जम्मू-कश्मीर विधानसभा सीटों को लेकर परिसीमन आयोग का बड़ा फैसला

परिसीमन के बाद जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल सीटें 83 से बढ़कर 90 सीटें हो जाएगी. साथ ही अगले साल मार्च तक ये प्रकिया पूरी हो जाएगा.

Update: 2021-07-09 09:31 GMT

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन को लेकर आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया जिसमें कहा है कि अब विधानसभा में 83 सीटों की जगह 90 सीटें होगी। परिसीमन के बाद सात विधानसभा सीटें बढ़ गई है। यह पूरी प्रक्रिया मार्च 2022 तक पूरी हो जाएगी। यह जानकारी परिसीमन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा भी मौजूद थे। सुशील चंद्रा ने परिसीमन पर कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन होगा। साथ ही अगले साल मार्च तक ये प्रकिया पूरी हो जाएगा.

सुशील चंद्रा ने कहा कि  हमने सभी निर्वाचन क्षेत्रों का डेटा और मानचित्र संग्रह शुरू कर दिया है. हमने सभी डीओ और डीसी के साथ वर्चुअल मीटिंग की है. हम सभी डेटा एकत्र करने और विभिन्न पहलुओं की देखभाल करने की कोशिश कर रहे हैं. निर्वाचन क्षेत्रों में जिलों के साथ-साथ तहसीलों का ओवरलैपिंग है.

इस परिसीमन का जो ड्राफ्ट बनेगा उसे जनता के बीच रखा जाएगा, फिर जनता के जो सुझाव आएंगे उसे शामिल कर फाइनल ड्राफ्ट सामने आएगा। जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई और मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन साफ-सुथरे और पारदर्शी तरीके से होगा और ऐसा वह आश्वासन देते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया है और परिसीमन अधिनियम द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत तय प्रक्रिया चल रही है।

हम सभी लोगों की राय लेना चाहते हैं और उसके बाद ही हम अंतिम ड्राफ्ट तैयार करेंगे. हमारे काम को गति मिली है और हम अपना काम पारदर्शिता और न्यायिक तरीके से करेंगे. पीडीपी के बहिष्कार पर रिटायर्ड जस्टिस रंजन प्रकाश देसाई ने कहा कि हमें खुले दिल से आना होगा, यहां सभी से मिलने का स्वागत है. अगर कोई हमसे नहीं मिलता है तो हम क्या कह सकते हैं. हम अपनी पहली यात्रा में 800 लोगों और 290 प्रतिनिधिमंडलों से मिले हैं।

1995 में,12 जिले थे. ये संख्या अब 20 हो गई है. तहसीलों की संख्या 58 से बढ़कर 270 हो गई है. 12 जिलों में निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को जिले की सीमा से आगे बढ़ाया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पहला पूर्ण परिसीमन आयोग 1981 में गठित किया गया था जो 1995 में 14 साल बाद अपनी सिफारिश प्रस्तुत कर सकता था. ये 1981 की जनगणना पर आधारित था. उसके बाद से कोई परिसीमन नहीं हुआ।


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