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आज रानी अहिल्याबाई होल्कर को भी नमन है ..

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रानी अहिल्याबाई इंदौर की रानी थी, उन्होंने ही इंदौर में असली इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया था। अनेकों तालाब, सड़कें, कुएं, विश्राम गृह, घाट और मंदिरों का उन्होंने निर्माण एवं पुनर्निर्माण करवाया था। इंदौर का राजपरिवार पहले से ही काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रयास कर रहा था और इसी दौरान जब अहिल्याबाई रानी बनी तो उन्हें भी काशी विश्वनाथ के जर्जर होने और गर्भ गृह के नष्ट होने की सूचना मिली। साल 1777 था और दिन शिवरात्रि का था जब रानी अहिल्या बाई होल्कर ने ना केवल विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाने का प्रण लिया बल्कि अगले 3 साल में मंदिर को बनवा भी दिया।

चूंकि रानी ने शिवरात्रि से इसका संकल्प किया इसलिए शिवरात्रि पर ही इस मंदिर को खोला गया। रानी ने शास्त्र सम्मत तरीके से शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई। एकादश रूद्र के प्रतीक स्वरुप 11 शास्त्रीय आचार्यों द्वारा गर्भ गृह में प्राण-प्रतिष्ठा की पूजा की गई। आज से पहले जो काशी विश्वनाथ का स्वरूप था, वो रानी अहिल्याबाई की ही देन था।

रानी अहिल्याबाई के योगदान को बताता एक शिलापट और उनकी एक मूर्ति भी आज काशी विश्वनाथ धाम के प्रांगण में लगाई गई है, जिसका थोड़ी देर बाद अनावरण होगा। करीब 250 साल पहले रानी अहिल्याबाई ने इस अद्भुत धार्मिक विरासत को हमारे लिए सहेजा और सम्हाला था, आज के दिन उनको भी सादर प्रणाम है।

RUDRA PRATAP DUBEY
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