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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव : ब्राह्मण जो कभी राजनीति के केन्द्र में रहता था, समाज चलाता था आज हाशिए पर हैं..

उत्तर प्रदेश मेंं यह पहली बार है जब ब्राह्मण खुद को एक वोट बैंक में तब्दील होते देख रहा है। अभी तक वह मुख्यमंत्री बनाता था। अब उसे केवल वोट के रूप में देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव : ब्राह्मण जो कभी राजनीति के केन्द्र में रहता था, समाज चलाता था आज हाशिए पर हैं..
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बसपा, सपा बनाएगी नहीं, भाजपा बना नहीं सकती केवल एक कांग्रेस है जो अनाउंस कर सकती है।

लास्ट ब्राह्मण मुख्यमंत्री भी उसी का था। 1989 में नारायणदत्त तिवारी। नोएडा जैसा नया शहर बना गए।

उसके बाद बदल बदल कर तीनों पार्टियों का शासन आया। दलित, यादव, लोधी, वणिक, ठाकुर सबको बनाया। मगर ब्राह्मण को किसी ने नहीं।

आज सब दल ब्राह्मण के पीछे भाग रहे हैं। मगर कोई यह ऐलान नहीं कर रहा कि पिछले 32 साल से जिसे मौका नहीं मिला जीतने पर उसे बनाएंगे।

कांग्रेस सबकी पार्टी है। पंजाब में दलित बनाया, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में ओबीसी हैं। उत्तराखंड में ठाकुर हरीश रावत के चांस हैंं।

इधर उत्तर प्रदेश मेंं यह पहली बार है जब ब्राह्मण खुद को एक वोट बैंक में तब्दील होते देख रहा है। अभी तक वह मुख्यमंत्री बनाता था। अब उसे केवल वोट के रूप में देखा जा रहा है। पिछले चार साल में उसकी माहौल बनाने की और बाकी दूसरी शक्तियां खत्म हो गई हैं।

जितिन प्रसाद इतने अरमानों से गए। मगर भाजपा कोई उपयोग नहीं कर रही है। रीता बहुगुणा को भी कोई नहीं पूछ रहा। ब्राह्मण जो कभी राजनीति के केन्द्र में रहता था, समाज चलाता था आज हाशिए पर हैं।

दूर दूर तक उसे सत्ता में वापसी का कोई जरिया नहीं दिख रहा।

ऐसे में कोई CM की बात करता है तो क्या वह उसकी तरफ नहीं खिंचेगा? कांग्रेस के पास तो यूपी में कुछ खोने को है ही नहीं मगर हलचल मचाने के लिए बहुत कुछ है।

- शकील अख्तर

प्रत्यक्ष मिश्रा
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