कैप्टन पिता की हत्या के बाद सेना में तैनात पुत्र ने दबंगों के भय से छोडा गांव

इस दौरान वो पकिस्तान से तीन दो बार ,चीन से एक बार हुए लड़ाई में अपने वीरता का परिचय दिया था जिसके बाद राष्ट्रपति ने उसे अवार्ड देकर और मेजर से केप्टन के पद पर प्रोन्नति देकर सम्मानित किया था.

Update: 2020-08-12 09:15 GMT

मधेपुरा,बिहार/जा रही हूँ जहाँ जाना होगा जाउंगी ,जहाँ रहना होगा रहूंगी लेकिन ये गाँव छोड़कर दूर चली जाउंगी . जब गाँव समाज ,पुलिस नेता कोई मेरा साथ ही नही दिया तो इस गाँव में रहकर क्या करुँगी ,मेरे परिवार में बेटा है, पोता है ,पोती है उसे भी अपराधी मार देगा इसलिए गाँव ही छोड़ दे रही हूँ , इतना कहकर गौरी देवी फफक फफक कर रो पड़ी.

बिहार के मधेपुरा जिला के सदर क्षेत्र के मदनपुर निवासी गौरी देवी के पति की ह्त्या बीते 13 जून को अपराधियों ने देर रात उस वक्त कर दिया जब वो अपने घर में सो रहे थे. रिटायर्ड केप्टन सियाराम यादव ने 32 वर्ष तक भारतीय सेना में काम किया .इस दौरान वो पकिस्तान से तीन दो बार ,चीन से एक बार हुए लड़ाई में अपने वीरता का परिचय दिया था जिसके बाद राष्ट्रपति ने उसे अवार्ड देकर और मेजर से केप्टन के पद पर प्रोन्नति देकर सम्मानित किया था.

घटना के दो माह बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी नही होने से क्षुब्ध होकर और दबंगो के भय से दिवंगत केप्टन की पत्नी गौरी देवी और जम्मू कश्मीर में तैनात पुत्र बालकृष्ण यादव एवं शिक्षक अनुज कुमार यादव ने अपना गांव छोड़ दिया।

पत्नी गौरी देवी कहती है देश के लिए समर्पित मेरा परिवार आज उजड़ने के कगार पर है।मेरे पति जो 32 वर्ष देश सेवा किये,पकिस्तान,चीन सहित अन्य देशों से लोहा लेते हुए देश की रक्षा की वो खुद आज अपने घर में अपराधियों के शिकार हो गए।अब मेरे बेटा, बहु,पोता ,पोती को अपराधी निशाना बना रहा है।मेरा परिवार देश के लिए अपना जीवन दान दे दिया है।पति सेना में थे,एक पुत्र सेना में है जो जम्मू कश्मीर में तैनात है,पोती जो देश के लिए कई बार शतरंज खेली और अवार्ड लेकर देश के नाम को ऊंचा की लेकिन अब हमलोगों को कोई देखने वाला नही है।रोते हुए उन्होंने कहा राज्य में न कोई शासन है न प्रशासन है अगर होता तो अपराधियों पर शिकंजा कसा जाता और हमारे परिवार की रक्षा होती कम से कम कोई भी अधिकारी या जन प्रतिनिधि सुध लेने तो जरूर आते।



गाँव छोड़ने के सवाल पर जम्मू कश्मीर में तैनात केप्टन पुत्र बाल कृष्ण बताते है कि गांव के ही दबंग नवीन यादव ने उनकी हत्या की है चूंकि उनसे जमीन विवाद था और उनके मन मुताबिक फैसला नही हो पाया था।बताया आरोपी नवीन ने पूर्व में ही हत्या कर देने की धमकी दिया था।धमकी देने के बाद लाख प्रयास किया लेकिन स्थानीय थाना ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया।बाद में एसपी से शिकायत के बाद मामला तो दर्ज हुआ लेकिन पिता जी बच नही पाए और उनको देर रात घर मे घुसकर गोली मार दी गयी।

