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कविता: इसे ऊँचा देखकर गर्व महसूस करता है, भारत का हर नागरिक

कविता: इसे ऊँचा देखकर गर्व महसूस करता है, भारत का हर नागरिक
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"स्वतंत्रता दिवस"

स्वतंत्रता दिवस, आजादी का है दिन यह हमारा राष्ट्रीय पर्व।

आजादी की इस महकती हवा में, हर कोई करता खुद पर गर्व।।

अपने प्राणों की आहुति देकर, साहसी शूरवीरों ने लड़ी लड़ाई।

मातृभूमि को अपने ख़ून से सींचा, वतन को आजादी दिलाई।।

स्वतंत्रता संग्राम के उन वीर शहीदों को, सलाम है सारे जहाँ का।

सदियों तक ना होगा खत्म, गुणगान उनके सच्चे बलिदान का।।

देश की शान झण्डा तिरंगा, एकता शान्ति और प्रगति का प्रतीक।

इसे ऊँचा देखकर गर्व महसूस करता है, भारत का हर नागरिक।।

फिर से वही एकता और देशभक्ति का, लेना होगा हम सबको वचन।

एकता का ही तो प्रतीक है, हमारा हिन्दुस्तान हमारा यह वतन।।

आज इस राष्ट्रीय पर्व के शुभ अवसर पर, करते है हम सब प्रण।

जब भी संकट आयेगा हमारे वतन पर, इसकी रक्षा करेंगे हम।।

खुब तरक्की करी हमारे देश ने, पूरे संसार में है तिरंगा लहराया।

एकता का प्रतीक देश हमारा, मिलकर रहना सबको सिखलाया।।

(कवि: अजय कुमार मौर्य, पी-एचडी शोधार्थी, तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी)

सुजीत गुप्ता
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