पश्चिम बंगाल में नागरिकता कानून को लेकर दिलीप घोष का बड़ा बयान, ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

Update: 2019-12-14 05:23 GMT

कोलकाता। नागरिकता संसोधन बिल पर राष्ट्रपति ने भी मुहर लगा दी फिर भी कई राज्यों ने इसे् लागू करने से कतरा रहे है। वही इस कानून को लेकर पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष  ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि राज्य में नागरिकता कानून लागू होकर रहेगा और न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस इसे रोक पाएगी. घोष कहा कि पश्चिम बंगाल यह कानून लागू करने वाला पहला राज्य बनेगा। 

उन्होंने कहा, "इससे पहले उन्होंने अनुच्छेद 370 और नोटबंदी का भी विरोध किया था, लेकिन वे केन्द्र सरकार को इसे लागू करने से नहीं रोक पाए. ऐसे ही राज्य में नया नागरिकता कानून लागू होकर रहेगा."

गौरतलब है संशोधित नागरिकता अधिनियम की सबसे मुखर आलोचकों में से एक ममता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि वह किसी भी परिस्थिति में अपने राज्य में नया कानून लागू नहीं होने देंगी, जिसपर भाजपा की ओर से यह बयान आया है।

वहीं राज्य के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, ''यह अब विधेयक नहीं...कानून बन चुका है. संसद ने विधेयक को पारित कर दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति ने अपनी संस्तुति दे दी है. इसलिए, एक मुख्यमंत्री जो संवैधानिक पद पर हैं और जिन्होंने भारतीय संविधान की शपथ ली है, वह ये नहीं कह सकती हैं कि वह कानून को लागू नहीं करेंगी.''

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून को अपने राज्यों में लागू करने को लेकर अब तक छत्तीसगढ़, केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके राज्य में लागू नहीं होगा. कानून को अपने राज्य में लागू ना करने को लेकर आधार बताया जा रहा है कि बीजेपी देश की सेक्यूलर साख को नुकसान पहुंचा रही है.

अधिकारी ने बताया कि संविधान की सातवीं अनूसूची में तीन सूचियां हैं जिसमें संघ, राज्य और समवर्ती सूची शामिल हैं. इसके तहत संसद द्वारा पास किया गया कोई कानून जो संघ की सूची के विषय के तहत है, वह पूरे देश में लागू होगा। 

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