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प्रदेश के गन्ना किसानों की दुर्दशा के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जिम्मेदार - भगत सिंह वर्मा

प्रदेश के गन्ना किसानों की दुर्दशा के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जिम्मेदार - भगत सिंह वर्मा
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देवबंद - आज यहां ग्राम नन्हेड़ा आशा में गन्ना किसानों की बैठक को संबोधित करते हुए पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना एक मुख्य फसल व नकदी फसल है। लेकिन गन्ने का सीधा लाभ प्रदेश सरकार व चीनी मिलों को हो रहा है। प्रदेश सरकार गन्ने से प्रतिवर्ष एक्साइज ड्यूटी के रूप में 32000 करोड रुपए राजस्व प्राप्त कर रही है और चीनी मिलें हजारों करोड रुपए लाभ कमा रही हैं इसके बावजूद भी प्रदेश के गन्ना किसानों को गन्ने का लाभकारी रेट ₹600 कुंटल तो दुर लागत मूल्य ₹440 कुंटल भी प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को नहीं दिला पा रही है जिसके कारण प्रदेश के गन्ना किसानों पर भारी कर्ज हो गया है जिसके लिए प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार सीधे जिम्मेदार है।

भगत सिंह वर्मा ने कहा कि गन्ने से चीनी के साथ साथ चीनी मिलें शीरा बगास खोई और बिजली बनाकर बेच रही हैं और प्रति वर्ष करोड़ों रुपए लाभ कमा रही हैं। चीनी मिलें गन्ना किसानों से गन्ना उधार लेकर गन्ने का भुगतान वर्षों में कर रही हैं। इस सब में चीनी मिल मालिकों से सरकारों की मिलीभगत है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि अभी भी उत्तर प्रदेश की 120 चीनी मिलों पर पिछले वर्ष का 7000 करोड रुपए गन्ना भुगतान व 10000 करोड रुपए ब्याज बकाया है। गन्ना किसान गन्ना भुगतान व ब्याज नहीं मिलने के कारण एक एक रुपए को मोहताज हैं और भारी आर्थिक संकट से घिरे हुए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को ही नहीं देश के गन्ना किसानों को आसानी से नकद गन्ने का लाभकारी रेट ₹600 कुंटल दिला सकते हैं हमारे पास फार्मूला है उसके तहत प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार देश के सभी गन्ना किसानों को आसानी से गन्ने का लाभकारी रेट ₹600 कुंटल दिला सकती हैं।

भगत सिंह वर्मा ने कहा कि चीनी मिलों में बनने वाला शीरा बहुत महत्वपूर्ण है शीरे से अल्कोहल बनता है अल्कोहल से देसी शराब अंग्रेजी शराब व हजारों उत्पाद तैयार होते हैं। जिस पर सरकारें हजारों करोड रुपए टैक्स वसूलती है। इसके बावजूद भी सरकारें लगातार गन्ना किसानों का शोषण कर रही है व करा रही हैं। शीरे से बनने वाले अल्कोहल से इथेनॉल बनता है जो पेट्रोलियम कंपनियों को जाता है जिसका रेट ₹43 व 75 पैसे है। केंद्र सरकार जितना इथेनॉल पेट्रोल कंपनियों को जाता है उतना ही डीजल गन्ना किसानों को 43 रुपए 75 पैसे में डीजल उपलब्ध कराएं जिससे गन्ने की लागत कम हो सके। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि पिछले 4 वर्ष से उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया है। गन्ना किसान पर लगातार कर्ज बढ़ता जा रहा है। खाद कीटनाशक दवाई डीजल कृषि यंत्र अन्य वस्तुएं महंगी होने के कारण गन्ने की लागत लगातार बढ़ती जा रही है यदि उत्तर प्रदेश सरकार चाहे तो अपने राजस्व में से प्रतिवर्ष ₹50 कुंटल गन्ना किसानों को सीधे भुगतान कर सकती है लेकिन भाजपा की प्रदेश और केंद्र सरकार गन्ना किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है उन्हें गन्ना किसानों की बजाए चीनी मिल मालिकों की अधिक चिंता है।

भगत सिंह वर्मा ने कहा कि भारत सरकार के नियम के अनुसार व माननीय हाईकोर्ट व माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी चीनी मिलें गन्ना किसानों को ब्याज का भुगतान नहीं कर रही हैं जो गन्ना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि गन्ना किसानों के साथ अन्याय को अब गन्ना किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे और गन्ने का लाभकारी रेट ₹600 कुंटल कराने चीनी मिलों से तत्काल गन्ना भुगतान में ब्याज लेने के लिए गन्ना किसान सड़कों पर आकर बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में जुट गए हैं और इसका असर भाजपा की सरकार पर सीधे-सीधे 2022 के चुनाव में भी पड़ेगा जब किसान भाजपा को वोट नहीं देंगे। आज की बैठक की अध्यक्षता चौधरी हरपाल सिंह ने की व संचालन रविंद्र प्रधान ने किया। बैठक में डॉ रमेश चंद्र नरेश कुमार बॉबी सिंह राजकरण चौधरी सहदेव सिंह मास्टर ईशमपाल सिंह भोपाल सिंह कृष्णपाल नेता शिवओम शर्मा कुलदीप शर्मा सुधीर चौधरी सहदेव सिंह राजकुमार महीपाल सिंह ने भाग लिया।

Shiv Kumar Mishra
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