ISRO ने रच दिया इतिहास : भारत का पहला छोटा रॉकेट SSLV किया गया लॉन्च, जानें क्या है ये और इसकी खासियत

भारत की स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया है.

Update: 2022-08-07 06:07 GMT

भारत की स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया है. रविवार को इसरो ने अपना पहला छोटा रॉकेट लॉन्च कर दिया है. पहला स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) मिशन कई कारणों से काफी खास है. एसएसएलवी अपने साथ दो सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में लॉन्च करने के लिए लेकर गया है. जिसमें अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट EOSO2 के साथ स्टूडेंट सैटेलाइट AzaadiSAT लॉन्च किया गया है.

चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर दूर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसएचएआर) के पहले लॉन्च पैड से सुबह नौ बजकर 18 मिनट पर रॉकेट प्रक्षेपित किया गया. प्रक्षेपण के करीब 13 मिनट बाद रॉकेट के इन दोनों उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया गया. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह जानकारी दी.

बता दें, SSLV एक स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है. ये PSLV रॉकेट से आकार में काफी छोटा होता है. छोटे सैटेलाइट्स के लिए SSLV की जरूरत महसूस हुई थी, जिसके बाद इसपर काम शुरू किया गया. मिशन को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 9:18 बजे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में लॉन्च किया गया है.

लॉन्च के 13 मिनट बाद उपग्रहों के कक्षा में स्थापित होने की उम्मीद

इसे एसएसएलवी का उद्देश्य उपग्रह ईओएस-02 और आजादीसैट को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करना था. अपने भरोसेमंद ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी), भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के माध्यम से सफल अभियानों को अंजाम देने में एक खास जगह बनाने के बाद इसरो ने लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) से पहला प्रक्षेपण किया, जिसका उपयोग पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों को स्थापित करने के लिए किया जाएगा.

एसएसएलवी कैसे पीएसएलवी से अलग है?

इसरो के वैज्ञानिक ऐसे छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए पिछले कुछ समय से लघु प्रक्षेपण यान विकसित करने में लगे हुए हैं, जिनका वजन 500 किलोग्राम तक है और जिन्हें पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जा सकता है. एसएसएलवी 34 मीटर लंबा है जो पीएसएलवी से लगभग 10 मीटर कम है और पीएसएलवी के 2.8 मीटर की तुलना में इसका व्यास दो मीटर है. एसएसएलवी का उत्थापन द्रव्यमान 120 टन है, जबकि पीएसएलवी का 320 टन है, जो 1,800 किलोग्राम तक के उपकरण ले जा सकता है.

आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर छात्रों के बनाए 75 उपकरण भेजे

माइक्रो श्रेणी के ईओ-02 उपग्रह में इंफ्रारेड बैंड में चलने वाले और हाई स्पेशियल रेजोल्यूशन के साथ आने वाले आधुनिक ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग दिए गए हैं। आजादीसैट आठ किलो का क्यूबसैट है, इसमें 50 ग्राम औसत वजन के 75 उपकरण हैं। इन्हें ग्रामीण भारत के सरकारी स्कूलों की छात्राओं ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर इसरो के वैज्ञानिकों की मदद से बनाया। वहीं स्पेस किड्स इंडिया के विद्यार्थियों की टीम ने धरती पर प्रणाली तैयार की जो उपग्रह से डाटा रिसीव करेगी।

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