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मायावती ने सर्वे पर उठाया सवाल, कोरोना, महंगाई और कानून व्यवस्था में फेल बीजेपी का क्यों बढ़ा वोट प्रतिशत?

मायावती ने सर्वे पर उठाया सवाल, कोरोना, महंगाई और कानून व्यवस्था में फेल बीजेपी का क्यों बढ़ा वोट प्रतिशत?
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. लखनऊ, 4 सितम्बर 2021, शनिवार: बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि जैसा कि यह विदित है कि कोरोना प्रकोप व अर्थव्यवस्था की सन् 1991 जैसी ज़बरदस्त हुई बदहाली आदि के कारण पूरे देश में व्याप्त अति-महंगाई, ग़रीबी व बेरोज़गारी की मार आदि ने काफी लम्बे समय से यहाँ के लोगों का जीवन त्रस्त करके रख दिया है और जिससे अब भाजपा के प्रति व्यापक जन आक्रोश व्याप्त है तथा इनका रेटिंग ग्राफ भी काफी गिरा है, तो ऐसे समय में कल मीडिया के एक हिन्दी न्यूज़ चैनल द्वारा यूपी में इस बार विधानसभा का आमचुनाव होने पर भाजपा का वोट प्रतिशत पिछली बार के 40 से भी अधिक दिखाने का इनका प्री-पोल सर्वे प्रायोजित ही नहीं बल्कि लोगों को यह हवा-हवाई, शरारतपूर्ण व भ्रमित करने वाला ही ज्यादा लगता है तो इस बारे में यह कहना अनुचित नहीं होगा।

मायावती ने कहा कि और इस सन्दर्भ में सी-वोटर्स के इस चुनाव के सर्वे पर हमारी पार्टी का यह मानना है कि इनका यह सर्वे वैसे ही गले के नीचे से नहीं उतर पा रहा है जिस प्रकार से यहाँ सन् 2007 के हुये विधानसभा आमचुनाव में बी.एस.पी. के पक्ष में जबरदस्त माहौल (हवा) होने के बावजूद भी उस समय हर प्री-पोल सर्वे पक्षपाती तौर पर बी.एस.पी. की सरकार बनाने की बात कबूल कर लेने के बजाय केवल हमारी पार्टी को सिंगिल लार्जेस्ट पार्टी बनकर उभरने की ही बात कर रहा था, जबकि उस चुनाव में रिजल्ट आने पर बी.एस.पी. की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। इसलिए वर्तमान के इस प्री-पोल सर्वे को भी पूर्णतया हवा-हवाई, शरारतपूर्ण व भ्रामक करने वाला ही कहा जाये तो यह कतई भी अनुचित अर्थात् गलत नहीं होगा।

मायावती ने कहा कि साथ ही, इससे इनका ख़ास मकसद भाजपा को मज़बूत दिखाते रहने से ज्यादा बी.एस.पी. के लोगों का मनोबल गिराना ही लगता है जबकि इनको यह मालूम होना चाहिये कि बी.एस.पी. के लोग पहले से ही इस प्रकार के षड़यत्रों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और इस सर्वे के भी बहकावे में वे कतई भी आने वाले नहीं है, बल्कि इस सर्वे की चुनौती को स्वीकार करते हुए अब वे और भी ज्यादा ज़िद्, जोश, हिम्मत व मेहनत से काम करेंगे। मुझे अपने लोगों के ऊपर ऐसा पूरा-पूरा भरोसा है।

इसके साथ ही उन्हें यह भी मालूम है कि जैसे-जैसे खासकर यू.पी. विधानसभा का आमचुनाव नजदीक आता जाएगा तो वैसे-वैसे बी.एस.पी. विरोधी तत्वों का षडयंत्र और भी अधिक संकीर्ण, ओछा, विषैला व शरारतपूर्ण न्यूज वाला होता जाएगा, जैसा कि हर चुनाव के पहले भी यहाँ अक्सर देखने को मिलता है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, यहाँ मैं इनको यह भी कहना चाहती हूँ कि प्रदेश में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज भी भाजपा के द्वेषपूर्ण व पक्षपाती रवैये से दुःखी होकर अब अपने सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय के लिए यहाँ बी.एस.पी. के साथ काफी तेजी से जुड़ रहा है। उससे भाजपा की ही नहीं बल्कि सपा व कांग्रेस सहित अन्य और बहुतों की बौखलाहट स्पष्ट तौर पर बढ़ी है।

