Top
Begin typing your search...

राम मंदिर आस्था या आलोचना?

राम मंदिर आस्था या आलोचना?
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

गौतम सिंह भदौरिया

राम मंदिर कभी भी आलोचना का विषय हो ही नही सकता ये सदियों से आस्था का ही विषय रहा है। श्री राम मंदिर अब ये सिर्फ आस्था का ही विषय नही है, अब ये जीवन शैली, विचारधारा, निष्ठा और सोच का भी विषय है।बहोत लंबी लड़ाई सबसे महत्वपूर्ण सब्र की लड़ाई, न्याय की लड़ाई का एक प्रतीक है, सबसे लंबे दिनों तक न्यायालय में चलने वाली और अब जब निर्माण की शुरुआत हो चुकी है तब ये छोटी बातें तो होती ही रहेंगी और भव्य मंदिर के निर्माण में कष्ट और कांटे तो आते रहेंगे ।

लगभग 10 लाख टोलियों में जुटे 40 लाख समर्पित कार्यकर्ताओं के माध्यम से ये निधि अभियान सफल हुआ. इसके तहत रामभक्तों ने प्रांत, जिला, तहसील व गांवों के घर-घर जाकर समर्पण निधि तो प्राप्त की ही साथ ही राम के प्रति श्रद्धा, विश्वास व समर्पण के भाव ने सबको मंत्र मुग्ध कर दिया और श्री राम मंदिर का सपना साकार हुआ।

74 रामभक्तों ने एक करोड़ से अधिक की निधि की समर्पित, 25 से 50 लाख का समर्पण 123 रामभक्तों ने किया। दस से 25 लाख का समर्पण 950 रामभक्तों ने किया। इसी तरह पांच से दस लाख का समर्पण 1428 व एक से पांच लाख की निधि 31 हजार 663 रामभक्तों ने समर्पित की है।

क्या है आरोप

आम आम आदमीी पार्टी पार्टी के सांसद संजय सिंह द्वारा यह आरोप लगाया गया लगाया गया कि दो करोड़़ की रुपए की जमीन 18 करोड़ रुपए की हो गई। किस-किस खाते से 17 करोड़ रुपए RTGS किए गए, इसकी जाँच की माँग भी की गई है। 1.208 हेक्टेयर जमीन का बैनामा और एंग्रीमेंट हुआ। पूर्व सपा नेता पवन पांडेय का आरोप है कि बाबा हरिदास ने उस जमीन को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को बेचा और उसी को ट्रस्ट ने खरीदा। मतलब, आरोप है कि 2 करोड़ की जमीन खरीद कर ट्रस्ट के साथ 18 करोड़ में एग्रीमेंट की गई और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा दोनों में गवाह हैं।

महामंत्री चंपत राय जी ने इसका जवाब दिया है,

चंपत राय जी ने खुद इसका जवाब देकर बहोत बातों को साफ कर दिया है, उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने निर्माणाधीन राम मंदिर के आसपास के छोटे-मोटे मंदिरों और गृहस्थों की जमीन खरीदी। परकोटा दीवार की वस्तु में सुधार, पूर्व-पश्चिम दिशा में आवागमन की सुविधा, खुला मैदान रखने के लिए और सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा आवश्यक था। साथ ही जिनसे भूमि ली गई है, उनके पुनर्वास की भी समुचित व्यवस्था की जा रही है यानी आवास की भी व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए भी जमीन की खरीददारी चालू है। उन्होंने कहा कि क्रय-विक्रय का कार्य सहमति के आधार पर किया जाता है और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी होते हैं। यहाँ तक कि कोर्ट फी और स्टाम्प तक की खरीददारी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन की जा रही है। विक्रेता के खाते में रुपए भी ऑनलाइन ही भुगतान किए जा रहे हैं। चंपत राय जी ने बताया कि सहमति पत्र के हिसाब से ही कार्य हो हो रहा है, और इसमें छुपाने वाली कोई बात ही नही, सब पारदर्शी तरीक़े से किया जा रहा है।

