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कोई कितना भी लाचार हो, एक सीमा तक ही बर्दाश्त कर सकता है. इतना ज़ुल्म मत कीजिये कि हड्डियों के साथ सब्र भी टूट जाए...

कोई कितना भी लाचार हो, एक सीमा तक ही बर्दाश्त कर सकता है. इतना ज़ुल्म मत कीजिये कि हड्डियों के साथ सब्र भी टूट जाए...

बाकी छोटी मोटी गलतियां भी हैं कि लॉक डाउन है तो कहीं परदेस में चुपचाप भूखे मरने की बजाय यह अपने अपने गांव में आकर दो रोटी खाना और परिवार के साथ रहना चाहते हैं।

18 May 2020 9:42 AM IST