रायगढ़ बिल्डिंग हादसा: 20 घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया 4 साल का मासूम, राहत और बचाव कार्य जारी

कलेक्टर निधि चौधरी ने कहा कि 7 साल पुरानी इमारत के गिर जाने से समझ आता है कि इमारत की कंस्ट्रक्शन क्वालिटी खराब थी.

Update: 2020-08-25 12:18 GMT

रायगढ़ : महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में सोमवार को इमारत ढहने के 19 घंटे के बाद मलबे में फंसे एक चार साल के बच्चे को आज दोपहर में बाहर निकाला गया. NDRF और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारियों ने तब ताली बजाकर खुशी ज़ाहिर की जब 4 साल के मोहम्मद बांगी को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया. 19 घंटे मलबे में फंसे होने के बावजूद मोहम्मद बांगी का सुरक्षित बाहर निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं है. राहत और बचाव का काम कर रहे कर्मचारी भी इससे काफी प्रेरित नज़र आए. NDRF के डिप्टी कमांडेंट आलोक कुमार ने कहा कि यह चमत्कार जैसा है, छोटा बच्चा था, वो बैठा हुआ था, उसे कोई चोट भी नहीं लगी है.

रायगढ़ के महाड़ इलाके में गिरी 5 मंजिला इमारत में राहत और बचाव का काम मंगलवार के दिन भी जारी रहा. एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर मलबे को हटाने का काम जारी रखा है. इस हादसे के बाद अब प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं. इमारत करीब 7 साल पुरानी है. कमज़ोर ढांचे को इमारत के ढहने का कारण माना जा रहा है. बिल्डर, कांट्रेक्टर और आर्किटेक्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस इमारत को अनुमति कैसे दी गई?

कलेक्टर निधि चौधरी ने कहा कि 7 साल की इमारत के गिर जाने से समझ आता है कि इमारत की कंस्ट्रक्शन क्वालिटी खराब थी और उसके लिए जो भी दोषी हैं जैसे बिल्डर, आर्किटेक्ट या कोई और प्रशासन से जुड़े लोग हैं तो उनके ऊपर कार्रवाई होगी.

कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे से जब सवाल पूछा गया कि जब इमारत बन रही थी तो क्या स्थानीय प्रशासन की ओर से उस पर नज़र रखी गई थी? इस पर उन्होंने कहा कि जो अधिकारी शामिल होंगे, जिसने परमिशन दी होगी उस पर कड़ी कार्रवाई करने के आदेश मैंने दिए हैं.

इमारत में रहने वाले शकील इस्माइल सऊदी अरब में काम करते हैं और फरवरी में भारत लौटे थे. लॉकडाउन के वजह से वो यहीं रुक गए, पर अब मलबे में इनके पैसे और पासपोर्ट सब कुछ तबाह हो गया. पीड़ित शकील इस्माइल ने कहा कि हमारा सबकुछ, बच्चे की डिग्री, मेरा और उनका पासपोर्ट, गोल्ड, पैसे सब कुछ अंदर है, कुछ मिल नहीं रहा है.

 यही हाल इशाद अनवर का है. ऑटो चलाने वाले इशाद इस इमारत में 5वी मंज़िल पर किराए के मकान में रहते थे. बेटे की पढ़ाई के लिए 9 दिन पहले हज़ारों रुपये खर्च कर लैपटॉप लिया था, पर अब ना ही लैपटॉप बचा, ना पैसे. पीड़ित इशाद अनवर ने कहा कि मेरी बीवी के गहने, मेरे प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट, बच्चों के सामान सब इमारत में ढह गई.

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