वो कहते है गाँव इसलिए छोड़ रहा हूँ कि इसी गाँव के अपराधियों ने मेरे पिता जी की ह्त्या कर दी .अब हमलोगों को टारगेट किया जा रहा है.घर में छोटे छोटे बच्चे है उस सबकी रक्षा करनी जरुरी है.अपने आर्मी के जॉब से रिजाइन के सवाल पर वो कहते है कि पिता जी 32 वर्ष सेवा किये उसकी ह्त्या हो गयी ,दो माह बीत जाने के बाद भी अपराधियों की गिरफ्तारी तक नही हो पाई .उल्टे पुलिस द्वारा चार नामजद को निर्दोष कह मामले से नाम छांट दिया गया .मुझे देश सेवा में २० वर्ष हो गये .जब मेरे पिता जी को न्याय नही मिल सका तो हमे तो अपने परिवार की रक्षा करनी होगी इसलिए सर्विस से भी रिजाइन कर रहा हूँ और पुरे परिवार के साथ गाँव छोड़ रहा हूँ.

दुसरे पुत्र अनुज यादव कहते है कि शाशन प्रशासन सब से विश्वास उठ गया है .पिता जी सेवानिवृति के बाद केवल समाजसेवा करते थे उसकी नृशंश हत्या कर दी गयी दो माह बीत गया कोई न्याय नही मिला.अपराधियों के नाम छंट दिए गये ऐसे में इस गाँव में रहकर क्या करूँगा.ये गाँव अब काटने दौरता है.मन नही था अपने मिटटी से दूर होने का लेकिन क्या करू घर में मां है बच्चे है उनकी रक्षा जरुरी है.



अपराधियों द्वारा केस उठाने की धमकी दिलवाया जा रहा है,पुलिस अनुसन्धान के नाम पर खानापूर्ति कर हत्या करने में शामिल लोगों के नाम को ही छांट दे रही है ,कहाँ जाऊ थाना ,एसपी ,आईजी ,डीआईजी ,डीजीपी ,मुख्यमंत्री हर जगह न्याय की गुहार लगाया लेकिन कहीं कुछ नही हुआ अंततः आज गाँव छोड़ रहा हूँ .एसपी के बेटे को हम दो साल से ट्यूशन पढ़ा रहे है ,उनके बच्चे को अपने बच्चे के तरह सींचा हूँ फिर भी हमे एसपी ने न्याय नही दिया.इतना कहकर भावुक हो जाते है और रो देते है.

पास खड़े केप्टन की पोती जयश्री जो देश के लिए शतरंज खेल अवार्ड लाइ है रो रही है और कह रही है ऐसे गाँव समाज में कैसे कोई रह सकता है जहाँ एक शरीफ लोग की ह्त्या बस इस कारण हो जाती है कि उसके मन के लायक फैसला नही हुआ .ह्त्या हुआ तो कम से कम अपराधियों पर क़ानूनी कार्रवाई तो हो लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी पुलिस नौ नामजद में दो तीन लोग को गिरफ्तार कर पाती है.जय श्री भावुक होकर कहती है पूरा परिवार देश के लिए समर्पित लेकिन आज गाँव छोड़ना पर रहा है .



पुलिस ने नौ नामजद अपराधियों में तीन को गिरफ्तार किया है जिसमे एक नाबालिग आरोपी होने के कारण बेल पर बाहर भी हो गया। परिवार वालों ने मामले की सीआईडी जाँच की मांग की लेकिन सरकार के द्वारा कोई पहल नहीं की गयी . इस संबंध में जब मधेपुरा एसपी संजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा अपराध कहाँ नही होता है . पूरे भारत में अपराध होता है।अब वो इस कारण गांव छोड़ दे तो ये उसका अपना मन है।बाकी पुलिस सही दिशा में अनुसंधान कर रही है।

एक सैनिक परिवार का अपराधियों के डर से गाँव छोड़ने की खबर पुरे मधेपुरा में आग की तरह फ़ैल गया है .ये परिवार न्याय और सुरक्षा हेतु आश्न्वित है लेकिन आसपास कोई न्याय मिलता नही दिख रहा है.देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले लोग की ह्त्या हो गयी ,देश सेवा में तैनात पुत्र को रिजाइन कर गाँव छोड़ना पर रहा है निश्चित ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अपराध मुक्त बिहार के उद्द्भेदं पर कड़ा तमाचा है.

प्रशांत कुमार 

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