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मेरठ की इन जर्जर सडक पर जरा संभल कर निकलिएगा साहब,क्योकि बहुत गड्डे है..

मेरठ की इन जर्जर सडक पर जरा संभल कर निकलिएगा साहब,क्योकि बहुत गड्डे है..
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शहर की माल रोड कौन नहीं जानता, कभी इस माल रोड की सुंदरता और उसकी गुणवत्ता की मिसाल दी जाती थी। लोग सुबह की सैर करने के लिए माल रोड के फुटपाथ पर ही घूमते थे, लेकिन वर्तमान में माल रोड की हालत इतनी खराब हो गई है कि फुटपाथ उखड़ गया है। माल रोड के लेवल में फुटपाथ आ गया है, लेकिन इसके लिए जवाबदेह कैंट बोर्ड के अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं।

आखिर इस चुप्पी के मायने क्या है? जिस माल रोड का उदाहरण दिया जाता था, उस माल रोड की इतनी दयनीय स्थिति आ गई है कि वहां फुटपाथ पर पैदल घूमना भी मुश्किल भरा है। इसके लिए इस दशा में फुटपाथ और माल रोड को पहुंचाने के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है ? उन जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी? वर्तमान में जो इसका रखरखाव भी नहीं करा पा रहे हैं। यही नहीं, माल रोड के फुटपाथ को क्षति पहुंचाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

माल रोड का जो लेवल है, उसके लेवल से फुटपाथ का लेवल आमतौर पर ऊंचा होता हैं। उसको किसने क्षति पहुंचाई? क्या इस दिशा में कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने काम किया है? अब तो हालात इतने खराब हो गए हैं कि फुटपाथ पर सरेआम पशु घूमते रहते हैं। कभी पशुओं के खिलाफ भी कैंट बोर्ड अभियान चलाता था। पशुओं को जब्त किया जाता था। पशु पालकों पर जुर्माना लगाया जाता था। पशुओं को पकड़ने के लिए बाकायदा एक टीम गठित की गई थी, लेकिन वर्तमान में ऐसा कुछ भी नहीं है। बेहिसाब पशु माल रोड पर टहलते रहते हैं। इनको नहीं तो अब जब्त किया जाता है और नहीं पशु पालकों के खिलाफ कोई जुर्माना लगाया जाता है। सड़कों के वर्तमान हालात भी खराब है। इन सड़कों की मरम्मत के लिए भी कैंट बोर्ड के पास खजाना खाली है।

ऐसी दशा कैंट बोर्ड की कभी नहीं हुई, जैसी वर्तमान में चल रही है। आखिर क्या बदलेगी माल रोड की सूरत? इसी तरफ सबकी निगाहे लगी हैं? अब तो कहा जा रहा है कि कैंट बोर्ड को एनसीआरटीसी 600 करोड़ रुपए देने जा रहा है। उस धनराशि से माल रोड समेत कैंट की सड़कों की दशा और दिशा दोनों बदल जाएगी। ऐसा दावा किया जा रहा हैं, लेकिन ऐसा कब होगा? यह देखना बाकी हैं। फिलहाल तो माल रोड पर पशुओं का जमावड़ा रहता हैं। पशुओं की रोकथाम तो कम से कम कैंट बोर्ड के अधिकारी अभियान चलाकर कार्य कर सकते हैं, लेकिन यहां तो यह कार्य भी नहीं हो रहा हैं। जब एक टीम कर्मचारियों की पशुओं की रोकथाम करने के लिए बनाई गयी है तो फिर वह टीम रहती कहां पर हैं?

इतनी सुंदर सड़क पर पशुओं का घूमना, कई सवाल खड़े कर रहा हैं। जब पशु पालकों पर जुर्माना लगाने का अधिकार है तो फिर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जा रहा हैं? जैसे ही जुर्माना लगने लगा तो पशु पालक भी अलर्ट हो जाएंगे। इसके बाद शायद ही पशु माल रोड पर छूट्टे घूमते हुए देखे जाएं।

Desk Editor
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