पायलट का लगातार आलाकमान को चेताने के बाद गहलोत ने पायलट को लेकर दिया ये बयान

अब दोनों मिलकर सम्हालेंग चुनावी बाग डोर!

Update: 2023-05-02 08:33 GMT

पिछले लंबे समय से सचिन पायलट को शब्दों के बाण से बार-बार सुशोभित करते रहने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कल कर्नाटक चुनाव सभा के दौरान पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया गया एक बयान राजस्थान के दोनों दिग्गजों के राजनीति युद्ध को विराम देने का संकेत दे रहा है। भले ही राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राजस्थान में अपनी यात्रा के समय गहलोत और पायलट के हाथ खड़े करा कर "हम सब एक हैं का संदेश दिया था"लेकिन वह केवल मीडिया तक ही सीमित रह गया।

इसके बाद राहुल गांधी ने एक बार गहलोत और पायलट को कांग्रेस की असेट बताया था मगर वह भी कामयाब नहीं हुई।। बात करें 11 अप्रैल को पायलट द्वारा पूर्व भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की जांच के मामले में अपनी मांग उठाते हुए जयपुर में सांकेतिक धरना देने की तो उसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि पायलट के इस कदम को पार्टी विरोधी मानते हुए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जा सकती है लेकिन पायलट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई बल्कि पायलट के खिलाफ कार्यवाही का संकेत देने वाले प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा को ही तीन सह प्रभारी बनाकर उन्हें भी जल्दबाजी नहीं का संकेत दे दिया।

इन्ही तीन सह प्रभारियों में से एक ने 3 दिन पहले जयपुर आए एक सह प्रभारी ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि गहलोत अनुभवी नेता है तो वहीं सचिन पायलट भी ऊर्जावान नेता और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए अनुभव और ऊर्जा दोनों की आवश्यकता है। और इसी से मिलता-जुलता एक बयान मैं समझता हूं शायद पहली बार अशोक गहलोत ने कल कर्नाटक में दिया जिसमें यह स्पष्ट किया कि पार्टी में छोटी मोटी नाराजगी और मनमुटाव चलते रहते हैं जिसे बैठकर सुलझा लिया जाएगा।।

समझा जाता है कि कॉन्ग्रेस के उच्च पदस्थ जिम्मेदार नेताओं ने भी सचिन और गहलोत को यही संकेत दिया कि दोनों मिलकर राजस्थान में सरकार रिपीट करने का प्रयास करेंगे तो उचित होगा।। यही कारण है कि सचिन पायलट दो-तीन दिनों से कोई बयान नहीं दे रहे हैं तो वही गहलोत ने पायलट से नाराजगी को सामान्य मनमुटाव की बात कही है। इस से यह कहने से इनकार नहीं किया जा सकता कि अब विधानसभा के चुनाव मैं गहलोत और पायलट मिलकर भाजपा का मुकाबला करेंगे अब इन दोनों को किस प्रकार से सामंजस्य बिठाकर बराबर का वर्चस्व कायम रखने का मौका दिया जाएगा वह देखने वाली बात होगी! हां यहां यह बात यह बताना आवश्यक है कि सुझाव वही माना जाएगा जो गहलोत हाईकमान को सुझाएंगे! कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अब गहलोत और पायलट की राजनीतिक दूरियां शीघ्र ही समाप्त हो सकती हैं!

रमेश शर्मा 

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