पंजाब कांग्रेस में मची खलबली, कांग्रेस विधयकों ने CM अमरिंदर के को दी ये चुनौती?

नवजोत सिंह सिद्धू के बाद अब कांग्रेसी विधायक पद्मश्री परगट सिंह और विधायक फतेह जंग सिंह बाजवा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

Update: 2020-05-19 04:25 GMT

पंजाब कांग्रेस में इस समय बड़ी हलचल देखी जा रही है. लगता है सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कांग्रेस विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को घेरने में जुट गए हैं. नवजोत सिंह सिद्धू के बाद अब कांग्रेसी विधायक पद्मश्री परगट सिंह और विधायक फतेह जंग सिंह बाजवा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को निशाने पर लेते हुए एक कमजोर मुख्यमंत्री बताया. उन्होंने कहा कि समझ से बाहर है कि पंजाब में सरकार कांग्रेस की है या मुख्य सचिव की. मंत्रियों और चीफ़ सेक्रेटरी के बीच हुए विवाद के बाद मुख्यमंत्री को तत्काल विधायकों की बैठक बुलानी चाहिए थी और साफ करना चाहिए था कि जिन मुद्दों को लेकर हमने सरकार बनाई थी वह क्यों पूरे नहीं हुए.

 परगट सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार के तीन साल के कार्यकाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं. डेढ़ साल बाद चुनाव में जनता को इसका जवाब नेताओं को देना होगा, अफसरों को नहीं. हालात ये हैं कि जिस तरह दस साल अकाली-बीजेपी गठबंधन की सरकार चल रही थी, उसी तरह ही यह सरकार चल रही है. इन दोनों की कारगुजारी में ज्यादा फर्क नहीं है.



कादियां से कांग्रेस विधायक फतेह जंग सिंह बाजवा ने ट्वीट करते हुए कहा कि सीएम को कुछ ब्‍यूरोक्रेट्स ने 'बंधक' बना रखा है. इसे तीन और कांग्रेस विधायकों ने रिट्वीट भी किया. बाजवा ने लिखा था, 'क्‍या हमारे माननीय सीएम को कुछ ब्‍यूरोक्रेट्स ने सच में और अतिशयोक्ति में, बंधक बना लिया है?' एक और विधायक डॉ. हरजोत कमल ने इसे कोट करते हुए लिखा, 'प्रिय सीएम सर, शायद ये गलतफहमियां ही हों, उन्‍हें फौरन और प्रभावी ढंग से सुलझाना जरूरी है.'

दरअसल, पिछले दिनों कांग्रेस के दर्जन भर से ज्‍यादा विधायकों ने ट्वीट कर चीफ सेक्रेटरी करन अवतार सिंह को हटाने की मांग की थी. इसके बाद, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंत्रियों-विधायकों से बात कर उन्‍हें शांत कराने की कोशिश की थी, लेकिन एक बार फिर से कांग्रेस विधायकों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है. पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू भी इस मामले में कूद पड़े हैं.

सिद्धू ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया है. इसमें वो कहते हैं कि 'एक ब्‍यूरोक्रेट हाथ की तीसरी उंगली की तरह होता है. अगर वो उंगली कट जाए तो हाथ बेकार हो जाता है.' उन्‍होंने कहा कि 'प्रभावी गर्वनेंस के लिए, सरकार चलाने के लिए पूरी मशीनरी का परफेक्‍ट मिक्‍स होना चाहिए. सिद्धू ने कहा कि स्‍वार्थ के चक्‍कर में सरकारी मशीनरी को बर्बाद नहीं करना चाहिए. सिद्धू ने इसे नया सियासी मोड़ दे दिया है.

हालांकि, पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह कांग्रेस के नवजोत सिंह सिद्धू के नजदीकी दोस्त हैं और सिद्धू ने ही उन्हें पार्टी में शामिल करवा कर टिकट दिलवाया था. फिलहाल वह जालंधर कैंट विधानसभा हलके से विधायक हैं. वहीं, फतेह जंग सिंह बाजवा पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के छोटे भाई हैं. प्रताप सिंह बाजवा और अमरिंदर के बीच छत्तीस का आंकड़ा है.

परगट सिंह सहित फतेह सिंह बाजवा और हरजोत कमल के विरोधी तेवर कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए यकीनन बड़ी चुनौती है. साफ है कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है. ऐसे में परगट सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू को अन्य कांग्रेसी विधायकों और मंत्रियों का खुला समर्थन मिला तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है.

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