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युवा आईपीएस सुकीर्ति माधव मिश्रा शामली के नए पुलिस अधीक्षक बने, जानिए उनके बारे में पूरी बात

युवा आईपीएस सुकीर्ति माधव मिश्रा शामली के नए पुलिस अधीक्षक बने, जानिए उनके बारे में पूरी बात
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यूपी के इलाहाबाद में 1 जनवरी 2018 को सीओ सिटी थर्ड के रूप में आईपीएस अफसर सुकीर्ति माधव मिश्रा की पहली पोस्टिंग हुई।

दीपक शर्माशामली: सुकीर्ति माधव मिश्रा जनपद शामली के नए पुलिस अधीक्षक होंगे, वे नित्यानंद राय का स्थान लेगे। विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान पूरा होते ही मंगलवार शाम प्रदेश शासन ने 19 आईपीएस अफसरों के तबादले कर दिए। सुकीर्ति माधव मिश्रा को जनपद शामली का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी सुकीर्ति माधव वर्तमान में वाराणसी के अपर पुलिस अधीक्षक सुरक्षा के पद पर तैनात थे। वे नित्य...

दीपक शर्मा

शामली: सुकीर्ति माधव मिश्रा जनपद शामली के नए पुलिस अधीक्षक होंगे, वे नित्यानंद राय का स्थान लेगे। विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान पूरा होते ही मंगलवार शाम प्रदेश शासन ने 19 आईपीएस अफसरों के तबादले कर दिए। सुकीर्ति माधव मिश्रा को जनपद शामली का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी सुकीर्ति माधव वर्तमान में वाराणसी के अपर पुलिस अधीक्षक सुरक्षा के पद पर तैनात थे। वे नित्यानंद राय का स्थान लेंगे जो केवल दो महीने इस पद पर रहे।

खाकी पर लिखी कविता हुई थी वायरल

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और देशव्यापी लॉकडाउन की दोहरी मार सबसे ज्यादा पुलिसकर्मियों पर पड़ी है। पुलिसकर्मियों को एक ओर खुद को, अपने परिवार और समाज को भी इस बीमारी से सुरक्षित रहना है तो दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संभालनी है। इन चुनौतियों के बीच सुकीर्ति माधव की लिखी कविता 'मैं खाकी हूं...' खूब वायरल हुई थी। ट्रेनिंग के दिनों में लिखी उनकी इस कविता को नासिक के पुलिस कमिश्नर और तेज-तर्रार आईपीएस अफसर विश्वास नांगरे पाटिल ने गाया है। उनकी गाई और सुकीर्ति की लिखी यह कविता देखते ही देखते खूब वायरल होने लगी। बुधवार को यूपी पुलिस ने भी उनकी इस कविता को ट्वीट किया। उस वक्त सुकीर्ति माधव वाराणसी में एसपी (सुरक्षा) के पद पर तैनात थे।

2015 बैच के हैं आईपीएस अफसर

यूपी के इलाहाबाद में 1 जनवरी 2018 को सीओ सिटी थर्ड के रूप में आईपीएस अफसर सुकीर्ति माधव मिश्रा की पहली पोस्टिंग हुई। सुकीर्ति ने लाखों का पैकेज छोड़कर मां-बाप के सपनों को साकार करने के लिए आईपीएस बनने की ठानी। अपने फर्स्ट अटेंप्ट में ही देश के सबसे बड़े एग्जाम को पास आउट कर लिया था, लेकिन 2014 में मिली सफलता में उन्हें आईआरएस मिला था। जबकि उन्हें आईपीएस बनना था, इसलिए 2015 में उन्होंने दोबारा एग्जाम दिया और सिलेक्ट हो गए।

पिता हैं टीचर और मां हैं हाउसवाइफ

मूल रूप से बिहार प्रांत के जमुई डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत मलयपुर गांव के रहने वाले सुकीर्ति माधव का निक नेम चंदन है। उनके पिता कृष्ण कांत मिश्रा जूनियर हाईस्कूल में टीचर हैं। उनकी मां कविता मिश्रा हाउस वाइफ हैं। उनसे बड़ी उनकी एक बहन है रिचा मिश्रा। जिनकी शादी हो चुकी है, उनके बहनोई विकास मिश्रा नौसेना में हैं।

