ICMR का बड़ा दावा, कोरोना वायरस भारत में नवंबर में मचाएगा सबसे ज्यादा तबाही!

भारत में इस महामारी का चरम अब नवंबर मध्य तक आ सकता है और इस दौरान ICU बेड और वेंटिलेटर की कमी पड़ सकती है?

Update: 2020-06-15 06:35 GMT

कोरोना वायरस के मामलों पर ICMR की नई स्टडी चिंताजनक है. स्टडी में कहा गया है कि 8 हफ्तों के लॉकडाउन की वजह से भारत में इस महामारी का चरम अब नवंबर मध्य तक आ सकता है और इस दौरान ICU बेड और वेंटिलेटर की कमी पड़ सकती है. हालांकि स्टडी में इस बात का भी जिक्र है कि लॉकडाउन की वजह से स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का भी समय मिल गया. 

ये स्टडी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा गठित ऑपरेशंस रिसर्च ग्रुप के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है. स्टडी में कहा गया है कि लॉकडाउन ने कोरोना वायरस के पीक पर पहुंचने के समय को लगभग 34 से 76 दिनों तक आगे बढ़ा दिया. लॉकडाउन की वजह से संक्रमण के मामलों में 69 से 97 फीसदी तक की कमी आई और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में भी मदद मिली. 

स्टडी में कहा गया है कि लॉकडाउन के बाद सार्वजनिक सुविधाएं 60 फीसदी तक असरदार रहीं और उपचार सुविधाओं की मांग को नवंबर के पहले सप्ताह तक पूरा किया जा सकता है. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसके बाद 5.4 महीनों के लिए आइसोलेशन बेड, 4.6 महीनों के लिए आईसीयू बेड और 3.9 महीनों के लिए वेंटिलेटर की कमी पड़ सकती है.

हालांकि, स्टडी में ये भी कहा गया है कि लॉकडाउन और जन स्वास्थ्य सुविधाओं की वजह से कोरोना वायरस के मामलों में 83 फीसदी तक की कमी आई है. इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ने और विभिन्न क्षेत्रों में संक्रमण फैलने की गति अलग-अलग होने के कारण महामारी के प्रभावों को घटाया जा सकता है. अगर स्वास्थ्य सुविधाओं को 80 फीसदी तक बढ़ा लिया गया तो इस वायरस को काबू में किया जा सकता है.

मॉडल आधारित विश्लेषण के मुताबिक लॉकडाउन में ज्यादा टेस्टिंग, मरीजों को आइसोलेट और उनका इलाज करने की वजह से चरम पर पहुंचने के बावजूद कोरोना के मामलों में 70 फीसदी और संक्रमण के बढ़ते मामलों में करीब 27 फीसदी की कमी आ सकती है. वहीं मृत्यु दर के बारे में बात की जाए तो लॉकडाउन की वजह से लगभग 60 फीसदी मौत के मामलों में कमी आई है. 

शोधकर्ताओं ने कहा कि बीमारी के प्रबंधन में नीतियों की सही समीक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती शामिल होगी. स्टडी में कहा गया है, 'लॉकडाउन की वजह से कोरोना को पीक पर पहुंचने में समय लगेगा जिसकी वजह से हमारे हेल्थ सिस्टम को टेस्टिंग करने, आइसोलेशन, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग कर मरीजों का इलाज करने के लिए पूरा समय मिल जाएगा. जब तक कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं आ जाती, ये भारत में महामारी का प्रभाव घटाने का मुख्य आधार होंगे.

स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार भारत में रविवार को कोरोना वायरस के 11,929 मामले आए हैं जिससे इसके कुल मामले तीन लाख के पार हो चुके हैं. इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 9,195 हो गई है. कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया है.

9 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया है और इस समय 958 ऐसे अस्पताल हैं, जहां सिर्फ कोरोना के मरीजों का इलाज किया जा रहा है. इसके अलावा 1,67,883 आइसोलेशन बेड, 21,614 आइसीयू और 73,469 ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड उपलब्ध हैं.

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