केरल, कर्नाटक और तेलंगाना - नितिन नवीन ने पहले दिन ही इन नेताओं को काम पर लगा दिया
संतोष कुमार पाठक
देश की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी को अब तक का अपना सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ( 45 वर्ष) के रूप में मिल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और जेपी नड्डा समेत कई अन्य दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में नितिन नवीन ने मंगलवार, 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यभार संभाल लिया।
बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी या यूं कहें कि सबसे पहली चुनौती आगामी विधानसभा चुनाव है। क्योंकि पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ ही नवीन के पास होने या फेल होने की चर्चाएं शुरू हो जाएंगी। दक्षिण भारत के राज्यों में पार्टी का जनाधार बढ़ाना और कर्नाटक में पार्टी को फिर से सत्ता में लाना भी उनके सामने एक बड़ी चुनौती होगी। यह चुनौती उनके पहले दिन के फैसलों में भी साफ-साफ नजर आती है।
पार्टी अध्यक्ष का कार्यभार संभालते ही उन्होंने पहले दिन ही ताबड़तोड़ अंदाज में केरल, तेलंगाना, बेंगलुरू और चंडीगढ़ के लिए चुनाव प्रभारी और चुनाव सह प्रभारियों की नियुक्तियों कर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। पहले दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नवीन को क्यों अपना बॉस बताया था, यह कुछ घंटे बाद ही साफ हो गया क्योंकि जिन नेताओं को नितिन नवीन के आदेश से नई जिम्मेदारी दी गई है,उसमें कई नाम बहुत ही चौंकाने वाले हैं।
नवीन ने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के पहले ही दिन, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को केरल विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रभारी नियुक्त करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही तावड़े को चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया गया है। तावड़े बिहार के प्रभारी भी हैं। तावड़े के साथ ही केरल में चुनाव के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को सह चुनाव प्रभारी बनाया गया है। शोभा करंदलाजे कर्नाटक से सांसद हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर जेपी नड्डा तक, केरल हमेशा से ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। नवीन पहले दिन से ही इस अभियान में जुट गए हैं। दक्षिण भारत में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की चुनौती में कर्नाटक भी शामिल हैं। कर्नाटक दक्षिण भारत का वह राज्य है, जहां सबसे पहले कमल खिला था लेकिन आज वहां कांग्रेस की सरकार है। शायद यही एक बड़ी वजह है कि एक चौंकाने वाला फैसला करते हुए राम माधव जैसे दिग्गज नेता को ग्रेटर बेंगलुरु निगम चुनाव के लिए चुनाव प्रभारी बनाया गया है।राम माधव अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राम माधव के साथ ही राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया और महाराष्ट्र के विधायक संजय उपाध्याय को चुनाव सह प्रभारी नियुक्त किया गया है।
तेलंगाना में होने वाले नगर निगम चुनावों को भी पूरी गंभीरता से लेते हुए नितिन नवीन ने पहले ही दिन तीन बड़े नेताओं को वहां की जिम्मेदारी थमा दी है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष शेलार को वहां का चुनाव प्रभारी बनाया गया है। शेलार नितिन नवीन के साथ काम कर चुके हैं, महाराष्ट्र युवा मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के काफी करीबी माने जाते हैं। उनके साथ ही राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी एवं हरियाणा से राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा को चुनाव सह प्रभारी नियुक्त किया गया है।
इन नियुक्तियों से यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है कि बतौर युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को कर्नाटक, तेलंगाना , केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम जैसे राज्यों में चुनावी जीत हासिल कर, अपनी क्षमता को साबित करना ही होगा।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।