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डीएम के फर्जी हस्ताक्षर बनाने वाला एडीएम प्रशासन को गुमराह कर लाया आदेश!

पुलिस सहायता दिन के उजाले में प्राप्त कर रात के अंधेरे में जेसीबी से मकान को किया नष्ट

डीएम के फर्जी हस्ताक्षर बनाने वाला एडीएम प्रशासन को गुमराह कर लाया आदेश!
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पुलिस सहायता दिन के उजाले में प्राप्त कर रात के अंधेरे में जेसीबी से मकान को किया नष्ट।

मैं सोचता था कल दिन जरूर निकलेगा ।

मगर ये रात तो फिर रात लेकर लौट आई ।

ये शेर की पंक्तियां रायबरेली की एक शख्सियत पर सटीक बैठती है जिसके ऊपर डी•एम•के फर्जी हस्ताक्षर से तैयार किए गए दस्तावेज का आरोप लगा हुआ है । एक बार फिर इस शख्सियत ने ए•डी•एम• प्रशासन को गुमराह करते हुए एक आदेश प्राप्त करके दूसरे का एक कमरे का मकान ध्वस्त कर दिया है । मामला रायबरेली के स्वराज नगर कॉलोनी क्षेत्र का है जहां पर सदर तहसील के राजस्व ग्राम कस्बा गिर्द नेवाह व अख्तियारपुर की सीमा पर स्थित एक भूमि के टुकड़े पर निर्मित एक सवा सौ स्क्वायर फीट का कमरा निर्मित था जिसको अपना बताते हुए ए•डी•एम• प्रशासन को एक प्रार्थना पत्र देकर पुलिस की सहायता मांगी गई यह सहायता दिन के उजाले में प्राप्त करके रात के अंधेरे में लगभग 2:00 बजे रात में उस मकान को जेसीबी से नष्ट कर दिया गया है

यह मकान तकदीरउन नामक महिला का बताया जा रहा है उसने अपने साथ हुई इस घटना की शिकायत पुलिस अधीक्षक को देते हुए हसनैन पुत्र हफिज कुरेशी कहारों के अड्डे पर डकैती व संपत्ति को नष्ट करने का मुकदमा दर्ज किए जाने की गुहार लगाई है । यह मामला पुलिस के पाले में तो जरूर गया है और आईने के तरीके उतना ही साफ है कि इसमें सीधे-सीधे हसनैन कुरैशी के द्वारा धोखाधड़ी व अपने धनबल का प्रयोग करके चांद में दाग की तरह खटक रहे इस कमरे को जमींदोज कर दिया है ।दरअसल यह पूरा मामला इस तरह है कि इसी गाटा संख्या पर हसनैन कुरैशी के द्वारा अपना भव्य भवन का निर्माण करके निवास किया जा रहा है ।करोड़ों की लागत से तैयार भवन के सामने यह कमरा चांद में दाग की तरह आंखों में खटक रहा था ।

जिसे हसनैन ने अपने फ्रॉड के पिटारे से एक मंत्र का इस्तेमाल करके ध्वस्त कर दिया है । डकैती से संबंधित दी गई शिकायत पर अभी तक पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत नहीं किया है जबकि आसपास गोपनीय रूप से पुलिस अगर तहकीकात भी कर ले तो स्पष्ट हो जाएगा कि उस कमरे का स्वामी कौन था यह सिद्ध होते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि ए•डी•एम• प्रशासन को गुमराह किया गया और उनसे शांति व्यवस्था के नाम पर पुलिस की मदद मांगी गई वह सरासर गलत थी । एक बार फिर धोखाधड़ी के चार्ज इस तथाकथित शख्सियत पर फ्रेम हो गए हैं बस जरूरत है रायबरेली पुलिस अधीक्षक को इस पूरे प्रकरण पर ईमानदारी से जांच कराने की।

एडीएम प्रशासन को दिए गए प्रार्थना पत्र के साथ जो बैनामा की छाया प्रति दी गई है वह बैनामा प्रार्थना पत्र देने वाले की उम्र से कई गुना ज्यादा पुराना है । लेकिन उस प्रार्थना पत्र में दर्शाया गया कि वह उसका बनवाया हुआ कमरा है जबकि यह सबसे बड़ा गुमराह करने वाला दावा है जबकि उस कमरे का पूरी तरह से इस्तेमाल तकदीरउन नामक महिला कर रही थी और उस कमरे में तकदीरउन का तमाम सामान मशीनरी आदि रखा हुआ था । उस कमरे का इस्तेमाल तकदीरउन नामक महिला कर रही थी इसकी तमाम गवाही आसपास के लोग स्वयं देने को तैयार हैं और उसके अंदर जो भी सामान है वह तकदीरउन का है बावजूद इसके हसनैन कुरैशी ने रात के 2:00 बजे कमरे कों ध्वस्त कर दिया ।

दरअसल जिस जमीन पर कमरा निर्मित था उस जमीन को यह अपना बताने की कोशिश कर रहा था इस मामले की पूर्व में एक जांच हुई थी जिसमें फर्जी पाया गया था और क्षेत्रीय लेखपाल के द्वारा एक मुकदमा धोखाधड़ी का इसके ऊपर पंजीकृत हुआ जिसमें इस को जेल जाना पड़ा लंबे समय तक जेल में रहा उसके बाद लंबे समय तक खामोशी अख्तियार किए हुए था, यह व्यक्ति द्वारा एकबार फिर से धोखाधड़ी की चालों को चलना प्रारंभ कर दिया है पहला शिकार शासन को ही बना डाला यह बड़ी दिलेरी का काम है जिसके द्वारा किया गया है अब इसकी जांच उच्च स्तरीय कराई जाय तो एक बार फिर बड़ा भंडाफोड़ हो सकता है।

रिपोर्ट - काजू खान

Arun Mishra

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Sub-Editor of Special Coverage News
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