सरकारी विद्यालय से की पढ़ाई, करने के बाद मिल गई थी नौकरी

सुकीर्ति माधव मिश्रा की प्रारंभिक पढ़ाई अपने गांव के प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में हुई है। ग्रेजुएशन उन्होंने भुवनेश्वर यूनिवर्सिटी से किया है। 2010 में उन्होंने एमएनआईटी दुर्गापुर से एमबीए की डिग्री हासिल की। उसी साल उन्हें कोल इंडिया में मैनेजर पद की नौकरी मिल गई और वो नौकरी करने चले गए।

रिजेक्ट होने पर परेशान हो गए थे सुकीर्ति माधव, 1 मार्च 1988 को जन्मे सुकीर्ति माधव के लिए सबसे कठिन पल वो था जब वो एमबीए कर रहे थे और कैंपस सिलेक्शन में आईडीबीआई बैंक के लोगों ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था। जिससे वह काफी फ्रेस्टेट हुए थे, लेकिन बाद में घरवालों ने और टीचर्स ने उन्हें समझाया। उसके बाद ही उन्हें कोल इंडिया में नौकरी मिल गई।

2010 में पिता-पुत्र को एक साथ मिली थी नौकरी, लालू यादव थे रीजन

सुकीर्ति माधव बताते हैं- ''वर्ष 2010 हमारे पूरे परिवार के लिए बहुत खुशियों वाला था क्योंकि इस वर्ष में मुझे और मेरे पिताजी को एक साथ नौकरी मिली। मेरे पिताजी की जो भर्ती थी, उस पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही 1987-88 में पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की पहल पर निरस्त कर दिया गया था। इससे हजारों शिक्षक बेरोजगार हो गए थे, उनका मुद्दा कोर्ट में लंबित था।

करीब 22 साल की लंबी लड़ाई के बाद 2010 में पिताजी को न्याय मिला और उन्हें दोबारा नियुक्ति मिली और पीछे का पूरा पेमेंट भी दिया गया। बड़ी बहन की हो चुकी है शादी, बहनोई है नौसेना में, इन 22 सालों में हमारे माता-पिता ने बहुत से अभाव देखे, लेकिन कभी हम भाई-बहन को उसका आभास नहीं होने दिया। खेती किसानी के बूते ही उन्होंने मेरी दीदी ऋचा मिश्रा को एमए और बीएड कराया, मुझे एमबीए कराया।'' जब 2010 में दोनों लोगों को साथ में नौकरी मिली तो उसके बाद सबसे पहला काम हम लोगों ने दीदी की शादी 2011 में की।

पिता ने कहा- आईपीएस बनो, छोड़ी 15 लाख पैकेज की जॉब

तब तक मेरे जेहन में सिविल सर्विसेज को लेकर कोई हरकत नहीं थी, मैं कोल इंडिया के मैनेजर पर से संतुष्ट था। क्योंकि वहां कंपनी अच्छी थी और पैसे भी बढ़िया मिल रहे थे। मुझे साल के 15 लाख रुपए मिलते थे। दीदी की शादी के बाद मम्मी-पापा ने एक दिन बुला कर कहा कि अगर चाहो तो सिविल सर्विसेस ट्राई कर सकते हो। आम आदमी से जुड़ने का मौका मिलेगा, उनकी सेवा करने का मौका मिलेगा। जो पैसे से कहीं ज्यादा अच्छा होगा।

2012 में शुरू की तैयारी सुबह नौकरी और रात में करते थे पढ़ाई

तब तक मेरी नौकरी के करीब दो साल हो चुके थे। पिता जी के कहने के बाद मैंने सिविल सर्विसेस के बारे में जानना शुरू किया और फिर नौकरी करते-करते ही तैयारी शुरू कर दी। कोल इंडिया में जहां मेरी पोस्टिंग थी, वहां भी दो-चार लड़के सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे उनका भी प्रभाव पड़ा। 2012 से मैंने तैयारी शुरू कर दी, जो काफी कठिन थी लेकिन लक्ष्य तय था इसलिए दिक्कत नहीं हुई। सुबह 9:00 बजे से शाम को 6:00 बजे तक ऑफिस का काम निपटाता था। पढ़ाई कभी घंटे में बांधकर तो नहीं की लेकिन 9-10 बजे से बजे से लेकर रात में 1:00 से 2:00 बजे तक जरूर पढ़ता था। 2 साल की कड़ी तैयारी के बाद वर्ष 2014 में मैंने सिविल सर्विसेज का पहला एग्जाम दिया। पहले ही अटेंप्ट में मेरा सिलेक्शन हो गया। लेकिन मुझे आईआरएस मिला जिसे मैंने छोड़ दिया उसके बाद दूसरे अटेंड में वर्ष 2015-16 में मुझे आईपीएस कैडर मिल गया।

शामली में कम नहीं होगी चुनौतियां..