और यही मुख्य कारण है कि जबसे बी.एस.पी. के तत्वावधान में प्रबुद्ध वर्ग के सम्मेलन जो पूरे उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं, उसका पहला दौर आज खत्म हो जाएगा लेकिन इसका औपचारिक समापन लखनऊ में दिनांक 7 सितम्बर को होगा, और फिर उसके बाद प्रबुद्ध समाज को तैयार करने के लिए दूसरे चरण का यह कार्यक्रम शुरू होगा। किन्तु इस कार्यक्रम के लगातार सफल होने से सभी विरोधी लोग दुःखी हैं और इतना ही नहीं बल्कि बी.एस.पी. की नकल करके बीजेपी खुद अपना प्रबुद्ध सम्मेलन करने जा रही है। तो जो पार्टी बी.एस.पी. की नकल कर रही हो, अन्य पार्टियाँ भी बी.एस.पी. की नकल कर रही हों उन्हें प्री-पोल सर्वे में बी.एस.पी. से आगे दिखाया जाए और बी.एस.पी को कहीं भी न दिखाया जाये। अर्थात् काफी पीछे दिखाया जाए तो यह इनका शरारतपूर्ण सर्वें नहीे तो ओर क्या लगता है?

मायावती ने कहा कि इसके साथ ही कल जब मैं इस प्रोग्राम को देख रही थी तो इस सर्वे का विश्लेषण करने वाले जो वहाँ लोग थे तो उनका चेहरा मैं देख रही थी या हर पार्टी के जो प्रवक्ता आदि बैठे थे मैं उन्हें भी वाच कर रही थी कि उनके चेहरे से स्पष्ट हो रहा था कि सी-वोटर्स का यह सर्वें निष्कर्ष उनके गले के नीचे भी नहीं उतर पा रहा था। और जब एक विश्लेषणकर्ता ने जब कुछ सही बोलना चाहा तो उसे नहीं बोलने दिया गया तथा उसे रोक दिया गया। कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि उनकी हालत काफी खराब है और इसीलिए ये लोग सर्वे वालों को भी मैनेज करके अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए इस किस्म का षडयंत्र रच रहे हैं तथा इनका असली मकसद बीजेपी के प़क्ष में हवा बनाने से ज्यादा बी.एस.पी. का जो सर्वसमाज में तेजी से जनाधार बढ़ रहा है उसको रोकना व बी.एस.पी. के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना इनका यह ज्यादा प्रयास लगता है। लेकिन इन्हें शायद मालूम नहीं है कि बी.एस.पी. के लोगों को इस किस्म के सर्वे पर कभी कोई भरोसा नहीं रहा है और ना ही इस प्रकार के सर्वे पर आगे भरोसा करने वाले हैं। उनको पार्टी की तरफ से काफी ट्रेण्ड/शिक्षित हमलोग कर चुके हैं।

मायावती ने कहा कि और इतना ही नहीं यदि ये सभी विरोधी पार्टियाँ सन् 2012 के हुये विधानसभा आमचुनाव की तरह बी.एस.पी. को फिर से नुकसान पहँुचाने के लिए पार्टी के खिलाफ अन्दर-अन्दर एक हो जाएं तो यह भी कोई नई बात नहीं होगी। सन् 2012 में जब यह लगा कि बी.एस.पी. दोबारा यहाँ सत्ता में आ रही है तो सभी विरोधी पार्टियाँ चाहे भाजपा हो, सपा हो या फिर कांग्रेस सभी अलग-अलग होते हुए भी भीतर से एक होकर बी.एस.पी. को हर कीमत पर हराने के षडयंत्र में लग गये, यह भी जनता अच्छी प्रकार से जानती है। और अब फिर जब इनको लगेगा कि बी.एस.पी. यहाँ आगामी विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आ रही है तो फिरसे ये लोग उसी प्रकार का षडयंत्र कर सकते हैं तो इसमें भी कोई संदेह नहीं है। इसीलिए पार्टी के लोगों से यही कहना है कि वे पहले से ही सतर्क व सजग रहें। और अब इन्हें ऐसी सभी परिस्थितियों का भी डटकर सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहना है। इस खास अनुरोध के साथ ही अब मैं अपनी बात यहीं समाप्त करती हूँ। धन्यवाद।

Shiv Kumar Mishra
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