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अमन यात्रा: विदाई देते बोले गुलाम नबी आजाद, गांधी का रास्ता ही अमन का रास्ता

यात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम में  मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए गांधी ग्लोबल फैमिली के अध्यक्ष तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि सत्य व अहिँसा ही ऐसे अस्त्र हैं, जो पूरी मानवता को विनाश से बचा सकते हैं।

अमन यात्रा: विदाई देते बोले गुलाम नबी आजाद, गांधी का रास्ता ही अमन का रास्ता
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नई दिल्ली। स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश भर के विभिन्न गैर राजनीतिक स्वयं सेवी संगठनों की ओर से दिल्ली स्थित महात्मा गांधी की समाधि राजघाट से शहीद भगत सिंह तथा उनके साथियों की हुसैनीवाला(फिरोजपुर) स्थित समाधि स्थल तक 12 से 15 अगस्त ,2021 तक चलने वाली आग़ाज़ ए दोस्ती का शुभारंभ हो गया है। इस यात्रा में लगभग 35 लोग हैं, जिनमें स्त्री भी शामिल हैं। यात्रा दल इस यात्रा के क्रम में आने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानी सम्मान स्थलों पर जाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेगा । यात्रा के अन्य पड़ावों में खादी आश्रम, पानीपत, शहीद भगत सिंह के जन्मस्थान खटकड़ कलां, गदरी बाबया की स्मृति में जालंधर स्थित देशभक्त यादगार हॉल, दुद्दी कलां में लाला लाजपतराय के जन्मस्थान व अंत मे मोगा होते हुए हुसैनीवाला समाधि स्थल तक पहुचना होगा ।

यात्रा के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए गांधी ग्लोबल फैमिली के अध्यक्ष तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि सत्य व अहिँसा ही ऐसे अस्त्र हैं, जो पूरी मानवता को विनाश से बचा सकते हैं। लोगों को जोड़ने का रूहानियत काम सदा जारी रखना चाहिये । अपने एक सरल उदाहरण को बताते हुए उनका कहना था कि जिस तरह हम रोजमर्रा की चाय/ कॉफी के गहरे कालेपन को दूध की कुछ बूंदे ही रंग परिवर्तित करती हैं, वैसे ही सज्जन शक्ति विषमता, नफरत व हिंसा को खत्म करती है । इसलिए सभी संगठनों को एक जुट हो कर गांधी मार्ग का अनुगमन कर टकराव को खत्म करना चाहिए ।

बापू का रास्ता ही एक आदर्श है जो हमे मेलजोल ,भाईचारे एवम प्रेम से रहना सिखाता है । इसके लिए देश भर के मजदूर-किसानों के बीच जाना ही एक मकसद है । अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सन 1969 में उनकी रियासत जम्मू -कश्मीर से दो युवकों को गांधी विचार के शिविर में भागीदारी का अवसर मिला था और ये ऐसे क्षण थे जिन्होंने उनके जीवन की धारा ही बदल दी । वे बेशक राजनीति में रहते हुए अनेक पदों पर रहे परन्तु गांधी विचार के मूल सूत्र सत्य व अहिंसा को नहीं छोड़ा । यह इसी विचार का प्रभाव रहा कि तमाम राजनीतिक जीवन में अनेक अवसर आने पर भी किसी भी दुर्व्यसन में नहीं फंसे ।

अपने राजनीतिक जीवन के दूसरे अनुभव को रखते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्हें जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला तो उस मिलिटेंसी प्रभावित राज्य में 14 वर्ष से 16 वर्ष के विद्यार्थियों में गांधी विचार ले जाने के लिए लाखों की संख्या में बापू की अमर आत्मकथा "सत्य के प्रयोग" बंटवाया तथा उस पर आधारित लगभग 12 लाख विद्यार्थियों में विचार प्रतियोगिता करवाई । उनका मानना है कि इस उम्र से अच्छी कुछ भी अवस्था नहीं है जो व्यक्ति का मार्गदर्शन कर सके । यहीं सीख कर वे अपना व्यक्तित्व निर्माण कर सकते हैं ।

राजनीति में भी आज शुचिता ,ईमानदारी एवम मिठास पैदा करने की जरूरत है । राजनीति में विरोध होना लाजिमी है परन्तु वह शत्रुता नहीं होनी चाहिए । सन 1973 में स्व निर्मला देशपांडे जी से अपनी पहली मुलाक़ात को याद करते हुए आजाद ने कहा कि गांधी का जीवन पवित्रता ,संयम व सादगी से परिपूर्ण था जिससे वे सदा प्रेरित रहे । नई पीढ़ी का भारत किसी ऐश्वर्य से नहीं अपितु मन व दिल के बदलने से होगा । वे आश्वस्त हैं कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है ।

आगाज़ ए दोस्ती यात्रा की अत्यंत प्रासंगिकता है यही है कि यह टूटे ,बीमार व घायल दिलों को जोड़ने का काम करेगा । इस यात्रा की सफलता के लिए उनकी समस्त सदभावना ,समर्थन व शुभकामनाएं है । इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हाली पानीपती ट्रस्ट की सह अध्यक्ष डॉ सईदा हमीद ने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति पूरे विश्व मे शांति की गारंटी है । उन्होंने अपने पड़ नाना मौलाना हाली पानीपती की नज़्म को सुनाया जिसमे कहा है अगर तुम चाहते हो मुल्क की खैर , न किसी हम वतन को समझो गैर ।

आज इसी भावना की जरूरत है । भारत और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी देश हैं जिनके लिए जरूरी है कि वे सद्भाव व शांति से रहे । दोनों देशों की यह न केवल जरूरत है अपितु अनिवार्यता भी है । स्व कुलदीप नय्यर की पौत्री व पत्रकार मंदिरा नय्यर ने कहा कि उनके दादा ने अपने अन्य साथियों के साथ मिल कर इस यात्रा को सन 1985 में शुरू किया था । यह उनका स्वप्न था जिसे पूरा करना हम सबका परम् कर्तव्य है । आग़ाज़ ए दोस्ती द्वारा की जा रही कोशिशों के प्रति उन्होंने समर्थन व्यक्त किया तथा कहा कि सन 2018 में इस यात्रा की बागडौर युवाओं को सौंप कर उन्हें बेहद सकून मिला था ।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय संग्रहालय के निदेशक ए अन्नामलाई ने कहा कि किसी ने उनसे पूछा कि क्या अहिंसा से किसी समस्या का निदान हुआ है तो उनका कहना था कि हिंसा ,युद्ध व टकराव से भी किसी भी समस्या का निपटारा नहीं हो सका है । पूरी दुनिया की सभी दिक्कतों का एक ही रास्ता गांधी व अहिंसा का ही है । कार्यक्रम के प्रारम्भ में गांधी ग्लोबल फैमिली /हाली पानीपती ट्रस्ट के महासचिव राम मोहन राय ने यात्रा का परिचय व प्रयोजन बताया व सभी अतिथियों का स्वागत किया ।

इस अवसर पर गांधी ग्लोबल फैमिली के उपाध्यक्ष पद्मश्री डॉ एस पी वर्मा , प्रसिद्ध आर्टिस्ट हेमा चक्रवर्ती ने भी अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की । यात्रा में आयु में सब से छोटे प्रतिनिधि भुवनेश आदि ने जय जगत गीत को गा कर अपनी शुभकामनाएं दी । मुख्य अतिथि आज़ाद ने प्रतीक रूप में इस बाल यात्री का स्वागत कर समूचे यात्री दल को सम्मानित किया ।


सुजीत गुप्ता
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