शामली जनपद को सन् 2011 में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती द्वारा प्रबुद्धनगर के रूप में जिला घोषित किया गया था। जिसे बाद में जुलाई माह सन 2012 में पुनः शामली कर दिया गया।शामली जनपद में अबतक कई एसपी आ चुके है। लेकिन अभी भी जनपद में बहुत ही समस्याएं है जिनका आज तक कोई समाधान नहीं हो पाया।

जाम से कैसे मिलेगा निजात ?

शामली सिटी की सबसे बड़ी और ज्वलंत समस्या शहर में आए दिन लगने वाले जाम की है। जिसमें आए दिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां भी फसी देखी जा सकती है। इसलिए जाम से केवल शहर के नागरिक ही नहीं पुलिस प्रशासन भी परेशान है।लेकिन जैसे ही जनपद में कोई नया पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी आता है. तो सिटी के लोगो में जाम से निजात की आशा जगती है. लेकिन फिर वही ढर्रा शुर हो जाता है और लोग मन मसोसकर रह जाते है।अब नए कप्तान साहब शहर वासियों को जाम से किस हद तक निजात दिला पाते है. ये देखने वाली बात होगी.

जनपद में हरियाणा के बॉर्डर से होती है अवैध शराब की तस्करी

शामली जनपद में कैराना थाना क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाली यमुना चेक पोस्ट और झिंझाना थाना क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाली बिडोली यमुना चेक पोस्ट है। ये दोनों पुलिस चोकिया जनपद के हरियाणा राज्य से सटी हुई है और इन दोनों रास्तों से अक्सर अवैध शराब तस्कर पुलिस की आंखो में धूल झोंककर शराब तस्करी करते है। इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी भी बड़े पैमाने पर की जाती है। बहुत सी बार पुलिस द्वारा इन्हीं चौकियों पर शराब के बड़े जखीरे भी पकड़े जा चुके है। लेकिन जनपद में हरियाणा से अवैध शराब तस्करी करने वालो का अच्छा खासा नेटवर्क है। जिसे खत्म करने के लिए एसपी को खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

थानों में लगने वाले दलालों के जमावड़े को करना होगा साफ

जनपद के लगभग सभी थानों में अक्सर दलालों का जमावड़ा लगा रहता है। जो अक्सर पीड़ितो से कार्यवाही के नाम पर रुपए ऐठ लेते है। जिससे पुलिस की छवि भी धूमिल होती हैं।एसपी को ऐसे दलालों पर कार्यवाही करनी होगी। जिससे थानों में आने वाले पीड़ितो को इनसे छुटकारा मिल सके और पुलिस की छवि भी धूमिल होने से बच जाए।

पेट्रोल पंपों पर रखनी होगी विशेष सुरक्षा

पिछले कुछ महीनों में जनपद में दिन दहाड़े पेट्रोल पंपों पर बाइक सवारों द्वारा की गई लाखो की लूटपाट से पेट्रोल पंप मालिको में दहशत का माहौल व्याप्त है। जिसे लेकर एसपी को जनपद के पेट्रोल पंपों पर विशेष नजर रखनी होगी जिससे पेट्रोल पम्प मालिको में सुरक्षा की भावना जग सके और वे भयमुक्त वातावरण में अपना कार्य कर सके।

वहीं इसके अलावा भी जल्द ही ग्राम पंचायत के चुनाव आने वाले है। जिन्हें लेकर गांवों में प्रत्याशियों ने अपनी अपनी ताल भी ठोकनी शुरू कर दी है। ग्राम पंचायत चुनावों में अक्सर जनपद के कई गांव काफी सेंसेटिव है।वहीं ग्राम पंचायत के चुनावों में पहले भी कई बार जनपद में बड़ी घटनाएं भी हो चुकी है।एसपी को ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर भी विशेष तैयारी करनी होगी जिससे जनपद में ग्राम पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो सके।


Shiv Kumar Mishra
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