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किसान दिवस में अधिकारियों के गैर मौजूदगी एवं गैर जिम्मेदार रवैये से नाराज किसानों ने किया बहिष्कार

किसान दिवस में अधिकारियों के गैर मौजूदगी एवं गैर जिम्मेदार रवैये से नाराज किसानों ने किया बहिष्कार
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जनपद सुलतानपुर में समस्याओं के निस्तारण को लेकर प्रशासन द्वारा बरती जा रही उपेक्षा से नाराज किसानों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया। अन्नदाताओं ने किसान दिवस का बहिष्कार कर दिया। अफसरों की कार्यशैली के विरोध में किसानों ने विकास भवन का प्रवेश द्वार बंद कर घंटों प्रदर्शन किया। सीडीओ की मान-मनौव्वल व डीएम से वार्ता कराने के बाद ही किसानों का गुस्सा ठंडा पड़ा। तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। किसानों की समस्याओं का प्रभावी तरीके से निस्तारण करने के लिए शासन के निर्देश पर महीने के तीसरे बुधवार को किसान दिवस का आयोजन किया जाता है।

अफसरों के उदासीन रवैये के चलते महीनों से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। यह दिवस औपचारिकता बनकर रह गया है। इसीलिए मुख्य विकास अधिकारी राधेश्याम की अध्यक्षता में आयोजित किसान दिवस में जमकर हंगामा शुरू हो गया। नाराज किसानों का कहना था कि बिजली, पानी, खाद व बीज जरूरत के मुताबिक व समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। करौंदीकला के पूर्व जिपं सदस्य व किसान जगदीश सिंह ने कहा कि बिजली की खराबी की वजह से कादीपुर तहसील क्षेत्र में चालीस सरकारी नलकूप महीनों से ठप पड़े हैं। गोदाम में डंप पड़ी डीएपी किसान भोला सिंह, गुड्डू सिंह, सूर्यप्रकाश तिवारी, रामकृपाल सिंह व रमाशंकर चौधरी ने बताया कि सात माह से सस्ते दर 1076 प्रति बोरी वाली 800 मीट्रिक टन डीएपी खाद मुख्यालय की गोदाम पर डंप पड़ी है। जबकि समितियों पर 1460 रुपये की दर वाली डीएपी किसानों को दी जा रही है। अफसरों के उदासीन रवैये के चलते महीनों से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किये जाने से नाराज़ किसानों ने किसान दिवस का बहिष्कार कर धरने पर बैठे।

हर किसान दिवस में यह समस्या प्रमुखता से उठाई जाती है, मगर निदान के लिए सार्थक प्रयास आज तक नहीं किए गए। जिससे समस्या बरकरार है। धान की फसल सूख रही है। बांगरकला गांव का ट्रांसफार्मर घटिया क्वालिटी के चलते एक माह में छह बार फुंका। इसकी क्षमता फिर भी नहीं बढ़ाई गई। हृदयराम वर्मा का कहना है कि चार बार से किसान दिवस में जिलाधिकारी नहीं आ रहे हैं। दोपहर साढ़े बारह बजे किसान विकास भवन सभागार से नारेबाजी करते हुए बाहर चले गए। अफसरों के उदासीन रवैये से समस्याओं का समाधान नहीं किये जाने से किसानों ने किसान दिवस का बहिष्कार कर विकास भवन के गेट पर धरने पर बैठे।

वही मामला बढ़ता देख अधिकारीयों के हाथ पाँव फूलने लगे। मौके पर कोई बात करने को अधिकारी तैयार नहीं थे लेकिन बाद में मिडिया को मना कर अधिकारी अपनी बातें रखते हुए कहा कि किसान दिवस बहुत समय से चल रहा है और जो किसानों ने समस्याएं बताई थी उसका सम्बंधित अधिकारीयों द्वारा उसका समाधान कर चल रही थी और जो किसान सम्बंधित समस्या लेकर आये थे वो बार बार एक्शियन बिजली और लघु सिचाई विभाग का प्रश्न था और लगभग किसान दिवस समाप्ति के दौर पर था,और इनकी समस्याएं सुनी जा रही थी, लेकिन वही कृषि उप निदेशक शैलेन्द्र शाही ने हमेशा एक्शियन और जिलाधिकारी का हवाला देते हुए किसानों पर आरोप लगाया कि वह बार बार क्यों अधिकारीयों का जिक्र करते है। उनको वह व्यस्त बता कर अपना पल्ला झाड़ लेते है जिससे इनकी सच्चाई अधिकारीयों के सामने न आ जाये,वही डीडी ने बिजली विभाग एकशियन की तरफ से सफाई देते नजर आये और वही सम्मानित किसानों को कथा-कथित किसान बताया। तथा यह भी बताया कि जिलाधिकारी की उपस्थिति में यह किसान दिवस चलता रहा जबकि ऐसा कही नहीं था कि डीएम साहब सामिल ही नही हुए।

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