जानकारी रितिका के परिजनों को हुई तो वह रिश्ते के खिलाफ हो गए। परिजनों का विरोध देखकर दोनों गत 19 अप्रैल को घर से निकल गए। दोनों ने अलीगंज के आर्य समाज मंदिर में आधारकार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर युवती को बालिग बताया। आधारकार्ड दिखाने के बाद आर्य समाज मंदिर के प्रमुख पुजारी ने दोनों की शादी करवा दी और इसका प्रमाण पत्र भी दे दिया।

आर्य समाज मंदिर में शादी की जानकारी होने पर रितिका के परिजनों ने आपत्ति की। इस संबंध में माल थाने में मुकदमा दर्ज कराया। जहां अस्पताल द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की। इसके आधार पर रितिका नाबालिग थी। पुलिस ने सुमित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। 24 अप्रैल से उसे 81 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। तीन दिन पहले उसे कोर्ट ने जमानत दे दी।

सुमित के मुताबिक, अस्पताल से जारी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर 17 जुलाई को रितिका 18 साल की होने वाली थी। इसका वह इंतजार करता रहा। सुमित के मुताबिक, उसे शुक्रवार रात नींद ही नहीं आई। सुबह होते ही वह रितिका के घर पहुंच गया। उसने रितिका को अपने साथ ले जाने की जिद की। इस पर दोनों परिजनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। हालात मारपीट तक पहुंच गए। इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर माल एसओ राम सिंह अपनी टीम के साथ पहुंचे। वहीं इसकी जानकारी होने पर आशा ज्योति केंद्र की प्रशासनिक अधिकारी अर्चना सिंह भी टीम के साथ पहुंच गईं।

काफी देर तक वहां बातचीत होती रही। वन स्टाप सेंटर (आशा ज्योति केंद्र) की प्रशासनिक अधिकारी अर्चना सिंह के मुताबिक, थाने में कागजी कार्रवाई के बाद दोनों को आशा ज्योति केंद्र लाया गया। उनकी शादी को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है। सोमवार को दोनों को कोर्ट में लेकर जाएंगे जहां रजिस्ट्रार के सामने उनकी शादी कराकर पंजीकरण करवाया जाएगा।



सुजीत गुप्ता
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