लालू यादव की बेटी रोहिणी का Twitter अकाउंट लॉक, सुशील मोदी ने की थी शिकायत

लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का अकाउंट ट्वीटर ने लॉक कर दिया है।

Update: 2021-05-21 13:04 GMT

बिहार : सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर लगातार अपने अंदाज में अपनी बात रख रहीं पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का अकाउंट ट्वीटर ने लॉक कर दिया है। बिहार के पूर्व उप मुख्‍यमंत्री और बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने कल रोहिणी की शिकायत ट्वीटर से की थी। आज उन्‍होंने इस बारे एक और ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी साझा की।

दरअसल, कल रोहिणी ने सुशील मोदी की बातों का जवाब देते हुए ट्वीटर पर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। दरअसल, सुशील मोदी ने सवाल किया था कि तेजस्वी प्रसाद यादव को सरकारी आवास के बजाय पटना में अर्जित मकानों में से किसी को कोविड अस्पताल बनाना चाहिए था, जहां गरीबों का मुफ्त में इलाज होता। सुशील मोदी ने कहा था कि तेजस्वी यादव के परिवार में दो बहनें एमबीबीएस डाक्टर हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में उनकी सेवाएं क्यों नहीं ली गईं।

बीजेपी सांसद के इन सवालों पर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य भड़क उठी थीं। सुशील मोदी पर निशाना साधते हुए उन्‍होंने ट्वीट कर लिखा कि ये तो आपकी किस्मत अच्छी थी कि हम वहां पर नहीं थे। रोहिणी ने अपने ट्वीट में सृजन घोटाले का जिक्र करते हुए भी सुशील मोदी को निशाने पर लिया था। इसके बाद सुशील मोदी ने ट्वीटर से रोहिणी की शिकायत की थी।

बता दें कि बुधवार को तेजस्वी यादव ने तेजस्वी ने सरकारी बंगले में बनाया कोविड केयर सेंटर तेजस्वी ने अपने 01, पोलो रोड स्थित सरकारी आवास में राजद कोविड केयर सेंटर स्थापित कराया है। अपने निजी कोष से तैयार कराए गए इस सेंटर में बेड, ऑक्सीजन, दवाओं के साथ ही खाने-पीने का भी समुचित इंतजाम किया गया है। तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार से इस कोविड केयर सेंटर को टेकओवर कर संचालित कराए जाने का अनुरोध किया है।

सुशील मोदी ने ट्वीट कर पूछा कि मंत्री बनाने के एवज में जो दो मंजिला भवन गिफ्ट किया गया था, उसमें या राबड़ी देवी के पास जो फ्लैट बचे हैं, उनमें अस्पताल क्यों नहीं खोला गया। एक अन्य ट्वीट में सुशील मोदी ने लिखा है कि यदि राजद नेतृत्व में गरीबों की सेवा के लिए तत्परता और गंभीरता होती, तो अस्पताल शुरू करने के लिए पहले सरकार से अनुमति ली जाती और उसके मानकों का पालन किया जाता। बिना डॉक्टर, उपकरण, स्वास्थ्यकर्मी के किसी परिसर में केवल कुछ बेड लगा देने से अस्पताल नहीं हो जाता। इससे केवल अस्पताल होने का नाटक किया जा सकता है।


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