Supreme Court Anudeshak : सुप्रीम कोर्ट में अनुदेशकों की बड़ी जीत, सरकार को 17 हजार मानदेय देने का आदेश
अनुदेशकों की नौकरी सुरक्षित हो गई है और उन्हें 17000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलना तय किया गया है।;
उत्तर प्रदेश के करीब 25 हजार अंशकालिक अनुदेशको के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने खुशियों की लहर ला दी है। देश के उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है, जिससे इन शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित हो गई है और उन्हें 17000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलना तय किया गया है। यह फैसला हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर साबित हुआ है।
सालों की इंतजार के बाद न्याय मिला
2017 से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे अंशकालिक शिक्षकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। वर्षों तक काम करने के बावजूद उन्हें उचित मानदेय नहीं मिला था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद न सिर्फ उनकी नौकरी को स्थिरता मिली है, बल्कि मानदेय भी तय कर दिया गया है।
ये शिक्षक वर्षों से अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे थे, और आज उन्हें कानूनी जीत मिली है।
जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने स्पष्ट रूप से कहा कि-
वर्षों तक लगातार कार्य करने के बाद इन शिक्षकों की नियुक्ति को केवल संविदात्मक नहीं माना जा सकता।
सरकार द्वारा उन्हें अन्यत्र नौकरी नहीं करने दिया गया, इसलिए ये पद स्वतः सृजित पद माने जाएंगे।
ऐसे में सरकार को उन्हें केवल संविदा कहकर दायित्व से बचने का अधिकार नहीं है।
नौकरी अब सुरक्षित, मानदेय हुआ तय
इस फैसले से इन शिक्षकों की नौकरी बिलकुल सुरक्षित हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए दिया है।
अब प्रत्येक अनुदेशक को मानदेय के रूप में ₹17000 रुपए प्रतिमाह मिलेग वह भी 1 अप्रैल 2026 से । साथ ही मार्च 2017 से मार्च 2026 तक बकाया का भी देने को कोर्ट ने कहा है।
यह कदम न केवल आर्थिक रूप से मददगार है, बल्कि शिक्षक समुदाय को आत्म-विश्वास भी देगा।
राज्य सरकार की अपील क्यों खारिज हुई
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सरकार का तर्क था कि ये नियुक्तियां संविदात्मक थीं, इसलिए इन्हें वही मानदेय और नियम मिलने चाहिए जो संविदा पर काम करने वालों को मिलता है।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि:
वर्षों से लगातार सेवा देने के कारण इन शिक्षकों को सिर्फ संविदात्मक नहीं माना जा सकता;
सरकार उन्हें अस्थायी कहकर दायित्व से बच नहीं सकती।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की पूरी अपील खारिज कर दी।
हजारों परिवारों को मिली राहत
इस फैसले से न सिर्फ शिक्षक बल्कि उनके परिवारों को भी राहत मिली है। कई शिक्षक घर चलाते हैं, बच्चों की पढ़ाई और रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए यह मानदेय बेहद मायने रखता है।
यह फैसला उनके लिए एक लंबी लड़ाई का सकारात्मक परिणाम है।