'नाकामी' पर पर्दा डालने के लिए 'नशे' पर ठीकरा..!

पब, बार, होटल,अहाते हमेशा के लिए बंद क्यों नहीं कर देती सरकार..?;

Update: 2026-01-22 10:35 GMT


 


पूर्व आईएएस शैलबाला मार्टिन

नोएडा में बहुमंजिला इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार गिर जाने से उसकी मौत हो गई।

अब उसकी मौत के लिए खुद उसे जिम्मेदार बताने का बेशर्म अभियान शुरू हो गया है।

प्रशासन की नाकामी पर उंगली उठने के बाद प्रोपेगंडा फैलाया जाने लगा कि युवक शराब के नशे में था।

बेशर्मी की हद तो ये है कि पुलिस,प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए पब/बार के वीडियो फुटेज निकालकर वायरल करवा रहा है जहां कथित रूप से उस युवक ने नशा किया था। बार का बिल निकलवाकर सोशल मीडिया पर चिपकाया जा रहा है।

बार के फुटेज और बिल के लिए मेहनत कर रहे प्रशासन ने अगर इतनी तत्परता बचाव कार्य और सहायता में दिखाई होती तो शायद एक युवक की जान बचाई है जा सकती थी। पुलिस प्रशासन में अब इतनी मर्यादा भी नहीं बची है कि वो किसी के कफ़न पर दाग न लगाए।

इस पूरे मामले में नोएडा की कलेक्टर को बचाने की कोशिशें जिस तरह की जा रही हैं उसकी वजह तो आप सभी जानते ही होंगे।

इस बेशर्मी पर क्या ही कहा जाए..!

ध्यान रहे कि हादसे के बाद पिता और राहगीरों की सूचना पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, NDRF/SDRF सब घटना स्थल पर पहुंच गए थे। लेकिन पानी ठंडा होने और नीचे सरिए होने की आशंका के कारण किसी ने कोई खास कोशिश नहीं की। बाद में युवक के शव को ही निकाला जा सका।

अगर NDRF/SDRF के जवानों को इस प्रकार के बचाव कार्य का प्रशिक्षण/संसाधन ही नहीं दिये जा रहे तो किस काम की NDRF/SDRF?

🕳️अब बात शराब और नशे की..

आजकल शहरों में रात के वक्त जगह जगह पुलिस ब्रेथ एनालाइजर लेकर खड़ी रहती है और वाहन चालकों की जांच करती है। बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम का ये एक बड़ा कारण बन रहा है।

इस जांच में अगर कोई नशा किए हुए मिल जाए तो सड़क के अंधेरे हिस्से में खड़े पुलिसकर्मी उसे साइड में ले जाकर क्या करते हैं सभी जानते होंगे।

नशे में ड्राइव करना हादसे का सबब तो है ही, अपराध भी है...तो सरकार इन पब, बार, होटल, अहातों, क्लबों आदि को हमेशा के लिए बंद क्यों नहीं कर देती?

प्रशासन देर रात पार्टियों की अनुमति क्यों देता है? पार्टियों के आयोजन के लिए अस्थाई बार लाइसेंस क्यों जारी किए जाते हैं?

मध्य प्रदेश में नई शराब नीति के तहत शराब की दुकानों पर रात 11:30 बजे तक शराब का विक्रय किया जाना अनुमत है जबकि सेवन की अनुमति रात 12 बजे तक है। क्यों नहीं सरकार इस समय को कम करती है?

नाबालिग बच्चे तक दुकानों से शराब खरीदते हुए दिख जाएंगे। इस पर रोक क्यों नहीं?

यही हाल देश के बाकी राज्यों का है।

हद तो ये है कि गुजरात और बिहार जैसे घोषित शराबबंदी वाले राज्यों में शराब आसानी से बिकती रहती है।

बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के बाहर के छोटे छोटे भोजनालयों को तो रात 10 बजे से ही बंद करवाने के लिए पुलिस डंडे फटकारने लगती है।

इस बात पर भी विचार नहीं करती कि देर रात आने वाले मुसाफिर अपना पेट कहां भरेंगे? जब इन भोजनालयों को जल्दी बंद करवाया जा सकता है तो नशे के अड्डों पर मेहरबानी क्यों?

क्या नशा सभी प्रदेशों में राजस्व उगाही और उससे भी आगे बढ़कर भ्रष्टाचार का साधन मात्र है?

क्या अब हर दुर्घटना में 'नशा' नामक अज्ञात आरोपी अपनी नाकामी छिपाने के लिए खोज लिया गया है?

(शैलबाला मार्टिन मप्र काडर की सेवानिवृत IAS अधिकारी हैं।)

Full View


Similar News