राजद प्रमुख लालू यादव ने कहा- जाति आधारित जनगणना पर मोदी सरकार कर सकती है इनकार, दी ये चेतावनी
दिल्ली पहुंचे आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा सरकार पर निशाना साधा। लालू प्रसाद यादव ने कहा कि अगर केंद्र सरकार जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती है तो बिहार सरकार अपने खर्चे पर जातीय जनगणना कराएं।;
दिल्ली पहुंचे आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा सरकार पर निशाना साधा। लालू प्रसाद यादव ने कहा कि अगर केंद्र सरकार जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती है तो बिहार सरकार अपने खर्चे पर जातीय जनगणना कराएं। हम लोग नीतीश कुमार के साथ हैं। अगर जाति जनगणना नहीं होगी तो हम लोग देशव्यापी प्रदर्शन करेंगे। आरजेडी मुखिया के इस ऐलान से बिहार का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ सकता है। अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लालू के इस दांव ने ट्विस्ट ला दिया है।
लालू यादव का कहना है कि केंद्र सरकार ये योजना बना रही कि जाति आधारित गणना न हो, क्योंकि एसी/एसटी वर्ग के लोगों की संख्या बढ़ी है और सरकार को उन्हें नौकरी देनी पड़ रही है। इसलिए सरकार इससे इनकार कर सकती है। लोकसभा में केंद्र सरकार ने कहा था कि जातीय जनगणना संभव नहीं है।
Narendra Modi and BJP are planning to ensure that there is no caste-based census. The population of SC/ST has risen hence govt has to give jobs to them. Govt might deny but we will make sure that caste-based census is carried out: RJD chief Lalu Prasad Yadav, in Delhi
— ANI (@ANI) December 4, 2021
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इसी साल अगस्त माह में बिहार सीएम नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव जाति आधारित जनगणना पर साथ आए थे। उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि सरकार जाति आधारित जनगणना सुनिश्चित करे। इस मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी सरकार से जाति आधारित जनगणना की मांग कर चुके हैं।
इससे पहले बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को कहा था कि राज्य अपने संसाधनों की मदद से ओबीसी की गिनती की मांग पर दबाव डालने के लिए वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखेंगे। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को दोहराया था कि जनगणना में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों को शामिल नहीं किया जाएगा। इसलिए बिहार के सामने राज्य विशेष की कवायद ही एकमात्र विकल्प बचा है।
जातिगत जनगणना के पक्ष में बिहार विधानमंडल द्वारा दो बार सर्वसम्मत से प्रस्ताव पारित किए गए हैं और इसकी वकालत करने वालों का मानना है कि सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं के अच्छे वितरण का रास्ता बेहतर करेगा।