सौतेला पिता करता था बच्ची से दुष्कर्म, आजीवन कारावास की सजा, एमडीडी ऑफ इंडिया (करनाल) के प्रयासों से मिला न्याय

एक 15 साल की बच्ची को तब जाकर न्याय मिला जब उस बच्ची ने अपनी एक जानकार महिला को अपने साथ हो रहे यौन शोषण के बारे में गुप्त सूचना दी।

Update: 2022-04-21 13:46 GMT

File Photo

हम सब ने बालपन में लोक-कहानियां पढ़ी हैं और सुनी है जहां एक निश्चित दिन जैसे चंद्र-ग्रहण, सूर्य-ग्रहण, पूर्णिमा या फिर अमावस्या की मध्य-रात्रि को जब चंद्रमा आसमान में पूर्ण-प्रत्यक्ष होता है तब कुछ इंसान भेड़िए के रूप में बदलने लगते हैं। उस स्थिति में उनमें पाशविक प्रवृत्ति आने लगती है; उनके कपड़े फट जाते हैं, शरीर का आकार बदलने लगता है, दांत नाखून पूंछ निकल आते हैं और सामाजिकता को पूरी तरह से भूल कर वह किसी अज्ञात शिकार की तलाश में निकल पड़ते हैं।

पर कैसा हो, अगर सचमुच ही कोई बच्चा यह देख ले कि उसके घर के सदस्य रात के अंधेरे में अपना रूप बदलकर भेड़िए बन जाते हैं । वह भी एक नहीं तीन-तीन परिवार के सदस्य और जानवर बनने के लिए उन्हें किसी पूर्णिमा अमावस्या की जरूरत नहीं पड़ती । फिर हर दिन उन बच्चों के लिए ग्रहण-सा मनहूस और रात्रि भयानक कालरात्रि हो जाती है ।

पर जिस तरह दिन-रात का क्रम चलता है,

सच-झूठ का मंच सजता है

वैसे ही अन्याय के बाद न्याय का समय भी आता है।

यह दिल दहला देने वाली घटना तब प्रकाश में आई जब कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के सौजन्य से एमडीडी ऑफ इंडिया द्वारा चलाए जा रहे "न्याय तक पहुंच" कार्यक्रम के तहत टीम द्वारा जनवरी 2022 में एफ आई आर नंबर 0130 /2018 का केस लिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के साथ उचित न्याय और अनैतिकता को जड़ से खत्म करने का दृढ़-संकल्प था । जिसके लिए केएससीएफ और एमडीडी ऑफ इंडिया (करनाल हरियाणा) द्वारा हर संभव प्रयास किया गया ।

यह घटना इस प्रकार है कि एक 15 साल की बच्ची को तब जाकर न्याय मिला जब उस बच्ची ने अपनी एक जानकार महिला को अपने साथ हो रहे यौन शोषण के बारे में गुप्त सूचना दी । बताया गया है कि उसकी माता के दूसरे पति जो कि बच्ची के सौतेले पिता है, उनके तथा उनके दो बेटों के द्वारा बच्ची का शारीरिक शोषण किया जा रहा था। पहले तो बच्ची चुपचाप सब कुछ सहती रही पर उसके बाद उसने अपना मुंह इस कारण से खोला क्योंकि अब उसके पिता व उसके भाइयों की छोटी बहनों पर भी नियत खराब होने लगी थी। उस महिला ने सीडब्ल्यूसी से संपर्क किया और सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन सुरेंद्र सिंह मान व सहयोगी दल ने बच्ची को रेस्क्यू किया और उसकी काउंसलिंग करवाई ।

यह कहानी उसी बच्ची की है जिसने अपनी आंखों के सामने अपने पिता और अपने भाइयों को इंसान से बदलकर जानवर बनते हुए देखा है। ऐसी न जाने कितनी रात बीती होगी जब वह डर और आतंक के साए में रात भर सोई नहीं होगी। बच्ची इतनी डरी और सहमी हुई है जुबान से पहले उसकी आंखें ही बहुत कुछ बयां कर देती है।

एमडीडी ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट सुरेंद्र सिंह मान ने कहा "जब ऐसी घटनाएं हमारे सामने आती हैं तो हम आश्चर्यचकित रह जाते हैं- क्या ऐसा भी घृणित कार्य कोई कर सकता है? सामाजिकता पर से हमारा विश्वास उठने लगता है। फिर भी हम उठ खड़े होते हैं, अपनी खोई हुई हिम्मत को इकट्ठा करके फिर तलवार सा हर अन्याय के सामने खड़े हो जाते हैं ताकि कोई और जिंदगी बर्बाद ना हो ताकि हम किसी और बच्चे के भी काम आ सके। 

"न्याय तक पहुंच" कार्यक्रम तथा रेस्क्यू दल द्वारा इस केस में बच्ची की काउंसलिंग कराई और उससे अपराध की मार्मिक जानकारी ली गई। टीम द्वारा पाया गया कि चार्जशीट में धारा 8 लगाई गई थी जबकि बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के अनुसार धारा 6 लगाई जानी थी जिससे अपराधियों को उनका उचित दंड मिल सके।

दल ने सरकारी वकील से मिलकर सारी बातों को बताया और धारा 8 को खत्म करके धारा 6 को लगवाया । टीम ने हर प्रकार से बच्ची की सुरक्षा एवं देखभाल का ध्यान रखा और साथ ही साथ समय-समय पर बच्ची की काउंसलिंग करवाई।

यह केस सिर्फ तीन माह में ही कड़ी मेहनत के बाद लक्ष्य को प्राप्त हुआ । कार्यक्रम की ओर से बच्ची को न्याय व आर्थिक सहायता दिलाने में भरपूर सहयोग किया गया ।

बच्ची के सौतेले पिता को आजीवन कारावास और दो भाइयों को 20-20 साल की सजा सुनाई गई। साथ ही बच्ची को 11लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई और यह जानकारी दी गई कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र सिंह मान की ओर से वर्ष 2012 में पोक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण का केस दर्ज कराया गया था।

बच्ची को न्याय व आर्थिक सहायता मिलने पर 'न्याय तक पहुंच' कार्यक्रम के लक्ष्य को हासिल कर टीम को बहुत खुशी का अनुभव हुआ । क्योंकि बच्ची निरक्षर है इसलिए उसे स्कूल भेजने का कार्य न हो सका । पर बच्ची की सीसी आई एम डी डी बाल भवन में वोकेशनल ट्रेनिंग का प्रावधान किया गया है जिसमें कुकिंग व बेकिंग शामिल है ताकि बच्ची बड़ी होकर आत्मनिर्भर बन सकें और अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकें।

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