मुंबई: विवेक ओबेरॉय के घर पर कर्नाटक पुलिस ने मारा छापा, जानें क्यों

Update: 2020-10-15 11:33 GMT

अभिनेता विवेक ओबेरॉय के मुंबई स्थित घर पर बेंगलुरु पुलिस ने छापेमारी जारी है। बताया जा रहा है कि ड्रग्स केस में विवेक ओबेरॉय के साले आदित्य अल्वा की कथित रूप संलिप्तता के चलते छापेमारी की जा रही है।

मीडिया रिपोटर्स के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने कहा है कि आदित्य अल्वा फरार है। विवेक ओबेरॉय उनके रिश्तेदार है और हमें अल्वा के संबंध में कुछ जानकारी मिली है। हम मामले की जांच करना चाहते थे इसलिए अदालत का वारंट लेकर क्राइम ब्रांच की टीम मुंबई में उनके घर गई है।

बेंगलुरु में आदित्य अल्वा के घर की भी तलाशी ली गई। बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान बेंगलुरु पुलिस के दो इंस्पेक्टर दोपहर करीब एक बजे विवेक ओबेरॉय के घर पहुंचे थे। विवेक ओबेरॉय के साले आदित्य अल्वा कर्नाटक के पूर्व मंत्री जीवराज अलवा के बेटे हैं। आदित्य अल्वा पर कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को कथित रूप से ड्रग्स सप्लाई करने का आरोप है। कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री को सैंडलवुड के नाम से जाना जाता है।

इस मामले में कन्नड़ कलाकार रागिनी द्विवेदी और संजना गलरानी समेत 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य आरोपियों में रेव पार्टी के आयोजक वीरेन खन्ना और रियाल्टार राहुल थोंस भी शामिल हैं।

आदित्य अल्वा की मां नंदिनी अल्वा के स्वामित्व वाली बेंगलुरु की हेब्बल झील के पास पांच एकड़ की संपत्ति पर पिछले महीने पुलिसे ने छापा मारा था। जांच करने वाले अधिकारियों को संदेह है कि ड्रग का इस्तेमाल व्यापक संपत्ति में आयोजित पार्टियों में किया गया था जिसमें एक स्विमिंग पूल भी शामिल है।

मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव शिवशंकर ने अग्रिम जमानत का अनुरोध किया

केरल सोना तस्करी मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी से बचने के लिये राज्य के मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर ने बुधवार को उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर अग्रिम जमानत का अनुरोध किया। शिवशंकर ने अपनी याचिका में कहा है कि एक जिम्मेदार सरकारी सेवक के रूप में उन्होंने अपराध की जांच में अधिकतम सहयोग किया है।

उन्होंने कहा कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विभिन्न आरोपियों और गवाहों द्वारा दिए गए बयानों से आमना-सामना कराने के लिए उन्हें कई बार तलब किया। शिवशंकर ने कहा कि पिछले एक माह में विभिन्न एजेंसियों ने उनसे 90 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है, लेकिन उनके खिलाफ अदालत में किसी (जांच एजेंसी) ने रिपोर्ट नहीं सौंपी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि उन्हें इस बात की पूरी आशंका है कि जांच एजेंसी 'मीडिया ट्रायल के चलते अत्यधिक दबाव में है।

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