प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं होने पर पुलिस नहीं कर सकती चालान! ये है बड़ी वजह

सरकार वाहनों को प्रदूषण फैलाने का जिम्मेदार मानती है, लेकिन उसके पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है

Update: 2019-09-11 08:57 GMT

नई दिल्ली। देश में 1 सितंबर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से कई लोगों को ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना देना पड़ा है। नियम पालन न करने वालों के खिलाफ पुलिस चालान भी काट रही है. लेकिन इससे जुड़ी मनमानी भी कम नहीं हो रही। पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट (PUC) को लेकर भी ऐसी मनमानी जारी है. आपकी नई गाड़ी को पुलिस रोक रही है लेकिन धुंआ उगलते भार वाहनों पर ध्यान नहीं. ऐसे में आपको यह जानना चाहिए कि पुलिस कब पीयूसी नहीं होने पर भी चालान नहीं काट सकती. आरटीआई के सवाल पर दिल्ली (Delhi) के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट (Transport Department) ने इस बारे में जवाब दिया है।

ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने कहा है कि नई गाड़ी पर साल भर तक इसकी जरूरत नहीं. यह अवधि पहले रजिस्ट्रेशन से मान्य होगी. फरीदाबाद निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट अनुभव सुखीजा ने आरटीआई लगाकर यह जानकारी हासिल की है. तो अगर आपकी नई गाड़ी पर पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) न होने के आरोप में चालान कट जाए तो मामले की पहले पुलिस उच्चाधिकारियों और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में शिकायत करिए. वहां से सुनवाई न हो तो पुलिस के खिलाफ कोर्ट में जाईए. पुलिस पर कार्रवाई होगी और चालान भी कैंसिल होगा. दरअसल, जानकारी के अभाव में कई वाहन चालकों को पुलिस परेशान करती है. पुलिसवाले नई गाड़ी पर भी इसकी मांग करने लग जाते हैं। 

आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट को लेकर यदि पीयूसी वेंडर मनमानी करे तो उसके खिलाफ दिल्ली में 42-400-400 नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। सरकार वाहनों को प्रदूषण फैलाने का जिम्मेदार मानती है,  लेकिन उसके पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि दिल्ली में होने वाले प्रदूषण में वाहनों का कितना हिस्सा है. आरटीआई के सवाल पर दिल्ली के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने कहा है कि उसके पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है. लेकिन यह जरूर कहा कि दिल्ली का पीयूसी सर्टिफिकेट पूरे देश में मान्य है। 


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