चंपत राय जी ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के साथ ही यहाँ जमीन के भाव बढ़ गए, क्योंकि कई इलाकों से लोग आकर यहाँ भूमि खरीदने लगे। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए भूमि खरीद रही है। जिस भूखंड को लेकर संजय सिंह से आरोप लगाया, उसे रेलवे लाइन के पास खरीदा गया। ये एक प्रमुख स्थान है।यहां रोजगार के भी साधन बढ़ रहे हैं और यहां विकास भी अपने नए आयाम को छू रही है।

चंपत राय ने स्पष्ट किया कि 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट ने अब एक जितनी भी भूमि खरीदी है, उसे खुले बाजार की कीमत से कम पर ही लिया गया है। उन्होंने कहा, "उस भूमि को बेचने वालों ने वर्षों पूर्व अनुबंध करा लिया था। मार्च 18, 2021 को इसका बैनामा हुआ। फिर ट्रस्ट के साथ अनुबंध किया गया।" चंपत राय जी ने आरोपों को गलत और बुरी मंशा कहा, वैसे बहोत सारे लोग इस आरोप को 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव के रूप में भी देख रहे हैं, उनके हिसाब से इस आरोपों के माध्यम से राजनीति रोटी सेकने की कोशिश चल रही है।

आरोप बेबुनियाद और निराधार

अधिवक्ता अभिषेक द्विवेदी ने राम मंदिर पर संजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए चीजों को समझाया है। उन्होंने 'एग्रीमेंट टू सेल' और 'सेल डीड' का अंतर समझाते हुए कहा कि एग्रीमेंट का अर्थ हुआ कि किसी बाद की तारीख को जमीन बेचने का वादा किया गया, वहीं डीड मतलब सेल पूर्ण हो गया।

सितंबर 17, 2019 को कुसुम पाठक नामक महिला ने सुल्तान अंसारी समेत कुछ लोगों के साथ 'एग्रीमेंट टू सेल'(Agreeent to sale) किया।

समझने वाली बात है कि , तब उस समय के बाजार मूल्य के आधार पर ऐसा किया गया क्योंकि राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में अब भी 2 महीने बाकी थे। ये एग्रीमेंट 2 करोड़ रुपए का हुआ। मार्च 18, 2021 को ही सुल्तान अंसारी ने उसी 'एग्रीमेंट टू सेल' को आधार बना कर 'सेल एग्रीमेंट' किया (बेचने के लिए)(sale deed execute) जिसमें 2021 के बाजार मूल्य के हिसाब से 18 करोड़ रुपए की बात हुई। ठीक उसी दिन, कुसुम पाठक ने 2019 वाला सेल एग्रीमेंट लागू किया, जो सुल्तान अंसारी के साथ हुआ था।

याद कीजिए, कुसुम पाठक और सुल्तान अंसारी वाला ये 'एग्रीमेंट टू सेल' 2019 के बाजार मूल्य पर ही था। अब ट्रस्ट ने जब इस जमीन को खरीद लिया (सेल एग्रीमेंट) है, इसका अधिग्रहण भी हो गया है और कुछ ही दिनों में सेल डीड भी एग्जिक्यूट किया जाएगा। अयोध्या में 2019 और 2021 इन दो वर्षों में जमीन के दाम अच्छे-खासे बढ़े हैं। राम मंदिर जजमेंट और यूपी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण ऐसा हुआ, ये सभी जानते हैं।

दोनो के बयान को साझा भी कर रहा हूँ, जिसमें समझाया गया है, इतनी पारदर्शिता के बावजूद भी अगर आरोप लगे तो रामभक्तो को कष्ट होगा ही ।

लेखक पेश से अधिवक्ता है

Shiv Kumar Mishra
Next Story
Share it