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सुल्तानपुर: भाजपा नेता की ट्रांसफर अर्जी स्वीकार,सीजेएम कोर्ट से हटा मुकदमा

सुल्तानपुर: भाजपा नेता की ट्रांसफर अर्जी स्वीकार,सीजेएम कोर्ट से हटा मुकदमा
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भाजपा नेता समेत अन्य के खिलाफ चल रहे मुकदमे में शासन की तरफ से केस वापसी की प्रक्रिया जारी है। इन्हीं मुकदमों को सीजेएम कोर्ट से हटाने के लिए जिला जज की अदालत में अर्जी दी गयी थी। जिसे जिला जज तनवीर अहमद ने स्वीकार करते हुए इन मामलों की सुनवाई के लिए एसीजेएम पंचम हरीश कुमार की अदालत पर केस ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।

मामला कोतवाली नगर क्षेत्र से जुड़ा है। जहां पर हुई घटना का जिक्र करते हुए 26 मार्च 2010 को तत्कालीन कोतवाल वीरेंद्र सिंह ने रामचंद्र मिश्र,रवींद्र त्रिपाठी,अशोक कसौंधन,उमाशंकर अग्रहरि,रेखराज गुप्ता,मेवालाल समेत अन्य के खिलाफ रोड जाम कर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था,वहीं कोतवाली नगर की पुलिस ने ही वर्ष 2006 में विजय त्रिपाठी,भावना सिंह,पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल,दिनेश चौरसिया,रामचंद्र मिश्र समेत अन्य के खिलाफ सरकारी काम में बाधा समेत अन्य धाराओं में एक आैर मुकदमा दर्ज कराया था। इन मुकदमों में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई सीजेएम की अदालत में चली। इसी बीच भाजपा नेता रामचन्द्र मिश्र के खिलाफ चल रहे केस की वापसी के लिए राज्य सरकार की तरफ से प्रक्रिया अपनाने की बात सामने आयी।

मिली जानकारी के मुताबिक सीजेएम कोर्ट से राहत न मिलने की आशंका पर भाजपा नेता रामचंद्र मिश्र की तरफ से सीजेएम कोर्ट की कार्यशैली पर ही सवाल खड़ा करते हुए जिला जज की अदालत में निष्पक्ष न्याय की बात कहते हुए ट्रांसफर अर्जी दी गयी। भाजपा नेता के ट्रांसफर अर्जी पर कई पेशियों से सुनवाई चल रही थी। जिला जज तनवीर अहमद ने कोर्ट की गरिमा व निष्पक्षता को बरकरार रखने के मद्देनजर भाजपा नेता की ट्रांसफर अर्जी मंजूर कर ली है।

उन्होंने दोनों मामलों को सीजेएम कोर्ट से हटाकर एसीजेएम पंचम हरीश कुमार की अदालत पर भेजने का आदेश दिया है। दोनों मामलो में सुनवाई के लिए आगामी 22 व 27 मई की तिथि तय की गयी है। मालूम हो कि भाजपा नेता रामचंद्र मिश्र के पहले भी अन्य सरकारों के प्रभावशाली नेताओं ने भी अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए शासन स्तर पर पैरवी कर केस वापसी के लिए भरपूर मशक्कत की थी। फिलहाल उन्हें अंतिम स्तर पर अदालत से राहत नहीं मिल सकी थी। अब ठीक वैसी ही पैरवी भाजपा नेता के जरिये मौजूदा सरकार में हो रही है। इन्हें कितनी सफलता मिलती है यह परिणाम आना अभी शेष है।

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