नोएडा: दादरी के अस्पताल में मिला विकास दुबे का ओपीडी का पर्चा, एनकांउटर वाले दिन की तारीख अकिंत

इतना सब होने के बावजूद विकास दूबे के नाम से ओपीडी का पर्चा बनने से सुरक्षा के लिहाज से घातक हो सकते थे।

Update: 2020-07-18 09:39 GMT

धीरेन्द्र अवाना

नोएडा। जिला प्रशासन के उस समय होश उग लगे जब शुक्रवार को दादरी स्थित एक अस्पताल में बनवाया हुआ ओपीडी का एक पर्चा मिला जो कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के नाम का था।और तो और मजे की बात ये है कि जिस दिन यूपी एसटीएफ ने विकास दुबे का एनकाउंटर किया था। उसी दिन का ओपीडी का पर्चा पुलिस के हाथ लगा है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है।

हालांकि अभी तक पुलिस यह नहीं समझ पाई है कि यह पर्चा क्यों बनवाया गया था। पुलिस ने उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश की है, जिसने दादरी के अस्पताल में जाकर यह पर्चा बनवाया। शुरुआती जांच पड़ताल में पुलिस को पता लगा है कि पर्चा बनवाने वाला कोई नशेड़ी युवक था। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि विकास दुबे का मामला इतना चर्चित होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों या डॉक्टर ने कुछ भी सवाल नही किया और बड़े आराम से उस व्यक्ति का ओपीडी का एक पर्चा बना दिया जिसमें उसका नाम विकास दुबे पता कानपुर और उम्र 53 साल लिखी हुयी है।

आपको बता दे कि कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे गौतमबुद्ध नगर में कई दिन घूमता रहा। जिसके बाद पुलिस ने ग्रेटर नोएडा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और नोएडा फिल्म सिटी में नाकाबंदी की थी। यह भी जानकारी सामने आई थी कि एक बड़ा क्रिमिनल लॉयर विकास दुबे का गौतम बुध नगर में सरेंडर करवाना चाहता था। वकील की योजना पहले कोर्ट में सरेंडर करवाने की थी।जब बात नहीं बनी तो फिर किसी न्यूज़ चैनल के स्टूडियो में सरेंडर करवाने की योजना बनाई गई। पुलिस की चौकसी के चलते इन दोनों योजनाओं को परवान नहीं चढ़ाया जा सका।

इसके बाद विकास दुबे को हरियाणा में सरेंडर करवाने की कोशिश की गई थी। वहां भी बात नहीं बनी तो दिल्ली में भी सरेंडर करवाने का प्रयास किया गया था। राजस्थान में भी विकास दुबे के सरेंडर की कोशिश हुई थी। अंततः उसे मध्य प्रदेश ले जाया गया और वहां एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत उसकी गिरफ्तारी हुई।इतना सब होने के बावजूद विकास दूबे के नाम से ओपीडी का पर्चा बनने से सुरक्षा के लिहाज से घातक हो सकते थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुये जिला पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच पड़ताल की है।जांच के दौरान पुलिस को बस इतना पता चला है कि किसी नशेड़ी युवक ने यह पर्चा बनवाया था। हालांकि बाद में इस पर्चे पर दवाई भी नहीं ली गई है।पर्चा बनाने वाले स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी से पुलिस ने पूछताछ की है।पुलिस अस्पताल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की भी जांच-पड़ताल करने में जुटी हुई है।पुलिस यह समझना चाहती है कि अगर यह पर्चा विकास दुबे के लिए ही बनवाया गया था तो इसका मकसद क्या हो सकता है।

सूत्रों की माने तो पुलिस को ऐसे इनपुट भी मिले हैं कि यहां के एक बड़े गैंगस्टर से विकास दुबे के ताल्लुकात रहे हैं। विकास दुबे और गैंगस्टर के रिश्तों को खंगालने में पुलिस जुटी हुई है। पिछले दिनों जिले के दो बड़े आपराधिक गैंग पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दोनों के करीब 13 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। यह कार्रवाई कानपुर कांड के बाद की गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे राज्य में कुख्यात माफियाओं और गैंगस्टर पर कार्रवाई करने का आदेश पुलिस को दिया है।

वही इस पूरे घटनाक्रम के बारे में ग्रेटर नोएडा के पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि विकास दुबे के लिए ही दादरी के अस्पताल में पर्चा बनवाया गया था। पर्चा बनाने वाले स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ने बताया कि एक नशेड़ी युवक उसके पास आया था। उसने यह पर्चा बनवाया है। हालांकि बाद में इस पर्चे पर दवा नहीं ली गई थी। मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

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