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कोई कितना भी लाचार हो, एक सीमा तक ही बर्दाश्त कर सकता है. इतना ज़ुल्म मत कीजिये कि हड्डियों के साथ सब्र भी टूट जाए...

कोई कितना भी लाचार हो, एक सीमा तक ही बर्दाश्त कर सकता है. इतना ज़ुल्म मत कीजिये कि हड्डियों के साथ सब्र भी टूट जाए...
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बाकी छोटी मोटी गलतियां भी हैं कि लॉक डाउन है तो कहीं परदेस में चुपचाप भूखे मरने की बजाय यह अपने अपने गांव में आकर दो रोटी खाना और परिवार के साथ रहना चाहते हैं।


पुलिस अगर इन्हें इस बुरी तरह से मार रही है तो इनकी गलती भी है .... पहली गलती तो यह कि यह गरीब और मजदूर हैं। दूसरी गलती यह कि गरीब और मजदूर होने के बावजूद इन्होंने सोने की चिड़िया माने जाने वाले इस मुल्क भारत में जन्म लिया। बाकी छोटी मोटी गलतियां भी हैं कि लॉक डाउन है तो कहीं परदेस में चुपचाप भूखे मरने की बजाय यह अपने अपने गांव में आकर दो रोटी खाना और परिवार के साथ रहना चाहते हैं।

ये क्या विदेश में लाखों- करोड़ों कमाने वाले कोई अप्रवासी भारतीय हैं, जिनके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वन्दे भारत मिशन चलाकर एयर इंडिया के लक्जरी हवाई जहाजों की लाइन लगा देंगे? इन्हें तो इसी तरह बल भर कूटना चाहिए ताकि सरकार के 20 लाख करोड़ के पैकेज से लोन लेकर या तो ये भी अमीर बनें या फिर वहीं भूख से अकेले ही मर जाएं, जहां यह दिन- रात मजदूरी करके बमुश्किल अपना पेट पाल रहे थे।


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