मौन खो गया है देश का!
अब नापसंदगी में चिढ़ाया जाता है, गालियाँ दी जाती है, ना केवल बच्चों को कोसा जाता है बल्कि मृत शरीर पर हँसा जाता है।;
अब नापसंदगी में चिढ़ाया जाता है, गालियाँ दी जाती है, ना केवल बच्चों को कोसा जाता है बल्कि मृत शरीर पर हँसा जाता है।
चाहे राहत इंदौरी हों या रोहित सरदाना ...दोनों ने अपने पेशे को अथक परिश्रम और ईमानदारी के साथ टूट कर जिया, दोनों ने छोटे शहरों से निकलकर बड़ी लोकप्रियता हासिल की लेकिन चूंकि इन दोनों की अपनी विचारधारायें थी इसलिए देश के तमाम असफल और कुंठित लोग इन दोनों की मौतों पर हँसे।
खुद आजमा कर देख लीजिए, जलती हुई चिताओं की तस्वीरें आपको उतनी निगेटिविटी नहीं देगी जितना लगातार उजड़ रहे परिवारों के शोक पर अट्टहास लगाते लोगों की पोस्ट। ऐसी पोस्ट ना केवल आपको गुस्सा दिलाएंगी बल्कि आपकी पॉजीटिविटी पर चोट करेगी।
अगर सरकार किसी की भी मौत का मजाक उड़ाने वाले या उसके परिवार को सार्वजनिक तौर पर गाली देने वाले शख्स पर मुकदमा कायम करेगी तो मेरा पूर्ण समर्थन रहेगा।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं.