जो गलती मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह ने की थी, वही गलती मोदी सरकार कर रही है

मरणासन्न कांग्रेस में जान फूंक रही है मोदी सरकार, मोदी सरकार का कांग्रेस को आभार व्यक्त करना चाहिए

Update: 2022-06-13 13:39 GMT

जो बेबकूफी मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह ने की थी, वही मूर्खता मोदी सरकार कर रही है । कांग्रेस ने आज शक्ति प्रदर्शन के जरिये मोदी सरकार को अहसास को अपनी ताकत का प्रदर्शन करा दिया है । एक दो बार ऐसी और कार्रवाई की गई तो मृत कांग्रेस पुनर्जीवित हो जाएगी ।

आपातकाल के दौरान बदले की भावना से ओत प्रोत होकर इंदिरा गांधी को खूब परेशान किया जाने लगा । आपयकल के बाद कांग्रेस पार्टी पूरी तरह कौमा में चली गई थी । लेकिन मोरारजी देसाई और चरणसिंह ने मोदी की तर्ज पर इंदिरा गांधी को परेशान किया जाने लगा तो पब्लिक की सहानुभूति इंदिरा के प्रति उमड़ने लगी । नयीजतन वे फिर सत्ता पर काबिज होगई और उस वक्त की जनता पार्टी कई टुकड़ो में बिखरकर अपना वजूद खो बैठी ।

वही गलती आज मोदी सरकार कर रही है । कांग्रेस आज मरणासन्न स्थिति में है । धीरे धीरे वह सिमटकर अपना वजूद समाप्त कर रही है । यूपी जैसे राज्य में दो सीट लाना इस बात की ओर संकेत करती है कि आने वाले दिनों में भारत पूरी तरह कांग्रेस मुक्त होने वाला है । यूपी की विधान परिषद तो पूर्णतया कांग्रेस विहीन है । पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में हुई शर्मनाक हार पार्टी के लिए खतरे की घंटी है ।

ईडी का नोटिस दिया जाना चाहिए अथवा नही, यह इतर बात है । लेकिन इस नोटिस के बाद जंग लगी कांग्रेस फिर से चमकने जा रही है । एक दो बार ऐसी हरकत हुई तो कांग्रेस के लिए बीजेपी पर हावी होना ज्यादा मुश्किल नही होगा । बीजेपी इसलिए तेजी से पैर पसारती जा रही है क्योंकि उसका नेतृत्व कौमा में है । जिस दिन नेतृत्व होश में आ गया अथवा सचिन पायलट जैसे युवा हाथो में चला गया, उसके बाद बीजेपी के पतन की शुरुआत होना सुनिश्चित है ।

निश्चय ही अपराधी को दंडित करने के लिए केंद्रीय एजेसियों का सक्रिय होना जरूरी है । नेशनल हेराल्ड की बात छोड़ते है । मोदी सरकार को बताना चाहिए कि बीएसएनएल की दुर्गति की लिए कौन जिम्मेदार है ? दरअसल यह सारा खेल जिओ की बहबूदी के लिए खेला गया । जो लोग अरबो रुपये लेकर सरकारी सरंक्षण में विदेश भाग गए, उनके प्रति मोदी सरकार खामोश और उदासीन है । जबकि बदले की भावना से सोनिया और राहुल को ईडी का नोटिस जारी करना बदनीयती का परिचायक है ।

अमित शाह का बेटा अरबो रुपये कमा लेता है और बाबा रामदेव, मुकेश अम्बानी और गौतम अडानी सरकार को अंगूठा दिखाकर गैर कानूनी तरीके से अरबो नही खरबो रुपये कमा रहे है । मोदी सरकार इनकी प्रति इतनी मेहरबान क्यो ? दरअसल मोदी सरकार को नरेंद्र मोदी नही मुकेश अम्बानी और गौतम अडानी जैसे लोग संचालित कर रहे है । विदेशो से काले धन की वापसी के प्रति सरकार उदासीन और खामोश क्यो है, जवाब देंगे संबित पात्रा ?

कांग्रेस की ओर से असज जिस तरह का प्रदर्शन और घेराव किया गया, वह भी निंदनीय है । इससे देश मे यह संदेश जाता है कि निश्चित रूप से सोनिया और राहुल ने हेराफेरी की होगी । अगर कांग्रेस को प्रदर्शन ही करना है तो मोदी की भ्रस्ट रीति और नीतियों के खिलाफ करना चाहिए । महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है । उस पर कांग्रेस उदासीन क्यो ? कांग्रेस को चाहिए कि हर माह की एक तारीख को तहसील और ढाणी स्तर पर प्रदर्शन कर निकम्मी और भ्रस्ट मोदी सरकार को चुनावो तक जगाना चाहिए तभी सरकार की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा ।

नेशनल हेराल्ड प्रकरण

नेशनल हेराल्ड प्रकरण दिसम्बर 2015 में जारी एक मुकदमा है जिसे प्रसिद्ध राजनेता सुब्रमनियन स्वामी ने सोनिया गाँधी, राहुल गांधी एवं उनकी कम्पनियों एवं उनसे सम्बन्धित अन्य लोगों के विरुद्ध आरम्भ किया है था। इस मामले में गांधी परिवार को एक बहुत बड़ा झटका तब लगा जब प्रवर्तन निदेशालय नें ६४ करोड़ रूपए की सम्पत्ति को स्थायी रूप से कुर्क कर दिया । ये सम्पत्तियाँ हरियाणा के पंचकुला में हैं ।

आरोप एवं इतिहास

सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि गांधी परिवार हेराल्ड की संपत्तियों का अवैध ढंग से उपयोग कर रहा है जिसमें दिल्ली का हेराल्ड हाउस और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। वे इस आरोप को लेकर 2012 में कोर्ट गए। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दूबे और सैम पित्रोदा को समन जारी कर पेश होने के आदेश जारी किए थे। तब से इस आदेश की तामील लंबित है।

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी से लोन देने के नाम पर नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली । कांग्रेस ने पहले नेशनल हेराल्ड की कंपनी एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को 26 फरवरी, 2011 को 90 करोड़ रुपये का ऋण दिया। इसके बाद पांच लाख रुपये से यंग इंडिया कंपनी बनाई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास है ।

इसके बाद के 10-10 रुपये के नौ करोड़ शेयर यंग इंडिया को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडिया को कांग्रेस का ऋण चुकाना था। नौ करोड़ शेयर के साथ यंग इंडिया को एसोसिएट जर्नल लिमिटेड के 99 प्रतिशत शेयर हासिल हो गए। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का ऋण भी माफ कर दिया। यानी यंग इंडिया को मुफ्त में एजेएल का स्वामित्व मिल गया ।

सुब्रमण्यम स्वामी के प्रश्न

सोनिया-राहुल की कंपनी यंग इंडिया ने दिल्ली में सात मंजिला हेराल्ड हाउस को किराये पर कैसे दिया? इसकी दो मंजिलें पासपोर्ट सेवा केंद्र को किराये पर दी गईं जिसका उद्घाटन तत्कालीन विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने किया था। यानि यंग इंडिया किराये के तौर पर भी बहुत पैसा कमा रही है । राहुल ने एसोसिएटेड जर्नल में शेयर होने की जानकारी 2009 में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में छुपाई और बाद में 2 लाख 62 हजार 411 शेयर प्रियंका गांधी को ट्रांसफर कर दिए। राहुल के पास अब भी 47 हजार 513 शेयर हैं।

20 फरवरी 2011 को बोर्ड के प्रस्ताव के बाद एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड को शेयर हस्तांतरण के माध्यम से यंग इंडिया को कैसे ट्रांसफर किया गया जबकि यंग इंडिया कोई अखबार या जर्नल निकालने वाली कंपनी नहीं है । कांग्रेस द्वारा एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड को बिना ब्याज 90 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज कैसे दिया गया जबकि यह गैर-कानूनी है क्योंकि कोई राजनीतिक पार्टी किसी भी व्यावसायिक काम के लिए कर्ज नहीं दे सकती । जब एसोसिएटेड जर्नल का ट्रांसफर हुआ तब इसके ज्यादातर शेयरहोल्डर मर चुके थे ऐसे में उनके शेयर किसके पास गए और कहां हैं?

कैसे एक व्यावसायिक कंपनी (यंग इंडिया) की मीटिंग सोनिया गांधी के सरकारी आवास 10 जनपथ पर हुई ?

इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, मोतीलाल वोरा और सुमन दुबे सहित 6 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। निचली अदालत ने 26 जून को सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर समन जारी किए थे। इसके बाद सोनिया और राहुल के वकील ने अदालत में व्‍यक्तिगत रूप से पेश होने में छूट और समन रद्द करने को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे ८ दिसम्बर २०१५ को दिल्‍ली हाईकोर्ट ने भी ठुकरा दिया और सभी अभियुक्तों को १९ दिसम्बर को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश किया ।

न्यायाधीश ने 27 पेज के आदेश में कहा कि पूरे मामले पर उसके व्यवस्थित परिप्रेक्ष्य में विचार करने के बाद, अदालत को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में कोई संकोच नहीं कि 'यंग इंडिया लिमिटेड' (वाईआईएल) के जरिये 'एसोसिएटिड जरनर्ल्स लिमिटेड' (एजेएल) पर नियंत्रण हासिल करने में याचिकाकर्ताओं द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली, जबकि कांग्रेस पार्टी, एजेएल और वाईआईएल के मुख्य लोग समान हैं, आपराधिक मंशा का सबूत देती है ।

न्यायाधीश ने कहा कि बहरहाल, किसी भी सूरत में यह नहीं कहा जा सकता है कि संबंधित शिकायत के आरोपी के तौर पर याचिकाकर्ताओं को तलब करने के लिए कोई मामला नहीं बनता। सच जानने के लिए याचिकाकर्ताओं के संदिग्ध आचरण पर आरोप के चरण में उचित तरीके से जांच की जरूरत है और इसलिए इन आपराधिक कार्यवाहियों को इस शुरूआती चरण में निरस्त नहीं किया जा सकता ।

न्यायाधीश ने यह भी राय व्यक्त की कि याचिकाकर्ताओं (सोनिया, राहुल और अन्य) पर लगे आरोपों की गंभीरता में एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल से जुड़ा धोखाधड़ी का आभास होता है और इसलिए याचिकाकर्ताओं पर लगे गंभीर आरोपों पर उचित तरीके से गौर किये जाने की जरूरत है।

अन्ततः १९ दिसम्बर को सोनिया और राहुल सहित सभी अभियुक्त (साम पित्रोदा को छोड़कर) न्यायालय में हाजिर हुए। न्यायालय ने उन्हें जमानत पर छोड़ते हुए पुनः २० फरवरी २०१५ को हाजिर होने को कहा है।

अदालत में यंग इंडियन द्वारा एजेएल के अधिग्रहण को चुनौती दी गई है । जो अहम सवाल उठे हैं, वे निम्‍नलिखित हैं

–सोनिया और राहुल की 76 पर्सेंट हिस्‍सेदारी वाली यंग इंडियन लिमिटेड कंपनी पर एजेएल के 90 करोड़ रुपए की देनदारी क्‍यों डाली गई? यंग इंडियन के शुरू होने के एक महीने बाद ही एजेएल उसकी सहायक कंपनी बन गई। यंग इंडियन एजेएल की पूरे भारत में स्‍थ‍ित संपत्‍त‍ि की मालिक बन गई।

–एजेएल ने अपनी संपत्‍त‍ि के कुछ हिस्‍से का इस्‍तेमाल करके कर्ज क्‍यों नहीं चुकाया? यह भी साफ नहीं है कि एजेएल ने यंग इंडियन कंपनी से अधिग्रहण के लिए अपने 1000 से ज्‍यादा शेयरधारकों की मंजूरी ली कि नहीं?

–क्‍या एजेएल की संपत्‍त‍ि का आकलन ठीक ढंग से हुआ क्‍योंकि महज 90 करोड़ रुपए के कर्ज और 50 लाख रुपए के अतिरिक्‍त भुगतान पर पूरे भारत में मौजूद कंपनी की संपत्‍त‍ि यंग इंडियन को सौंपने का फैसला कर दिया गया।

–कांग्रेस कमेटी में कोषाध्‍यक्ष, एजेएल में डायरेक्‍टर और यंग इंडियन में शेयरहोल्‍डर और डायरेक्‍टर का पद संभाल रहे मोतीलाल वोरा पर क्‍या हितों के टकराव का मामला बनता है?

–द रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्‍ट 1950 के मुताबिक, कोई राजनीतिक पार्टी किसी को लोन नहीं दे सकती। ऐसे में कांग्रेस ने एजेएल को लोन कैसे दिया?

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